khansi ka gharelu upay

खांसी के घरेलू उपाय

खाँसी सबसे आम स्वास्थय समस्याओं में से एक है । जब कोई रूकावट या तकलीफ देने वाली अड़चन आपके गले या ऊपरी वायु मार्ग में होती है, तो आपका दिमाग आपके षरीर को संकेत देता है, इस अड़चन को हम खाँसने के द्वारा निकालते हैं। खाँसी एक वायरल संक्रमण है, यह विभिन्न स्वास्थय समस्याओं जैसे अस्थमा, टी.बी, और फेंफड़ों के कैंसर का कारण भी हो सकती है ।

खाँसी के कुछ लक्षण हैं – गले में खराष, सीने में दर्द और रक्तसंकुलता । खाँसी की बीमारी के लिए कफ सिरप की बजाय कुछ प्राकृतिक उपचार अपने रसोई घर में आसानी से उपलब्ध सामग्री का उपयोग करके कर सकते हैं ।

खाँसी के दस घरेलू उपचार निम्नलिखित है –

1. खाँसी से छुटकारा पांए लहसुन से ।

लहसुन में जीवाणुरोधी और रोगाणुरोधी दोनों घटक होते हैं जो खाँसी के इलाज में मदद करते हैं । तीन लहसुन की लौंग और एक चम्मच अजवायन गर्म पानी में मिला लें इसके ठंड़ा होने पर इसमें थोड़ी सी मात्रा में षहद मिलाकर पी लें । यह सांस लेने और अन्य खाँसी के लक्षणों मे जल्द राहत देगा । पिसा हुआ लहसुन को लौंग के तेल की कुछ बूंदो में मिलाकर पीने से खाँसी में राहत मिलेगी एंव खाने में लहसुन का प्रयोग करने से भी राहत मिलती है ।

2. खाँसी रोकने का उपाय नींबू है ।

नींबू को भी हम खाँसी के इस्तेमाल के लिए उपयोग कर सकते हैं, नींबू के गुण सूजन कम कर देते हैं और संक्रमण से लड़ने वाले विटामिन प्रदान करते हैं । दो बड़े चम्मच नींबू का रस के साथ एक बड़ा चम्मच षहद मिलाकर सीरप बनाकर पीने से खाँसी में जल्द आराम मिलता है । नींबू को हम खाँसी से बचाव के लिए एक और तरीके से इस्तेमाल कर सकते हैं- थोड़े से षहद के साथ एक चुटकी लाल मिर्च और नींबू का रस मिलाकर पीने से खाँसी में जल्द आराम मिलता है ।

3. खाँसी से छुटकारा पाने का घरेलू नुस्खा है अदरक ।

अदरक को खाँसी के सबसे लोकप्रिय प्राकृतिक इलाजों में से एक माना जाता है। ताजा अदरक को छोटे स्लाईस में काटकर पीसने के बाद उन्हें एक कप गर्म पानी में उबालकर आप इस हर्बल समाधान को दिन में तीन से चार बार पिंए इससे गले की खराष और खाँसी में जल्द राहत मिलती है । आप जल्दी खाँसी को कम करने के लिए दिन भर में कच्चे एंव ताजा अदरक को चबा सकते हैं ।

4. खाँसी को दूर करने का घरेलू उपाय लाल मिर्च है ।

लाल मिर्च लगातार खाँसी होने के कारण से होने वाले सीने के दर्द को कम करती है । यह गर्म होने के साथ-साथ उत्तेजक भी होती है । एक चैथाई चम्मच लाल मिर्च, एक चैथाई चम्मच अदरक, एक बड़ा चम्मच षहद, एक बड़ा चम्मच सेब का सिरका, और दो बड़े चम्मच पानी मिलाकर इस मिश्रण को तैयार करें एंव इस मिश्रण को दिन में दो से तरन बार पिंए । इससे खाँसी एंव खाँसी से होने वाले सीने के दर्द में लाभ मिलता है ।

5. खाँसी रोकने का घरेलू उपाय है प्याज ।

खाँसी के लिए सबसे सरल नुस्खों में से एक नुस्खा प्याज को काटना है, इस मजबूत वाश्प में सांस लेना खाँसी को रोकने में मदद करता है। आप पके हुए प्याज के रस, कंफ्री, चाय और षहद को मिलाकर खाँसी की घरेलू सिरप बना सकते हैं, इसका दैनिक रूप से सेवन करने से सूखी खाँसी से राहत मिलती है । आधा चम्मच प्याज के रस के साथ आधा चम्मच षुद्व षहद मिलाकर पीने से खाँसी से राहत मिलने के साथ गला भी षांत हो जाता है ।

6. खाँसी को दूर रखने का घरेलू उपाय है हल्दी ।

हल्दी एक आयुर्वदिक जड़ी-बूटी है। हल्दी का खाँसी विषेश रूप से सूखी खाँसी पर एक उपचारात्मक प्रभाव पड़ता है । एक उबलते हुए बर्तन में आधा कप पानी गर्म करें, उसमें एक चम्मच हल्दी पाउड़र और एक चम्मच काली मिर्च पाउड़र मिलाँए, आप दालचीनी भी मिला सकते हैं । इसको दो से तीन मिनट तक उबालें एंव इसमें षहद का एक बड़ा चम्मच मिलाँए, और इसे दैनिक रूप् से पिएं तब तक हालत में सुधार न हो जाए ।

हल्दी को हम एक और तरीके से उपयोग कर सकते हैं – हल्दी की जड़ को भून कर एक मुलायम पाउड़र की तरह पीस लें, इस मिश्रण को पानी और षहद के साथ मिलाकर दिन में दो बार पिएं ।

7. खाँसी से बचने का घरेलू नुस्खा है बादाम ।

बादाम में पोशण गुण होते हैं जो कि खाँसी के लक्षणों के उपचार में एक सक्रिय भूमिका निभाते हैं । पांच से छह बादाम पानी में भिगोकर रखें एंव इन्हे निकालने के बाद इनका एक चिकना पेस्ट तैयार करें एंव इसमें एक चम्मच मक्खन मिला लें, यह पेस्ट दिन में तीन से चार बार खांए जब तक आपको खाँसी एंव इसके लक्षणों से आराम न मिल जाए ।

8. खाँसी को कम करने का उपाय है अंगूर ।

टंगूर सेहत के लिए बहुल लााभदायक होते हैं एंव खाँसी से बचाव के लिए भी अंगूर का उपयोग किया जाता है । अंगूर आपकी सांस की प्रणाली के प्रभावित हिस्सों से बलगम हटाने का काम करता है, जितनी जल्दी बलगम निकलेगा उतनी जल्दी आपको खाँसी से आराम मिलेगा । आप सीधे अंगूर को खा सकते है एंव इसका रस निकालकर भी पी सकते हैं । अगर अंगूर के रस में एक चम्मच षहद मिला लेें तो ये खाँसी के लिए बहुत ही गुणकारी है ।

9. खाँसी से तत्काल राहत दिलाता है षहद के साथ गर्म दूध ।

षहद के साथ गर्म दूध पीने से सूखी खाँसी से हो रहे गले में दर्द और लगातार खाँसी होने से गले के दर्द में आराम मिलता है। सर्वोतम परिणाम के लिए इसे सोने से पहले प्रतिदिन पिएं । सुबह उठ कर खाली पेट षहद पीने से बलगम साफ करने और गले को षांत करने में मदद करता है ।

10. खाँसी को दूर करने का घरेलू उपाय है गाजर का रस ।

गजर में अनेक प्रकार के विटामिन एंव पोशक तत्व होते हैं जो कि खाँसी के विभिन्न लक्षणों में मदद करते हैं। चार से पांच गाजर का रस बनाएं एंव थोड़ा पानी मिलाकर इसे पतला कर लें । अपने स्वादनुसार आप इसमें षहद भी मिला सकते हैं । एक दिन में तीन से चार बार गाजर के रस को पिएं तब तक आपको खाँसी में सुधार न मिल जाए ।

नपुंसकता का इलाज (Napunsakta ka ilaj)

Napunsakta Ka Ilaj

नपुंसकता जिसे आम बोल-चाल के भाषा में मर्दाना कमजोरी अथवा नामर्दी के नाम से जानते हैं, आज के बदलते परिवेश में नामर्दी अथवा नपुंसकता के बारे में अधिकतर लोग जानते है ||

नपुंसकता क्या हैं ?

नपुंसकता पुरुषों में होने वाला यौन रोग हैं , जिससे पुरुषों के लिंग में उत्तेजना न आना, उत्तेजना के बाद जल्दी शांत हो जाना, कामेच्छा की कमी और संभोग करने के समय या करने से पहले घबराहट होना |

 

नामर्दी अथवा नपुंसकता के कारण

साधारणतः पुरुषों में 60 साल के बाद और महिलाओं में 45 साल के बाद हॉर्मोन की कमी होने लगती है, जिससे उनके उत्तेजित होने में समय लगता है या फिर वे उत्तेजित ही नहीं हो पाते हैं। इसके आलावा नपुंसकता के दो अहम कारण होते हैं |

1 शारीरिक
शारीरिक नपुंसकता गुप्तांग में ब्लड सप्लाई की कमी की वजह से या नर्व्स की गड़बड़ी से या हॉर्मोनल असंतुलन इसकी वजह हो सकते है । किसी अन्य बीमारी के साइड इफ़ेक्ट के कारण भी नपुंसकता की समस्या हो सकती है |

2 मानसिक
वही मानसिक नपुंसकता दिमाग से जुड़ी रहती है, अधिकतर लोग मानशिक नपुंसकता के ही शिकार होते है | इसका कारण मुखी तेह भय, चिंता और हीन-भावना होती हैं।

 

नपुंसकता का इलाज

 

नपुंसकता के घरेलू इलाज

1. जामुन की गुठली पीस कर इसका पाउडर बना ले और गरम दूध के साथ हर रोज ले। इस उपाय से स्पर्म की संख्या बढ़ने लगेती है और कामेच्छा की कमी को दूर करता हैं ।

2. वीर्य दोष यानि आपको धातु क्षिणता हो तो आधा चम्मच हल्दी पाउडर एक चम्मच शहद में मिला कर सुबह सुबह खाली पेट सेवन करते रहने से संभोग शक्ति बढ़ती है।

3. मेवों के सेवन से भी उत्‍तेजना की समस्‍या का इलाज किया जा सकता है. बादाम, खजूर, किश्‍मिश और पिस्‍ता का रोजाना सीमित मात्रा में सेवन करने से सेक्‍स समस्‍याओं से निजात मिल सकती है.

नपुंसकता के लिए जरुरी योग आसन और व्यायाम

वज्रोली क्रियाविधि :- इस से वीर्य स्थिर होगा मस्पसिओ में मजबूती आएगी. इसे से नपुंशकता के सतह स्वप्नदोष और शीघ्रपतन छुटकारा मिलता है |

भुजंगासन :- इस से आपके गुप्तांग के नसों में मजबूती आएगी मलस्वरूप लिंग में तनाव आने लगेगा और आप की नपुंसकता की समस्या ख़तम हो अजयेगी ।

सलहा : – अगर उपरोक्त दे गयी जानकारी से लाभ नहीं होता है तो अपने फॅमिली डॉक्टर से या किसी नजदीकी अनुभवी डॉक्टर को दिखाए |

या कॉल करे अशोक क्लिनिक पर किसी भी समय |

धन्यवाद,
डॉ. अशोक गुप्ता

शीघ्रपतन के कारण | Shighrapatan Ke Karan

सम्भोग के समय या पहले वीर्य के शीघ्र स्खलित हो जाने को ही शीघ्रपतन की समस्या कहते है, कई बार तो ये समस्या इतने बढ़ा जाती है की योनि में लिंग के प्रवास से पहले संखलेन हो जाता है ।

शीघ्रपतन की समस्या तीन तरह की होती है –

1. सेक्स करने से पहले वीर्य का गिर जाना
3. सेक्स करने के तुरंत बाद वीर्य गिर जाना
4. किसी पुरुष की इच्छा होना से पहले हे वीर्य गिर जाना

शीघ्रपतन के मनोवैज्ञानिक कारण –

अधिकतर शीघ्रपतन के कारण शारीरक न हो क़र मनोविज्ञानिक होता है । शीघ्रपतन के कई मनोविज्ञानिक कारण हो सकते है ।

1. महिला से पहली बार सम्बन्ध बनाना ।
2. नींद पूरी ना होने से प्रभावित हो सकता है आपका यौन जीवन]
3. सेक्स में कम अनुभव होना ।
4. अधिक उत्तेजित होना ।
5. सेक्स के बारे में अधिक सोचना ।

शीघ्रपतन के फिजिकल कारण :

1. डायबिटीज(मधुमेह)
2. मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस
3. पुरस्थग्रंथि(प्रोस्टेट ग्लैंड) में विकार
4. .उच्च रक्तचाप
5. थाइरोइड की समस्या
6. अनुचित दवाओं का सेवन
7. अत्यधिक अल्कोहल का सेवन
8. गुप्तअंग में कमजोरी के कारण

शीघ्रपतन का असर

वैसे तो शीघ्रपतन का प्रजनन अंग पर या आपके शरीर पर कोई असर नहीं पड़ता. पर इससे आपकी जिंदगी अयस्त – व्यस्त हो सकती है । क्योकि शीघ्रपतन के कारण आप अपनी पार्टनर को संतुस्ट नहीं कर पाते । जिस से महिला में चिड़चिड़ापन आने लगता है । ऒर आपसे में झगड़े होने लगते है । कई बार तो महिलाये इस सन्तुस्टि को बाहर तलाशने लगती है । ऒर बसा – बसाया घर टूट जाता है ।

शीघ्रपतन का इलाज

आयुर्वेद में शीघ्रपतन के लिए काफी सारि जड़ीबूटियां है जिनसे बहुत आसानी से शीघ्रपतन का इलाज किया जा सकता है । हम अशोक क्लिनिक के माध्यम से लाखो मरीजों की शीघ्रपतन की समस्या का इलाज कर चुके है । अगर आप को भी ऐसी कोई समस्या है तो संकोच न करे अपने खुशहाल जीवन को बर्बाद होने से बचाए ।

डॉ अशोक गुप्ता
अशोक क्लिनिक दिल्ली

वजन कम करें – (Weight Loss)


वज़न कम करना बहुत मुश्किल लक्ष्य लग सकता है लेकिन वास्तविकता में आप सीख सकते हैं कि बुद्धिमत्तापूर्ण रूप से भोजन और व्यायाम को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करके आप किस प्रकार दो महीनों में अपना वज़न 14 किलोग्राम तक कम कर सकते हैं | नौ सप्ताह की समयावधि में इतने वज़न को कम करने के लिए आपको एक योजना और समर्पण की आवश्यकता होगी लेकिन अगर आप एक बार अपने मन में ठान लें तो आपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं |

बेसल मेटाबोलिक रेट एक ऐसी गणना है जिसमे प्रारूपि रूप से एक दिन में आपके द्वारा जलाई गयी कैलोरी की गणना की जाती है | बेसल मेटाबोलिक रेट की गणना करें और आपके द्वारा खर्च की जाने वाली कैलोरी की अपेक्षा कम कैलोरी ग्रहण करें |

1 माह में कितना वजन कम किया जा सकता है ?

प्रशिक्षित डॉक्टर और डाइटिशियन मानते हैं कि प्रति माह 3 से 4 किलोग्राम वज़न कम करना स्वास्थ्य की दृष्टी से उचित है | इससे अधिक वजन कम करना निश्चित रूप से संभव है, हालाँकि ये बात अलग है कि यह स्वास्थ्य की दृष्टी से सही है या नहीं | जिसके हम आपको सेल्हा भी नहीं देंगे |

2. वज़न घटाने के लिए कितनी कैलोरी को जलाएं ?

एक किलो में 1700 कैलोरी होती है | इसका मतलब है कि आपको एक किलो वज़न कम करने के लिए दिन में ली जाने वाली कैलोरी की अपेक्षा 1700 से अधिक कैलोरी को जलाने की ज़रूरत है |

3. वज़न कम करने का सही तरीका क्या है ?

मनुष्य कई भिन्न-भिन्न तरीकों से वज़न कम कर सकते हैं | इनमे मांसपेशियों की हानि, वसा की हानि, और पानी की हानि शामिल है | दो महीनों के दौरान आपकी आशा के अनुरूप कम होने वाला वज़न पानी की हानि होने से होता है और यह ठीक है | अगर आप अपनी स्वस्थ जीवनशैली के साथ नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करते हैं तो आप अपने लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब हो सकेंगे

4. भोजन क्यों न छोड़ें ?

चूँकि एक सफल डाइटिंग की कुंजी है कि खर्च की जाने वाली कैलोरी से कम कैलोरी ग्रहण करें, इस तरीके में भोजन को छोड़ना शामिल नहीं किया गया है | भोजन छोड़ना भुखमरी प्रतिक्रिया का संभावित ट्रिगर है और अधिक लालच में आकर ठूस-ठूस कर खाना भी बंद करें |

5. क्या खाये ?

A. लीन प्रोटीन खाएं

उच्च प्रोटीन युक्त डाइट वज़न कम करने के लिए ज़रूरी होती है | अध्ययन दर्शाते हैं कि उच्च प्रोटीन डाइट के द्वारा कम कैलोरी खाने का पालन करने वाले प्रतियोगियों में अधिक संतोष देखा गया है और इस प्रकार की डाइट को शुरू करने से पहले की अपेक्षा वे अधिक संतुष्टि अनुभव करते हैं |

लीन मीट जैसे टर्की और चिकन ब्रैस्ट
मछली जैसे टूना
लीन डेरी जैसे स्किम मिल्क या कॉटेज चीज़ या कम वसा युक्त दही
सोया-प्रोडक्ट्स, जैसे टोफू
बीन्स और फलियाँ जैसे राजमा और दालें

B. साधारण कार्बोहायड्रेट के स्थान पर जटिल कार्बोहायड्रेट को प्राथमिकता दें

जटिल और साधारण कार्बोहायड्रेट में ज़मीन-आसमान का अंतर है | साधारण कार्बोहायड्रेट जैसे सफ़ेद ब्रेड, सोडा पॉप और कूकीज़ में एक साधारण केमिकल संरचना होती है जिसे हमारा शरीर अपेक्षाकृत जल्दी पचा लेता है; और अधिकतर इसकी अतिरिक्त मात्रा फैट या वसा के रूप में जमा हो जाती है |

जटिल कार्बोहायड्रेट जैसे

सफ़ेद ब्रेड के स्थान पर समग्र अनाज वाली ब्रेड चुनें
”सामान्य” पास्ता के स्थान पर समग्र अनाज वाला पास्ता चुनें
सफ़ेद चावल के स्थान पर ब्राउन राइस चुनें
स्टार्च से भरपूर आलू के स्थान पर सब्जियां जैसे ब्रोकॉली चुनें
शर्करा, सोडा और मिठाइयों के स्थान पर नट्स, बीन्स और फलियाँ चुनें

ये शरीर में लम्बे समय के बाद पचते हैं अर्थात् आपको लम्बे समय तक पेट के भरे होने की अनुभूति रहती है जिससे ये सम्भावना कम हो जाती है कि आपके द्वारा खाया जाने वाला कार्बोहायड्रेट फैट के रूप में जमा होगा |

C. स्वस्थ वसा चुनें:

सभी वसाओं (Fats) को नहीं छोड़ना चाहिए | व्यापक रूप से कहें तो, दो प्रकार के “स्वस्थ” फैट और दो प्रकार के “अस्वस्थ” फैट होते हैं | अपनी डाइट में कुछ स्वस्थ फैट का समावेश करने से वज़न कम करने पर भी आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है |

“Polyunsaturated” को मनुष्य के लिए स्वस्थ फैट माना गया है और इन्हें सुरक्षित रूप से डाइट में शामिल किया जा सकता है |
Polyunsaturated फैट के उदाहरण में शामिल हैं – एवोकाडो, नट्स, ऑलिव और कद्दू के बीज | पोलीअनसैचुरेटेड फैट के उदाहरण हैं- ओमेगा-3 फैटी एसिड्स जैसे Salmon मछली और सन के बीज |

”Saturated” और Trans fats से बचें: ये फैट न केवल कोलेस्ट्रॉल स्तर के लिए बुरे हैं जिनसे आपको कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (cardiovascular dieases) होने की सम्भावना बढ़ जाती है, बल्कि इनसे कोई वास्तविक पोषण का लाभ भी नहीं मिलता है | जब आप डाइटिंग कर रहे हों तब विशेषरूप से इनसे दूर रहना चाहिए | सभी फ़ास्ट फ़ूड Saturated फैट के मुख्य श्रोते है |

Note : जब वज़न कम करने की बात आती है तो शाकाहारी बनने से बहुत लाभ मिलते हैं, इससे आपको स्वस्थ भोजन करने में मदद मिलेगी |

6. डाइटिंग करनी चाहिए ?

डाइटिंग करनी चाहिए | पर कुछ लोग डाइटिंग बनी विचार किये बिना किसी विशेषज्ञ की सेल्हा के खुद ही शुरू क़र देते है जिसके परिणाम बहुत हानि कारक हो सकते है | आप ऐसा न करे |
हर व्यक्ति का वेट लोस्स के लिए डाइट उनके शरीर के अनुसरे दे जाती है | इस लिए सभी डाइटिंग चार्ट एक जैस अनहि हो सकता | इसलिए आप डाइट एक्सपर्ट से सेल्हा लेकर अपने लिए उपयुक्त डाइट चार्ट त्यार करे, तभी आप स्वस्थ रूप से वजन घटा सकते है |

निरंतरता बनाये रखें:

निरंतरता बनाये रखना बहुत जरुरी है | सब्सि बड़ी कठनाई वजन घटने के लिए निरंतरता बनये रखना हे | निरंतरता बनये रखने के लिए प्रेरित रहना जरुरी है | प्रेरित रहने के लिए एक साप्ताहिक या मासिक लक्ष्य निर्धारित करें, और है अपना शरुआती लक्ष्ये बड़ा न रखे, शुरु में छोटे – छोटे लक्ष्य बनाये और उन्हें पूरी मेहनती से प्राप्त करे इस से आप की निरंतरता बनी रहेगी |

आयुर्वेदा को अपनाये –

अगर आप सही डाइट, योग और व्यायाम के साथ आयुर्वेदा इलाज को जोड़े लेंगे तो आपको वजन कम करने में काफी आसानी होगी | क्योकि आयुर्वेद में काफी साडी ऐसी जड़ीबूटियां जो Saturated फैट को आसानी से कम कर सकती है | में अशोक क्लिनिक से डॉ अशोक गुप्ता सालो से इन्ही जड़ीबूटियों ये लोगो की वजन घटाने में मदत करता आये हु |

अगर आप भी वजन घटाने चाहते है तो उपरोक्त दी सेल्हा को अवस्य अपनये |

हमारा आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद | उम्मीद करता हु आपके जीवन में मेरी सलहा काम आये |

धन्यवाद

सुहागरात कैसे मनाएं (Suhagrat Kaise Manaye)

अधिकतर युवाओं में यह बहुत बड़ी उलझन रहती है कि सुहागरात कैसे मनाये. आज हम इसी विषय पर बात करेंगे.

पुरुष सुहागरात कैसे मनाये

पुरुष को चाहिए कि माहौल को सहज बनाने की कोशिश करें. इसलिए शुरुआत दोस्ती से की जाए तो बेहतर है. दोनों एक-दूसरे को बगैर स्पर्श किये, अपने विषय में कुछ रोमांटिक अंदाज में कहें. एक-दूसरे का स्वागत अपनी जिंदगी में करें. उनकी घबराहट को दूर करने में उनकी मदद करें.
शादी में क्या-क्या हुआ, इस पर चर्चा करें. उनकी की तारीफ़ करें. तारीफ़ के लिए कुछ शायरी याद कर लें तो और भी बेहतर है. दोस्ताना प्रतिक्रिया मिलने पर उनका हाथ पकड़ें. आप दोनों की जिंदगी की यह पहली सुहागरात है, इस रात को धीरे-धीरे आगे बढ़ने दें.
याद रखे ये पल जो इस वक्त गुजर रहे हैं, वो फिर कभी नहीं मिलेंगे, और इसका परभाव सारि उम्र रहनेवाला है. इसलिए सलीके से पेश आएं.

महत्वपुर्ण जानकारी
ऐसा जरूरी नहीं है कि इस खास रात में शारीरिक संबंध कायम किया जाए. यह तभी करें जब आपकी नयी-नवेली दुल्हन इसके लिए खुद तैयार हों, इसके लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती करना ठीक नहीं होगा. यह रात दो जिन्द्कियो के मिलन की रात है इसमें शारीरक मिलान आवश्यक नहीं है. आवश्यक यह है की आप अपने जीवन साथी से दोस्ती करें. उसके बाद दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में खुद ही बदल जायेगी. प्यार होने के बाद के मिलन का मज़ा ही अलग है.

लड़किया सुहागरात कैसे मनाएं

अगर आपकी शादी आपकी मर्जी से हुई है
आपकी शादी अगर आपकी मर्जी से हुई है तब तो आपको घबराहट नहीं होनी चाहिए. इस शादी के लिए आपकी सहमति थी तब तो आप खुश होंगे अगर अपनी पास्ट अभी तक शेयर नहीं कीं हैं तो अभी मत कीजिये. अपने रिश्ते को पहले समय दे समझें. अपने साथी को पहले अच्छी तरह जान लें. रिश्तों में गहराई आने के बाद ही कुछ कहें. फिलहाल इस रात को यादगार बनने दें. इस रात में आप भी सपोर्ट करें, ध्यान रखें कि सुहागरात में शब्दों से अधिक बॉडी लैंग्वेज बोलती हैं. आप भले ही अपने उनको पहले से जानती हों, फिर भी मन में एक झिझक होगी. जब आप उन्हें जानती थी तब एक लड़की थी, लेकिन अब आप एक दुल्हन हैं.

यदि आपकी शादी अरैंजड है
अगर आप एक-दूसरे से बिल्कुल अंजान हैं. शादी से पहले आप उनसे कभी नहीं मिली हैं तो मन में एक डर होगा. सबसे पहले तो इस डर को निकाल फेंकें. हमें पता है कि इस डर को निकालना आसान नहीं है. फिरभी आपको मन से स्ट्रांग बनना ही होगा. आप इस वक्त जिनके साथ में हैं वो कोई और नहीं आपके जीवन साथी हैं. इस सच को स्वीकार कर लें कि आपकी पूरी ज़िन्दगी अब उनके साथ ही गुजरने वाली हैं. उनकी ज़िन्दगी भी अब आपके नाम हो चुकी है. सुहागरात की इस विशेष रात में पास्ट की फिक्र बिल्कुल भी ना करें. हो सकता है शादी से पहले आपकी शारीरिक सम्बन्ध बन चुके हों. फिर भी घबराने की कोई जरूरत नहीं. अपने मन से इस डर को निकाल फेंकें कि आप पकड़ी जाएंगी. एक बात ध्यान रखें कि वर्जिनिटी की कोई पहचान नहीं होती.

 

सुहागरात में कमरा कैसे सजाये

नए जोड़े की जिंदगी की खास रात होती है सुहागरात. इस रात को यादगार और रंगीन बनाने के लिए कमरे की सजावट का खूबसूरत होना जरूरी है. आप दोनों की जिंदगी को रंगीन और खुशबूदार बनाने के लिए अपने कमरे में विशेष प्रकार के रंग और खुशबू का प्रयोग करें. फूलों से महकते हुए खूबसूरत कमरे में आपका मूड रोमांटिक हो जाएगा. फूलों से सजा कमरा नव दंपत्ति को एक-दूसरे के करीब लाने में मदद करेगा. इसलिए ताजे गुलाब, मोगरा, रातरानी, जूही आदि फूलों से सेज सजाएं. इस खास रात के लिए स्पंज या फोम वाला बिस्तर हो तो बेहतर है, इससे आप दोनों आनंदित महसूस करेंगे.

 

सुहागरात में सावधानी

सुहागरात में जल्दबाजी से बचे – आमतौर पर नवविवाहित जोड़े जल्दबाजी और उत्तेजना की वजह से उस सुख से वंचित रह जाते हैं.
सुहागरात में नशे से बचें – सुहागरात में सिर्फ सुहागरात का आनंद लें. नशा इंसान के मानसिक स्थिति का क्या हाल करता है आप जानते हैं. हो सकता है आपके साथी को नशा नापसंद हो. इस से आपकी सुहागरात खराब हो जायगी.
कंडोम का इस्तेमाल – कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें.
जबजस्ती न करे – अंतिम और महत्वपूर्ण सेल्हा आपकी लिए यही है की अगर महिला सम्भोग के लिए अभी त्यार नहीं है तो जबरजस्ती न करे.

हम आशा करते है इस जानकरी से आप अपनी सुहागरात यादगार बनायेंगे.
धनयवाद
Dr Ashok Gupta

लिंग का साइज कितना होना चाहिए – Ling ka size kitna hona chahiye

में डॉ अशोक गुप्ता आपका स्वागत करता हु हमारी वेबसाइट पर।  इस वेबसाइट के माध्यम से हम आप तक आपके स्वास्थय से सम्बंधित ज्ञान सांझा करते है।।

आज का चर्चा का विषय है “लिंग का साइज कितना होना चाहिए ” और ये बहुत ही भ्रमित है।  काफी लोगो ने इस भरम को ही अपना व्यवसाय बन लिया है । युवा लोग पोर्न फिल्मे देख कर वैसे ही लिंग की आशा करते है । और ऐसे ही लोगो के झांसे में आकर लिंग के आकर बढ़ाने के नाम पर हजरो रूप्य खर्च केर देते है।

लिंग कितना बड़ा होना चाहिए ?

जैसे मनुस्ये की लम्बाई उसके वातावरण और डीएनए पर निर्भर करती है जैसे वो किस देश में रहता है या किस जनजाति से है। जैसे चीन के लोगो की लम्बाई काम होती है। ठीक उसी परकार लिंग की लम्बाई भी आपके फॅमिली, खान पान, रहन सहन, देश और वातावरण पर निर्भर होता है। इस लिए किसी भ्रम में न आये।

 

सेक्स में सन्तुस्टि के लिए लिंग का कितना लम्बा होना आवश्यक है ?

यह सवाल ही गलत है क्यों की सेक्स में सन्तुस्टि लिंग के आकर पर निर्भर नहीं होती । सेक्स में सन्तुस्टि आपके प्यार और आपसी तालमेल पर निर्भर होती है । आप पोर्न देख के उत्साहित ना हो जैसे हर व्यक्ति की लम्बाई अलग अलग होती है उसी परकार लिंग का आकर भी अलग अलग होता है । इस सचिये को माने और ऐसे पार्टनर की तलाश करे जो आपको वैसे ही पसंद करे जैसे आप है इसे में सेक्स का असली आनंद छुपा हैं ।

लिंग का सामान्य साइज ?

लिंग का समान्य आकर 5 इंच माना जाता है। अगर आपका लिंग इस से छोटा है तो तो आप अपने फॅमिली डॉक्टर से सेल्हा ले और अपना हार्मोन चेक्लउप कराये अगर हार्मोन में कोई कमी नहीं है तो आपका लिंग का आकर नहीं बढ़ा सकते।

लिंग का आकर सामान्य से बहुत छोटा है ?

कुछ लोगो का लिंग हार्मोनल इम्बैलेंस के कारण 1 – 2 इंच ही रहजाता है। इस अवस्था में आप किसी अच्छे डॉक्टर से सलहा ले।

उम्मीद करता हो आप मेरी बात समझ पाए होंगे i धन्यवाद आपका बहुमूल्य समय देने के लिए ।

Namrdi ka ialj – नामर्दी का इलाज

जो व्यक्ति इस्त्री से सम्बन्ध नहीं बना पता उसे नामर्दी का मरीज कहते है अन्य शब्दो में जब व्यक्ति को कामउत्तेजना थोड़े समय के लिए ही होती हो या बिलकुल न होती हो इस अवस्था को ही नामर्दी कहते है I

नामर्दी के दो प्रकार होते है

1. मानसिक – कुछ लोग मानसिक रूप से नामर्द होते है शारीरिक रूप से नहीं I मानसिक रोगी स्त्री के पास जाने से डर जाता है या फिर अत्यधिक उत्तेजित हो जाता है । जिस से वह सम्भोग नहीं कर पाता और मानसिक नामर्दी के शिकार हो जाता है ।

2. शारीरिक – पोस्टिक आहार की कमी, अत्यधिक हस्तमैथुन, अन्य किसी बीमारी के साइड इफ़ेक्ट सवरूप या किसी दुर्घटना से कुछ व्यक्ति नामर्दी के शिकार हो जाते है ।

नामर्दी का इलाज

 

नामर्दी के लिए योग

1. कंडासना

नामर्दी को दूर करने के लिए कंडासना सबसे उपयुक्त आसान है । इसके निरन्तर अभ्यास से नामर्दी की समस्य जड़ से खत्म हो जाती है ।

विधि
1 – निचे बैठ जाये
2 – टांगो को मुड़ते हुए सीना के नजदीक लाये
3 – पेरो का आधार साइन की तरफ रखे
4 – कुछ छण इसी अवस्ता में रहे फिर सामान्य स्थिति में आ जाये

2. हलासन

इस आसान आसन से नामर्दी की समस्या को ठीक किया जाता है । इस में शरीर का आकार खेत में चलाए जाने वाले हल के समान हो जाता है। इसीलिए इस आसन को हलासन कहा जाता हैं।

विधि
1- शवासन की अवस्था में भूमि पर लेट जाएं। एड़ी-पंजे मिला लें। हाथों की हथेलियों को भूमि पर रखकर कोहनियों को कमर से सटाए रखें।
2- श्वास को सुविधानुसार बाहर निकाल दें। फिर दोनों पैरों को एक-दूसरे से सटाते हुए ऊपर उठाते जाएं। घुटना सीधा रखते हुए पैर पूरे ऊपर 90 डिग्री के कोण में उठाएं।
3-हथेलियों को भूमि पर दबाते हुए हथेलियों के सहारे नितंबों को उठाते हुए, पैरों को पीछे सिर की ओर झुकाते हुए पंजों को भूमि पर रख दें।
4-अब दोनों हाथों के पंजों की संधि कर सिर से लगाएं। फिर सिर को हथेलियों से थोड़-सा दबाएं, जिससे आपके पैर और पीछे की ओर खसक जाएंगे।

5-पुन: क्रमश: शवासन में लौट आएं अर्थात पहले हाथों की संधि खोलकर पुन: हथेलियों के बल पर 90 और फिर 60 डिग्री में पैरों को लाते हुए भूमि कर टिका दें।

 

नामर्दी के घरेलू इलाज

  • छुहारे – छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और उसी दूध को पीने से नपुंसकता खत्म होती है। रात को पानी में दो छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे को दूध के साथ खायें।
  • बादाम : बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और काली मिर्च कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द होता है। बादाम को गर्म पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज पीयें इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।

 

नामर्दी के आयुर्वेदिक इलाज

    1. अश्वगंधा : अश्वगंधा का चूरन, असगंधा और बिदारीकंड को 100-100 ग्राम मात्रा में बारीक़ पीसकर चूरन तैयार करें। रोज़ सुबह शाम दूध के साथ आधा चम्मच यह चूरन लेने से वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है और मर्दाना कमज़ोरी दूर होती है।
    2. जायफल : 15 ग्राम जायफल, 5 ग्राम अकरकरा, 20 ग्रामा हिंगुल भस्म और 10 ग्राम केसर मिलाकर पीस लें। अब इस मिश्रण में शहद मिलाकर घोट लें। फिर चने के दाने के बराबर गोलियाँ बना लें। रोज़ सोने से पहले 2 गोलियाँ दूध के साथ खाएँ। इस आयुर्वेदिक उपाय से शिशन का ढीलापन ख़त्म हो जाएगा और नामर्दी से छुटकारा मिलेगा।
दिए गए उपायों से लाभ न हो तो अपने फॅमिली डॉक्टर से सलहा ले या किसी अनुभवी सेक्सोलॉजिस्ट को दिखाए ।

डॉ अशोक गुप्ता

Hastmaithun (हस्तमैथुन की लत से ऐसे बचे )

hastmaithun

हस्तमैथुन एक ऐसी क्रिया को कहते है जब पुरुष या महिला बिना किसी पार्टनर के खुद के द्वारा ही अपनी यौन इच्छाओ को संतुष्ट करता है और अपने संवेदनशील अंग के साथ खेलकर वह स्खलन के माध्यम से आत्मसंतुष्टि पाता है

किसी भ्रम में न आये हफ्ते में एक बार हस्तमैथुन सामान्य है

हस्तमैथुन की लत

हफ्ते में 1 बार से अधिक हस्थमैथुन को हम हस्तमैथुन की लत कहते है I

हस्तमैथुन के बहुत से कारण हो सकते हैं और उसमें से कुछ संभावित कारण हैं:

    • अकेलापन
    • उच्च यौन ड्राइव
    • ऐसे साथियों के बीच रहना जो पोर्न देखते हैं
    • कम आत्मविश्वास
    • ड्रग्स लेना
    • बोर होना
    • यौन कल्पनाएं
    • रिश्ते की समस्याएं
    • व्यक्तिगत अपर्याप्तता

हस्तमैथुन की लत से नुकसान

  • शरीर का कमजोर हो जाना
  • आत्मविश्वास की कमी
  • खुद के प्रति ग्लानी होना
  • लिंग में सूजन का हो जाना
  • मानसिक तनाव का होना
  • पाचन तंत्र पर बुरा असर होना
  • लिंग में उत्तेजना का बंद हो जाना

हस्तमैथुन की लत छोड़ने के उपाए

  • पोर्न की लत छोड़ें
  • अकेले न रहे
  • अपने आप को वयसत रखें
  • सही भोजन करें
  • सही नींद लें
  • वातावरण में बदलाव करें
  • व्यायाम करें
  • अपने से वादा करें यही सबसे महत्वपूर्ण है

अगर बहुत प्रयत्न के बाद भी इस एडिक्शन को नहीं छोड़ पायें तो सेक्सोलॉजिस्ट से मिलें।

हम आशा करते है इस से आप को लाभ होगा धन्यवाद ।

डॉ अशोक गुप्ता

 

रोमांटिक पलों में पति को न करें नाराज


रात के दस बज रहे थे। रोमा और नवीन बेडरूम में बैठे-बैठे एक-दूसरे को देख रहे थे। छेड़छाड़ भी शुरू थी। माहौल ध्ीरे-ध्ीरे रंगीन होता जा रहा था। ऐसे में नवीन ने रोमा से एक गिलास पानी मांगा। रोमा ने मना कर दिया-‘तुम खुद उठकर पानी ले लो। इतना-सा भी अपना काम नहीं कर सकते?’
नवीन का चेहरा उतर गया। चुलबुली और हसीन लगने वाली रोमा खराब लगने लगी। छेड़छाड़ बंद हो गई। माहौल बदरंग और बोझिल हो गया। नवीन ने उठकर पानी पिया और चुपचाप सो गया।
सेक्स शब्दों का खेल है। बहुत कम ही दंपत्ति इस बात को जानते हैं। वे समझते हैं कि सामाजिक एवं कानूनी रूप से वे एक-दूसरे के पति-पत्नी हैं तो किन्हीं भी हालातों में सेक्स का आनंद ले सकते हैं, लेकिन उनका यह सोचना गलत है क्योंकि हालात अनुकूल और हसीन न होने पर दूरियां बढ़ जाती हैं, मन में खटास पसर जाती है और उत्तेजनाएं ठंडी पड़ जाती हैं। पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए सुलभ नहीं रह जाते हैं।
किसी भी चीज के लिए सापफ मना कर देना एक तरह का निगेटिव संदेश है। पति जब कोई चीज मांगता है और पत्नी दो टूक शब्दों में यह कह देती है कि तुम इतना भी नहीं कर सकते या मैं नहीं कर सकती, स्वयं उठकर कर लो तब पति को करंट-सा छू जाता है। वह अंदर ही अंदर गुस्से से सुलग उठता है और पत्नी के प्रति उसके मन में जो भी कोमल भाव होते हैं, वे मिट जाते हैं। उनके स्थान पर पत्नी के लिए नपफरत पैदा हो जाती है। यह नपफरत पति के मन से सेक्स को धे-पोंछकर सापफ कर देती है।
मना करना एक अवगुण है, बुराई है और व्यक्ति की सबसे खतरनाक हैबिट है। बहुतों को आदत होती है छोटी-छोटी सी बात पर भी ‘ना’ कहने की। वे तो स्वभाववश मना कर देते हैं और सामने वाला अगले पल ही डिस्टर्ब हो जाता है। उसका दिल टूट जाता है। रोमांस और प्यार के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। जहां रोमांस नहीं… प्यार नहीं, वहां भला सेक्स का क्या काम?
इतना तो आप समझ ही लीजिए-पति को बात-बात पर मना करने की आदत सेक्सुअल लाइपफ के लिए किसी भी दृष्टि से लाभप्रद नहीं है। रोमा और नवीन के बेडरूम का माहौल बिलकुल ही हसीन था। वे एक-दूसरे को छेड़ भी रहे थे और ध्ीरे-ध्ीरे तन एवं मन से एक-दूसरे के करीब आते भी जा रहे थे। जब नवीन ने अचानक एक गिलास पानी मांग लिया और रोमा ने झट से पानी लाने से मना कर दिया, तो बात बिगड़ गई। नवीन का चेहरा उतर गया। मन में गुस्सा भर गया। रोमा उच्छृंखल और मुंहपफट लगने लगी। रंगीन माहौल को बदरंग रोमा के चंद शब्दों ने बना दिया। जो नवीन उसके तन की खूशबू से मदहोश उसको अपनी बांहों में भरने के लिए लालायित था, वह नवीन अब उससे ईष्र्या करने लगा।
इतनी जल्दी इतना बड़ा परिवर्तन किसने किया…?रोमा के शब्दों ने ही तो किया। अपने पार्टनर को किसी भी बात के लिए जल्दी मना न करें और यदि मना करना जरूरी ही हो तो मौके की नजाकत को समझें। रोमा ने समय और स्थान का ध्यान नहीं रखा। रात का समय था। दोनों एक-दूसरे में डूबने के लिए मूड बना रहे थे। नवीन ने पानी मांगा और रोमा ने मना कर दिया। अगर रोमा ने बेडरूम के हसीन माहौल और मूड को देखते हुए पानी लाकर नवीन को दे दिया होता तो पिफर उनके बीच और नजदीकियां बढ़ गई होतीं। नवीन का मूड खराब नहीं हुआ होता।
कुछ शब्द जीवन से जोड़ दिए जाएं तो लाइपफ अपने आप ही रोमांटिक बन जाती है और कुछ शब्द ऐसे भी हैं जो जीवन से जुड़ जाएं तो लाइपफ नरक बन जाती है। जीवन को रोमांटिक और सेक्सी बनाने वाले शब्द हैं-‘जैसा तुम सोचते हो वैसा ही मैं भी सोचती हूं’ या ‘तुम होते हो तो सब कुछ अच्छा लगता है और नहीं होते हो तो जीवन नीरस सा हो जाता है।’
आपको शायद नहीं पता, शब्दों में उफर्जा का प्रवाह निरंतर होता रहता है। मन को सूट करने वाले शब्दों से पाॅजिटिव उफर्जा प्रवाहित होती है और वह पार्टनर के मूड को आशिकाना बनाती है। जो शब्द मन को नहीं भाते हैं, वे निगेटिव उफर्जा से भरे हुए होते हैं और पार्टनर का अच्छा-खासा मूड भी इनसे बिगड़ जाता है।
जब आपका पार्टनर आपसे किसी चीज की उम्मीद करता है और आप स्वभाववश बड़ी लापरवाही के साथ मना कर देती हैं तो वह निराशा से भर जाता है। वह सोचने लगता है, आप के साथ दिल लगाकर उसने गलती की है। आप तो हर पल दिल तोड़ने वाली बातें करना जानती हंै। पिफर वह मानसिक तौर पर आपसे कटने लगता है। आपकी बातों को नजरअंदाज करने लगता है। आप कितना भी उसे विश्वास दिलाती हैं, लेकिन वह आपके लिए सहज नहीं बन पाता है और जो पार्टनर अपनी पत्नी के प्रति सहज नहीं होता, वह सेक्स को भी कोई अंजाम नहीं दे पाता है। रोमा जीवन के प्रति सहज न रही तो उसने कहां सेक्स को अंजाम दिया। बेहतर सेक्स जीवन के लिए आंखों में अपने जीवनसाथी के प्रति शर्म का होना जरूरी है। पति ने कहा कि चलो आज नाश्ते में दलिया ही बना दो और पत्नी ने नाक चढ़ाते हुए कह दिया कि कौन इतना झंझट करेगा। आज तुम ब्रेड-मक्खन से ही नाश्ता कर लो। इस तरह का सुझाव देते हुए पति की इच्छा की अवहेलना करने वाली पत्नियों की कोई कमी नहीं है। पत्नी ने दलिया भी नहीं बनाया और उफपर से सुझाव भी दे दिया कि ब्रेड-मक्खन लाकर नाश्ता कर लो। यह ब्रेड-मक्खन पति की नहीं, पत्नी की पसंद है। अब ऐसे में क्या पति का मूड आॅपफ नहीं होगा?बात भी नहीं मानना और उफपर से अपनी पसंद भी थोप देना आपसी तालमेल को बिखेर कर रख देता है और जब आपसी तालमेल बिखर जाता है तब रोमांस भी नहीं रहता है और जब रोमांस नहीं होता है तब प्यार का सोता भी सूख जाता है और जब प्यार का सोता सूख जाता है तब सेक्स भी नहीं होता है।
‘हां’ कहना सीखिए, कोई चीज मांगने पर मना न कर लाकर देने की आदत डालिए। रोमांस, प्यार और सेक्स इन तीनों के ही संगम से जीवन सहज बना रहता है।

जब पति हो नेचुरल ब्यूटी का आशिक


इतनी गाढ़ी लिपस्टिक…! इससे क्या तुम्हारी खूबसूरती में चार चांद लग गए हैं?’ संदीप ने नाक-भौंह सिकोड़ते हुए कहा तो महिमा का चेहरा अचानक ही सपफेद पड़ गया। वह तो सज-संवरकर इतराती हुए उसके सामने आई थी कि वह उसकी खूबसूरती की प्रशंसा करेगा, लेकिन उसने तो उसके साज-शृंगार में कमी ही निकाल दी थी।
‘साज-शृंगार न करूं तब भी तो तुम चुप नहीं रहते। कोई-न-कोई कमेंट्स कर ही देते हो।’ महिमा यह कहते-कहते चुप हो गई।
‘मेरी बातों का बुरा मान गई?मैं तो तुम्हें यह बताना चाह रहा हूं कि इतना गाढ़ा और भड़कीला मेकअप तुम्हारी नेचुरल ब्यूटी को बिगाड़ सकता है और पिफर मैंने तो तुम्हें कभी तुम्हारी स्वाभाविक सुंदरता के साथ देखा ही नहीं। सुबह, दोपहर, शाम और रात में भी मेकअप की परतें तुम्हारे चेहरे पर चढ़ी रहती हैं।’ संदीप ने मुस्कराते हुए अपनी बात कही तो महिमा ने बुरा नहीं माना क्योंकि वह एक समझदार और कुशल व्यवहारों वाली महिला थी। वह बोली-‘तुम्हारा सुझाव मुझे अच्छा लगा। चलो इसी बहाने पता तो चला कि तुम्हें मेरी चिंता है और तुम मुझे चाहते भी हो। मेरी स्वाभाविक सुंदरता की पिफक्र भी तुम्हें है। मुझे यह अच्छी तरह से पता है, आदमी उसी को टोकता है, जिसे पसंद करता है। मैं आज से इतने भड़कीले मेकअप में नहीं रहूंगी और अपनी नेचुरल ब्यूटी की हिपफाजत तुम्हारे लिए जरूर करूंगी… मुझे नहीं पता था कि तुम स्वाभाविक सुंदरता के आशिक हो…’
संदीप के दिल में महिमा एक बार क्या उतरी दिन-प्रतिदिन उतरती ही चली गई। बदलाव जब अच्छे के लिए हों और मानसिक एवं शारीरिक दृष्टि से भी लाभप्रद हों तो पति-पत्नी को एक-दूसरे का सुझाव बुरा नहीं लगना चाहिए। महिमा जैसी सुलझी हुई महिलाएं आज बहुत कम हैं। पति की अच्छी सलाह को भी वे इसलिए मानने से इंकार कर देती हैं कि वह कोई सौंदर्य विशेषज्ञ तो नहीं है जो उसकी सलाह मानकर वे अपने साज-शृंगार में बदलाव लाएं। इसमें सौंदर्य विशेषज्ञ होने की क्या बात है। पत्नी के सजने-संवरने का मकसद पति की आंखों को अच्छा लगना होता है और जब पति को ही पत्नी अपने साज-शृंगार से रीझा नहीं पाती है तो पिफर उसका सजना-संवरना व्यर्थ ही तो माना जाएगा।
आप विचारों से परिपक्व और पढ़ी-लिखी महिला हैं। पति का कौन-सा सुुझाव आपके लिए पफायदेमंद है और कौन-सा सुझाव आपके लिए सही नहीं है, इतना तो आपको मालुम हो ही जाता है। जायज बातों को मानने से परहेज न करें और नाजायज बातों का विरोध् करने में कोई संकोच न करें। संदीप की शिकायत प्रासंगिक भी है और जायज भी है। भड़कीले और गाढ़े मेकअप के प्रयोग से वास्तविक सुंदरता दिखती नहीं है और समय के साथ-साथ वह नष्ट भी हो जाती है, पिफर आपका चेहरा मेकअप का मोहताज बन जाता है यानी बिना मेकअप के आप अच्छी नहीं लगती हैं। ऐसे में मेकअप करना आपकी मजबूरी बन जाता है। संदीप ने महिमा को इसी बात का बोध् कराया कि मेकअप पर निर्भर खूबसूरती किसी को ज्यादा देर तक लुभा नहीं पाती है। मेकअप उतरते ही उसका बेजान व भद्दा चेहरा सामने वाले के मन में उसके प्रति अरुचि-सी भर देता है। हम यहां यह भी नहीं कहना चाह रहे कि आप मेकअप करना बिलकुल ही छोड़ दें। मेकअप कीजिए, पर तब जब आप किसी खास अवसर के लिए सज-संवर रही हैं। कभी-कभार का मेकअप आपको एक नया लुक देता है और पति को आप अलग ही अंदाज और एक नई ही ब्यूटी में दिखती हैं, जो उसे आपके ही इर्द-गिर्द मंडराने के लिए मजबूर कर देता है। सिपर्फ पति ही पत्नी की ब्यूटी पर टीका-टिप्पणी नहीं करता है, पत्नी भी पति की पोशाक, शारीरिक बनावट और चेहरे के रख-रखाव पर कमेंट्स करती है।
रवीना ने आॅपिफस जाते वक्त पति को टोक दिया-‘कान तक कैसे बेतरतीब बाल पफैले पड़े हैं। पंद्रह दिन में नहीं तो महीने में एक बार तो कटिंग करवा लिया करो। दाढ़ी रोज बनाते हो लेकिन मूंछों का कोई ध्यान नहीं है। एकाध् जो सपफेद बाल हैं, उन्हें निकाल देते तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाता…’
रवीना के इस कमेंट्स पर विनय ने मुड़कर उसे देखा, पिफर कहा-‘नजर तो बड़ी दूर की रखती हो।’
‘लेकिन तुम तो नजर दूर की नहीं रखते… इतनी अच्छी पर्सनैलिटी का बेड़ा गर्क कर रखा है। मूंछों की देखभाल नहीं कर सकते हो तो उन्हें सापफ क्यों नहीं कर देते?’
‘यह तुम क्या कह रही हो, मूंछें मेरे चेहरे पर जंचती हैं…’ विनय ने कोई गुस्सा नहीं किया, बल्कि बैग रखकर पत्नी के सामने कुर्सी खींच कर बैठ गया।
‘लेकिन इस समय तो होंठों के नीचे तक पफैली तुम्हारी मूंछें बिलकुल ही नहीं जम रही हैं। अपनी उम्र मत देखो… सिपर्फ यह देखो कि तुम्हारी पर्सनैलिटी पर क्या खिलता है।’ रवीना की बातों में दम था। आज का दौर भी स्मार्ट और खूबसूरत दिखने का है और जिसकी पर्सनैलिटी आकर्षक नहीं होती है, उसमें कोई खिंचाव भी नहीं होता है और पिफर वह किसी भी क्षेत्रा में उन्नति नहीं कर पाता है।
इस राज को जो पत्नियां जानती हैं, उन्हें युग का बोध् होता है, लेटेस्ट पफैशन का ज्ञान होता है और इन सबसे बढ़कर जो चीज उनमें होती है-वह पति के प्रति समर्पण का भाव है। मेरा पति समाज में सबको अच्छा लगे। उसे अपनी पर्सनैलिटी को लेकर किसी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े, पत्नी इस सोच के कारण ही अपने पति को टोकती है। अब यदि कोई पति इस सुझाव को गलत मान बैठे और उलटा-सुलटा बोलने लगे तो पिफर पत्नी टोकना ही छोड़ देती है और जब पत्नी पति को कोई सुझाव देना बंद कर देती है तो पिफर उसकी उसमें कोई रुचि भी नहीं रह जाती है। तब मन में यह भाव आ जाता है कि जब किसी को स्वयं में सुधर लाना ही नहीं है तो मैं अपना व्यर्थ में मूड क्यों खराब करूं। ऐसी स्थिति दांपत्य जीवन में नहीं आनी चाहिए। इससे विवाह का सारा आनंद ही कहीं लुप्त हो जाता है और उसमें कोई आकर्षण भी नहीं रह जाता है।
रवीना ने विनय के बालों व मूंछों पर कमेंट्स किए तो उसने कोई भी बहस नहीं की। उसने गुस्सा करने की बजाए पत्नी को सराहा और इन मूलभूत कमियों को दूर किया। पति-पत्नी एक-दूजे के लिए ही बने हुए होते हैं। इस रिश्ते में चाटुकारिता उतनी अच्छी नहीं होती है, जितनी आलोचनाएं कारगर साबित होती हैं। जो आपको अच्छा नहीं लग रहा है और ऐसा महसूस हो रहा है कि आपके जीवनसाथी का इससे भविष्य में नुकसान हो सकता है तो बेहिचक कह दीजिए। हो सकता है कुछ मिनटों के लिए आपकी सलाह उसे अच्छी न लगे, लेकिन वह जब इत्मीनान से इस पर चिंतन-मनन करेगा तो पिफर ध्न्यवाद सहित आपकी सलाह वह मानने के लिए तैयार हो जाएगा।
यादि रखिए, अच्छा सदा अच्छा ही होता है। उस पर कोई आंच नहीं आती है। आपने अपने जीवनसाथी के भले के लिए कोई कमेंट्स किए हंै तो देर-सवेर वह उन्हंे अवश्य ही अपनाएगा।