वजन कम करें – (Weight Loss)


वज़न कम करना बहुत मुश्किल लक्ष्य लग सकता है लेकिन वास्तविकता में आप सीख सकते हैं कि बुद्धिमत्तापूर्ण रूप से भोजन और व्यायाम को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करके आप किस प्रकार दो महीनों में अपना वज़न 14 किलोग्राम तक कम कर सकते हैं | नौ सप्ताह की समयावधि में इतने वज़न को कम करने के लिए आपको एक योजना और समर्पण की आवश्यकता होगी लेकिन अगर आप एक बार अपने मन में ठान लें तो आपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं |

बेसल मेटाबोलिक रेट एक ऐसी गणना है जिसमे प्रारूपि रूप से एक दिन में आपके द्वारा जलाई गयी कैलोरी की गणना की जाती है | बेसल मेटाबोलिक रेट की गणना करें और आपके द्वारा खर्च की जाने वाली कैलोरी की अपेक्षा कम कैलोरी ग्रहण करें |

1 माह में कितना वजन कम किया जा सकता है ?

प्रशिक्षित डॉक्टर और डाइटिशियन मानते हैं कि प्रति माह 3 से 4 किलोग्राम वज़न कम करना स्वास्थ्य की दृष्टी से उचित है | इससे अधिक वजन कम करना निश्चित रूप से संभव है, हालाँकि ये बात अलग है कि यह स्वास्थ्य की दृष्टी से सही है या नहीं | जिसके हम आपको सेल्हा भी नहीं देंगे |

2. वज़न घटाने के लिए कितनी कैलोरी को जलाएं ?

एक किलो में 1700 कैलोरी होती है | इसका मतलब है कि आपको एक किलो वज़न कम करने के लिए दिन में ली जाने वाली कैलोरी की अपेक्षा 1700 से अधिक कैलोरी को जलाने की ज़रूरत है |

3. वज़न कम करने का सही तरीका क्या है ?

मनुष्य कई भिन्न-भिन्न तरीकों से वज़न कम कर सकते हैं | इनमे मांसपेशियों की हानि, वसा की हानि, और पानी की हानि शामिल है | दो महीनों के दौरान आपकी आशा के अनुरूप कम होने वाला वज़न पानी की हानि होने से होता है और यह ठीक है | अगर आप अपनी स्वस्थ जीवनशैली के साथ नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करते हैं तो आप अपने लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब हो सकेंगे

4. भोजन क्यों न छोड़ें ?

चूँकि एक सफल डाइटिंग की कुंजी है कि खर्च की जाने वाली कैलोरी से कम कैलोरी ग्रहण करें, इस तरीके में भोजन को छोड़ना शामिल नहीं किया गया है | भोजन छोड़ना भुखमरी प्रतिक्रिया का संभावित ट्रिगर है और अधिक लालच में आकर ठूस-ठूस कर खाना भी बंद करें |

5. क्या खाये ?

A. लीन प्रोटीन खाएं

उच्च प्रोटीन युक्त डाइट वज़न कम करने के लिए ज़रूरी होती है | अध्ययन दर्शाते हैं कि उच्च प्रोटीन डाइट के द्वारा कम कैलोरी खाने का पालन करने वाले प्रतियोगियों में अधिक संतोष देखा गया है और इस प्रकार की डाइट को शुरू करने से पहले की अपेक्षा वे अधिक संतुष्टि अनुभव करते हैं |

लीन मीट जैसे टर्की और चिकन ब्रैस्ट
मछली जैसे टूना
लीन डेरी जैसे स्किम मिल्क या कॉटेज चीज़ या कम वसा युक्त दही
सोया-प्रोडक्ट्स, जैसे टोफू
बीन्स और फलियाँ जैसे राजमा और दालें

B. साधारण कार्बोहायड्रेट के स्थान पर जटिल कार्बोहायड्रेट को प्राथमिकता दें

जटिल और साधारण कार्बोहायड्रेट में ज़मीन-आसमान का अंतर है | साधारण कार्बोहायड्रेट जैसे सफ़ेद ब्रेड, सोडा पॉप और कूकीज़ में एक साधारण केमिकल संरचना होती है जिसे हमारा शरीर अपेक्षाकृत जल्दी पचा लेता है; और अधिकतर इसकी अतिरिक्त मात्रा फैट या वसा के रूप में जमा हो जाती है |

जटिल कार्बोहायड्रेट जैसे

सफ़ेद ब्रेड के स्थान पर समग्र अनाज वाली ब्रेड चुनें
”सामान्य” पास्ता के स्थान पर समग्र अनाज वाला पास्ता चुनें
सफ़ेद चावल के स्थान पर ब्राउन राइस चुनें
स्टार्च से भरपूर आलू के स्थान पर सब्जियां जैसे ब्रोकॉली चुनें
शर्करा, सोडा और मिठाइयों के स्थान पर नट्स, बीन्स और फलियाँ चुनें

ये शरीर में लम्बे समय के बाद पचते हैं अर्थात् आपको लम्बे समय तक पेट के भरे होने की अनुभूति रहती है जिससे ये सम्भावना कम हो जाती है कि आपके द्वारा खाया जाने वाला कार्बोहायड्रेट फैट के रूप में जमा होगा |

C. स्वस्थ वसा चुनें:

सभी वसाओं (Fats) को नहीं छोड़ना चाहिए | व्यापक रूप से कहें तो, दो प्रकार के “स्वस्थ” फैट और दो प्रकार के “अस्वस्थ” फैट होते हैं | अपनी डाइट में कुछ स्वस्थ फैट का समावेश करने से वज़न कम करने पर भी आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है |

“Polyunsaturated” को मनुष्य के लिए स्वस्थ फैट माना गया है और इन्हें सुरक्षित रूप से डाइट में शामिल किया जा सकता है |
Polyunsaturated फैट के उदाहरण में शामिल हैं – एवोकाडो, नट्स, ऑलिव और कद्दू के बीज | पोलीअनसैचुरेटेड फैट के उदाहरण हैं- ओमेगा-3 फैटी एसिड्स जैसे Salmon मछली और सन के बीज |

”Saturated” और Trans fats से बचें: ये फैट न केवल कोलेस्ट्रॉल स्तर के लिए बुरे हैं जिनसे आपको कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (cardiovascular dieases) होने की सम्भावना बढ़ जाती है, बल्कि इनसे कोई वास्तविक पोषण का लाभ भी नहीं मिलता है | जब आप डाइटिंग कर रहे हों तब विशेषरूप से इनसे दूर रहना चाहिए | सभी फ़ास्ट फ़ूड Saturated फैट के मुख्य श्रोते है |

Note : जब वज़न कम करने की बात आती है तो शाकाहारी बनने से बहुत लाभ मिलते हैं, इससे आपको स्वस्थ भोजन करने में मदद मिलेगी |

6. डाइटिंग करनी चाहिए ?

डाइटिंग करनी चाहिए | पर कुछ लोग डाइटिंग बनी विचार किये बिना किसी विशेषज्ञ की सेल्हा के खुद ही शुरू क़र देते है जिसके परिणाम बहुत हानि कारक हो सकते है | आप ऐसा न करे |
हर व्यक्ति का वेट लोस्स के लिए डाइट उनके शरीर के अनुसरे दे जाती है | इस लिए सभी डाइटिंग चार्ट एक जैस अनहि हो सकता | इसलिए आप डाइट एक्सपर्ट से सेल्हा लेकर अपने लिए उपयुक्त डाइट चार्ट त्यार करे, तभी आप स्वस्थ रूप से वजन घटा सकते है |

निरंतरता बनाये रखें:

निरंतरता बनाये रखना बहुत जरुरी है | सब्सि बड़ी कठनाई वजन घटने के लिए निरंतरता बनये रखना हे | निरंतरता बनये रखने के लिए प्रेरित रहना जरुरी है | प्रेरित रहने के लिए एक साप्ताहिक या मासिक लक्ष्य निर्धारित करें, और है अपना शरुआती लक्ष्ये बड़ा न रखे, शुरु में छोटे – छोटे लक्ष्य बनाये और उन्हें पूरी मेहनती से प्राप्त करे इस से आप की निरंतरता बनी रहेगी |

आयुर्वेदा को अपनाये –

अगर आप सही डाइट, योग और व्यायाम के साथ आयुर्वेदा इलाज को जोड़े लेंगे तो आपको वजन कम करने में काफी आसानी होगी | क्योकि आयुर्वेद में काफी साडी ऐसी जड़ीबूटियां जो Saturated फैट को आसानी से कम कर सकती है | में अशोक क्लिनिक से डॉ अशोक गुप्ता सालो से इन्ही जड़ीबूटियों ये लोगो की वजन घटाने में मदत करता आये हु |

अगर आप भी वजन घटाने चाहते है तो उपरोक्त दी सेल्हा को अवस्य अपनये |

हमारा आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद | उम्मीद करता हु आपके जीवन में मेरी सलहा काम आये |

धन्यवाद

सुहागरात कैसे मनाएं (Suhagrat Kaise Manaye)

अधिकतर युवाओं में यह बहुत बड़ी उलझन रहती है कि सुहागरात कैसे मनाये. आज हम इसी विषय पर बात करेंगे.

पुरुष सुहागरात कैसे मनाये

पुरुष को चाहिए कि माहौल को सहज बनाने की कोशिश करें. इसलिए शुरुआत दोस्ती से की जाए तो बेहतर है. दोनों एक-दूसरे को बगैर स्पर्श किये, अपने विषय में कुछ रोमांटिक अंदाज में कहें. एक-दूसरे का स्वागत अपनी जिंदगी में करें. उनकी घबराहट को दूर करने में उनकी मदद करें.
शादी में क्या-क्या हुआ, इस पर चर्चा करें. उनकी की तारीफ़ करें. तारीफ़ के लिए कुछ शायरी याद कर लें तो और भी बेहतर है. दोस्ताना प्रतिक्रिया मिलने पर उनका हाथ पकड़ें. आप दोनों की जिंदगी की यह पहली सुहागरात है, इस रात को धीरे-धीरे आगे बढ़ने दें.
याद रखे ये पल जो इस वक्त गुजर रहे हैं, वो फिर कभी नहीं मिलेंगे, और इसका परभाव सारि उम्र रहनेवाला है. इसलिए सलीके से पेश आएं.

महत्वपुर्ण जानकारी
ऐसा जरूरी नहीं है कि इस खास रात में शारीरिक संबंध कायम किया जाए. यह तभी करें जब आपकी नयी-नवेली दुल्हन इसके लिए खुद तैयार हों, इसके लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती करना ठीक नहीं होगा. यह रात दो जिन्द्कियो के मिलन की रात है इसमें शारीरक मिलान आवश्यक नहीं है. आवश्यक यह है की आप अपने जीवन साथी से दोस्ती करें. उसके बाद दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में खुद ही बदल जायेगी. प्यार होने के बाद के मिलन का मज़ा ही अलग है.

लड़किया सुहागरात कैसे मनाएं

अगर आपकी शादी आपकी मर्जी से हुई है
आपकी शादी अगर आपकी मर्जी से हुई है तब तो आपको घबराहट नहीं होनी चाहिए. इस शादी के लिए आपकी सहमति थी तब तो आप खुश होंगे अगर अपनी पास्ट अभी तक शेयर नहीं कीं हैं तो अभी मत कीजिये. अपने रिश्ते को पहले समय दे समझें. अपने साथी को पहले अच्छी तरह जान लें. रिश्तों में गहराई आने के बाद ही कुछ कहें. फिलहाल इस रात को यादगार बनने दें. इस रात में आप भी सपोर्ट करें, ध्यान रखें कि सुहागरात में शब्दों से अधिक बॉडी लैंग्वेज बोलती हैं. आप भले ही अपने उनको पहले से जानती हों, फिर भी मन में एक झिझक होगी. जब आप उन्हें जानती थी तब एक लड़की थी, लेकिन अब आप एक दुल्हन हैं.

यदि आपकी शादी अरैंजड है
अगर आप एक-दूसरे से बिल्कुल अंजान हैं. शादी से पहले आप उनसे कभी नहीं मिली हैं तो मन में एक डर होगा. सबसे पहले तो इस डर को निकाल फेंकें. हमें पता है कि इस डर को निकालना आसान नहीं है. फिरभी आपको मन से स्ट्रांग बनना ही होगा. आप इस वक्त जिनके साथ में हैं वो कोई और नहीं आपके जीवन साथी हैं. इस सच को स्वीकार कर लें कि आपकी पूरी ज़िन्दगी अब उनके साथ ही गुजरने वाली हैं. उनकी ज़िन्दगी भी अब आपके नाम हो चुकी है. सुहागरात की इस विशेष रात में पास्ट की फिक्र बिल्कुल भी ना करें. हो सकता है शादी से पहले आपकी शारीरिक सम्बन्ध बन चुके हों. फिर भी घबराने की कोई जरूरत नहीं. अपने मन से इस डर को निकाल फेंकें कि आप पकड़ी जाएंगी. एक बात ध्यान रखें कि वर्जिनिटी की कोई पहचान नहीं होती.

 

सुहागरात में कमरा कैसे सजाये

नए जोड़े की जिंदगी की खास रात होती है सुहागरात. इस रात को यादगार और रंगीन बनाने के लिए कमरे की सजावट का खूबसूरत होना जरूरी है. आप दोनों की जिंदगी को रंगीन और खुशबूदार बनाने के लिए अपने कमरे में विशेष प्रकार के रंग और खुशबू का प्रयोग करें. फूलों से महकते हुए खूबसूरत कमरे में आपका मूड रोमांटिक हो जाएगा. फूलों से सजा कमरा नव दंपत्ति को एक-दूसरे के करीब लाने में मदद करेगा. इसलिए ताजे गुलाब, मोगरा, रातरानी, जूही आदि फूलों से सेज सजाएं. इस खास रात के लिए स्पंज या फोम वाला बिस्तर हो तो बेहतर है, इससे आप दोनों आनंदित महसूस करेंगे.

 

सुहागरात में सावधानी

सुहागरात में जल्दबाजी से बचे – आमतौर पर नवविवाहित जोड़े जल्दबाजी और उत्तेजना की वजह से उस सुख से वंचित रह जाते हैं.
सुहागरात में नशे से बचें – सुहागरात में सिर्फ सुहागरात का आनंद लें. नशा इंसान के मानसिक स्थिति का क्या हाल करता है आप जानते हैं. हो सकता है आपके साथी को नशा नापसंद हो. इस से आपकी सुहागरात खराब हो जायगी.
कंडोम का इस्तेमाल – कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें.
जबजस्ती न करे – अंतिम और महत्वपूर्ण सेल्हा आपकी लिए यही है की अगर महिला सम्भोग के लिए अभी त्यार नहीं है तो जबरजस्ती न करे.

हम आशा करते है इस जानकरी से आप अपनी सुहागरात यादगार बनायेंगे.
धनयवाद
Dr Ashok Gupta

रोमांटिक पलों में पति को न करें नाराज


रात के दस बज रहे थे। रोमा और नवीन बेडरूम में बैठे-बैठे एक-दूसरे को देख रहे थे। छेड़छाड़ भी शुरू थी। माहौल ध्ीरे-ध्ीरे रंगीन होता जा रहा था। ऐसे में नवीन ने रोमा से एक गिलास पानी मांगा। रोमा ने मना कर दिया-‘तुम खुद उठकर पानी ले लो। इतना-सा भी अपना काम नहीं कर सकते?’
नवीन का चेहरा उतर गया। चुलबुली और हसीन लगने वाली रोमा खराब लगने लगी। छेड़छाड़ बंद हो गई। माहौल बदरंग और बोझिल हो गया। नवीन ने उठकर पानी पिया और चुपचाप सो गया।
सेक्स शब्दों का खेल है। बहुत कम ही दंपत्ति इस बात को जानते हैं। वे समझते हैं कि सामाजिक एवं कानूनी रूप से वे एक-दूसरे के पति-पत्नी हैं तो किन्हीं भी हालातों में सेक्स का आनंद ले सकते हैं, लेकिन उनका यह सोचना गलत है क्योंकि हालात अनुकूल और हसीन न होने पर दूरियां बढ़ जाती हैं, मन में खटास पसर जाती है और उत्तेजनाएं ठंडी पड़ जाती हैं। पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए सुलभ नहीं रह जाते हैं।
किसी भी चीज के लिए सापफ मना कर देना एक तरह का निगेटिव संदेश है। पति जब कोई चीज मांगता है और पत्नी दो टूक शब्दों में यह कह देती है कि तुम इतना भी नहीं कर सकते या मैं नहीं कर सकती, स्वयं उठकर कर लो तब पति को करंट-सा छू जाता है। वह अंदर ही अंदर गुस्से से सुलग उठता है और पत्नी के प्रति उसके मन में जो भी कोमल भाव होते हैं, वे मिट जाते हैं। उनके स्थान पर पत्नी के लिए नपफरत पैदा हो जाती है। यह नपफरत पति के मन से सेक्स को धे-पोंछकर सापफ कर देती है।
मना करना एक अवगुण है, बुराई है और व्यक्ति की सबसे खतरनाक हैबिट है। बहुतों को आदत होती है छोटी-छोटी सी बात पर भी ‘ना’ कहने की। वे तो स्वभाववश मना कर देते हैं और सामने वाला अगले पल ही डिस्टर्ब हो जाता है। उसका दिल टूट जाता है। रोमांस और प्यार के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। जहां रोमांस नहीं… प्यार नहीं, वहां भला सेक्स का क्या काम?
इतना तो आप समझ ही लीजिए-पति को बात-बात पर मना करने की आदत सेक्सुअल लाइपफ के लिए किसी भी दृष्टि से लाभप्रद नहीं है। रोमा और नवीन के बेडरूम का माहौल बिलकुल ही हसीन था। वे एक-दूसरे को छेड़ भी रहे थे और ध्ीरे-ध्ीरे तन एवं मन से एक-दूसरे के करीब आते भी जा रहे थे। जब नवीन ने अचानक एक गिलास पानी मांग लिया और रोमा ने झट से पानी लाने से मना कर दिया, तो बात बिगड़ गई। नवीन का चेहरा उतर गया। मन में गुस्सा भर गया। रोमा उच्छृंखल और मुंहपफट लगने लगी। रंगीन माहौल को बदरंग रोमा के चंद शब्दों ने बना दिया। जो नवीन उसके तन की खूशबू से मदहोश उसको अपनी बांहों में भरने के लिए लालायित था, वह नवीन अब उससे ईष्र्या करने लगा।
इतनी जल्दी इतना बड़ा परिवर्तन किसने किया…?रोमा के शब्दों ने ही तो किया। अपने पार्टनर को किसी भी बात के लिए जल्दी मना न करें और यदि मना करना जरूरी ही हो तो मौके की नजाकत को समझें। रोमा ने समय और स्थान का ध्यान नहीं रखा। रात का समय था। दोनों एक-दूसरे में डूबने के लिए मूड बना रहे थे। नवीन ने पानी मांगा और रोमा ने मना कर दिया। अगर रोमा ने बेडरूम के हसीन माहौल और मूड को देखते हुए पानी लाकर नवीन को दे दिया होता तो पिफर उनके बीच और नजदीकियां बढ़ गई होतीं। नवीन का मूड खराब नहीं हुआ होता।
कुछ शब्द जीवन से जोड़ दिए जाएं तो लाइपफ अपने आप ही रोमांटिक बन जाती है और कुछ शब्द ऐसे भी हैं जो जीवन से जुड़ जाएं तो लाइपफ नरक बन जाती है। जीवन को रोमांटिक और सेक्सी बनाने वाले शब्द हैं-‘जैसा तुम सोचते हो वैसा ही मैं भी सोचती हूं’ या ‘तुम होते हो तो सब कुछ अच्छा लगता है और नहीं होते हो तो जीवन नीरस सा हो जाता है।’
आपको शायद नहीं पता, शब्दों में उफर्जा का प्रवाह निरंतर होता रहता है। मन को सूट करने वाले शब्दों से पाॅजिटिव उफर्जा प्रवाहित होती है और वह पार्टनर के मूड को आशिकाना बनाती है। जो शब्द मन को नहीं भाते हैं, वे निगेटिव उफर्जा से भरे हुए होते हैं और पार्टनर का अच्छा-खासा मूड भी इनसे बिगड़ जाता है।
जब आपका पार्टनर आपसे किसी चीज की उम्मीद करता है और आप स्वभाववश बड़ी लापरवाही के साथ मना कर देती हैं तो वह निराशा से भर जाता है। वह सोचने लगता है, आप के साथ दिल लगाकर उसने गलती की है। आप तो हर पल दिल तोड़ने वाली बातें करना जानती हंै। पिफर वह मानसिक तौर पर आपसे कटने लगता है। आपकी बातों को नजरअंदाज करने लगता है। आप कितना भी उसे विश्वास दिलाती हैं, लेकिन वह आपके लिए सहज नहीं बन पाता है और जो पार्टनर अपनी पत्नी के प्रति सहज नहीं होता, वह सेक्स को भी कोई अंजाम नहीं दे पाता है। रोमा जीवन के प्रति सहज न रही तो उसने कहां सेक्स को अंजाम दिया। बेहतर सेक्स जीवन के लिए आंखों में अपने जीवनसाथी के प्रति शर्म का होना जरूरी है। पति ने कहा कि चलो आज नाश्ते में दलिया ही बना दो और पत्नी ने नाक चढ़ाते हुए कह दिया कि कौन इतना झंझट करेगा। आज तुम ब्रेड-मक्खन से ही नाश्ता कर लो। इस तरह का सुझाव देते हुए पति की इच्छा की अवहेलना करने वाली पत्नियों की कोई कमी नहीं है। पत्नी ने दलिया भी नहीं बनाया और उफपर से सुझाव भी दे दिया कि ब्रेड-मक्खन लाकर नाश्ता कर लो। यह ब्रेड-मक्खन पति की नहीं, पत्नी की पसंद है। अब ऐसे में क्या पति का मूड आॅपफ नहीं होगा?बात भी नहीं मानना और उफपर से अपनी पसंद भी थोप देना आपसी तालमेल को बिखेर कर रख देता है और जब आपसी तालमेल बिखर जाता है तब रोमांस भी नहीं रहता है और जब रोमांस नहीं होता है तब प्यार का सोता भी सूख जाता है और जब प्यार का सोता सूख जाता है तब सेक्स भी नहीं होता है।
‘हां’ कहना सीखिए, कोई चीज मांगने पर मना न कर लाकर देने की आदत डालिए। रोमांस, प्यार और सेक्स इन तीनों के ही संगम से जीवन सहज बना रहता है।

जब पति हो नेचुरल ब्यूटी का आशिक


इतनी गाढ़ी लिपस्टिक…! इससे क्या तुम्हारी खूबसूरती में चार चांद लग गए हैं?’ संदीप ने नाक-भौंह सिकोड़ते हुए कहा तो महिमा का चेहरा अचानक ही सपफेद पड़ गया। वह तो सज-संवरकर इतराती हुए उसके सामने आई थी कि वह उसकी खूबसूरती की प्रशंसा करेगा, लेकिन उसने तो उसके साज-शृंगार में कमी ही निकाल दी थी।
‘साज-शृंगार न करूं तब भी तो तुम चुप नहीं रहते। कोई-न-कोई कमेंट्स कर ही देते हो।’ महिमा यह कहते-कहते चुप हो गई।
‘मेरी बातों का बुरा मान गई?मैं तो तुम्हें यह बताना चाह रहा हूं कि इतना गाढ़ा और भड़कीला मेकअप तुम्हारी नेचुरल ब्यूटी को बिगाड़ सकता है और पिफर मैंने तो तुम्हें कभी तुम्हारी स्वाभाविक सुंदरता के साथ देखा ही नहीं। सुबह, दोपहर, शाम और रात में भी मेकअप की परतें तुम्हारे चेहरे पर चढ़ी रहती हैं।’ संदीप ने मुस्कराते हुए अपनी बात कही तो महिमा ने बुरा नहीं माना क्योंकि वह एक समझदार और कुशल व्यवहारों वाली महिला थी। वह बोली-‘तुम्हारा सुझाव मुझे अच्छा लगा। चलो इसी बहाने पता तो चला कि तुम्हें मेरी चिंता है और तुम मुझे चाहते भी हो। मेरी स्वाभाविक सुंदरता की पिफक्र भी तुम्हें है। मुझे यह अच्छी तरह से पता है, आदमी उसी को टोकता है, जिसे पसंद करता है। मैं आज से इतने भड़कीले मेकअप में नहीं रहूंगी और अपनी नेचुरल ब्यूटी की हिपफाजत तुम्हारे लिए जरूर करूंगी… मुझे नहीं पता था कि तुम स्वाभाविक सुंदरता के आशिक हो…’
संदीप के दिल में महिमा एक बार क्या उतरी दिन-प्रतिदिन उतरती ही चली गई। बदलाव जब अच्छे के लिए हों और मानसिक एवं शारीरिक दृष्टि से भी लाभप्रद हों तो पति-पत्नी को एक-दूसरे का सुझाव बुरा नहीं लगना चाहिए। महिमा जैसी सुलझी हुई महिलाएं आज बहुत कम हैं। पति की अच्छी सलाह को भी वे इसलिए मानने से इंकार कर देती हैं कि वह कोई सौंदर्य विशेषज्ञ तो नहीं है जो उसकी सलाह मानकर वे अपने साज-शृंगार में बदलाव लाएं। इसमें सौंदर्य विशेषज्ञ होने की क्या बात है। पत्नी के सजने-संवरने का मकसद पति की आंखों को अच्छा लगना होता है और जब पति को ही पत्नी अपने साज-शृंगार से रीझा नहीं पाती है तो पिफर उसका सजना-संवरना व्यर्थ ही तो माना जाएगा।
आप विचारों से परिपक्व और पढ़ी-लिखी महिला हैं। पति का कौन-सा सुुझाव आपके लिए पफायदेमंद है और कौन-सा सुझाव आपके लिए सही नहीं है, इतना तो आपको मालुम हो ही जाता है। जायज बातों को मानने से परहेज न करें और नाजायज बातों का विरोध् करने में कोई संकोच न करें। संदीप की शिकायत प्रासंगिक भी है और जायज भी है। भड़कीले और गाढ़े मेकअप के प्रयोग से वास्तविक सुंदरता दिखती नहीं है और समय के साथ-साथ वह नष्ट भी हो जाती है, पिफर आपका चेहरा मेकअप का मोहताज बन जाता है यानी बिना मेकअप के आप अच्छी नहीं लगती हैं। ऐसे में मेकअप करना आपकी मजबूरी बन जाता है। संदीप ने महिमा को इसी बात का बोध् कराया कि मेकअप पर निर्भर खूबसूरती किसी को ज्यादा देर तक लुभा नहीं पाती है। मेकअप उतरते ही उसका बेजान व भद्दा चेहरा सामने वाले के मन में उसके प्रति अरुचि-सी भर देता है। हम यहां यह भी नहीं कहना चाह रहे कि आप मेकअप करना बिलकुल ही छोड़ दें। मेकअप कीजिए, पर तब जब आप किसी खास अवसर के लिए सज-संवर रही हैं। कभी-कभार का मेकअप आपको एक नया लुक देता है और पति को आप अलग ही अंदाज और एक नई ही ब्यूटी में दिखती हैं, जो उसे आपके ही इर्द-गिर्द मंडराने के लिए मजबूर कर देता है। सिपर्फ पति ही पत्नी की ब्यूटी पर टीका-टिप्पणी नहीं करता है, पत्नी भी पति की पोशाक, शारीरिक बनावट और चेहरे के रख-रखाव पर कमेंट्स करती है।
रवीना ने आॅपिफस जाते वक्त पति को टोक दिया-‘कान तक कैसे बेतरतीब बाल पफैले पड़े हैं। पंद्रह दिन में नहीं तो महीने में एक बार तो कटिंग करवा लिया करो। दाढ़ी रोज बनाते हो लेकिन मूंछों का कोई ध्यान नहीं है। एकाध् जो सपफेद बाल हैं, उन्हें निकाल देते तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाता…’
रवीना के इस कमेंट्स पर विनय ने मुड़कर उसे देखा, पिफर कहा-‘नजर तो बड़ी दूर की रखती हो।’
‘लेकिन तुम तो नजर दूर की नहीं रखते… इतनी अच्छी पर्सनैलिटी का बेड़ा गर्क कर रखा है। मूंछों की देखभाल नहीं कर सकते हो तो उन्हें सापफ क्यों नहीं कर देते?’
‘यह तुम क्या कह रही हो, मूंछें मेरे चेहरे पर जंचती हैं…’ विनय ने कोई गुस्सा नहीं किया, बल्कि बैग रखकर पत्नी के सामने कुर्सी खींच कर बैठ गया।
‘लेकिन इस समय तो होंठों के नीचे तक पफैली तुम्हारी मूंछें बिलकुल ही नहीं जम रही हैं। अपनी उम्र मत देखो… सिपर्फ यह देखो कि तुम्हारी पर्सनैलिटी पर क्या खिलता है।’ रवीना की बातों में दम था। आज का दौर भी स्मार्ट और खूबसूरत दिखने का है और जिसकी पर्सनैलिटी आकर्षक नहीं होती है, उसमें कोई खिंचाव भी नहीं होता है और पिफर वह किसी भी क्षेत्रा में उन्नति नहीं कर पाता है।
इस राज को जो पत्नियां जानती हैं, उन्हें युग का बोध् होता है, लेटेस्ट पफैशन का ज्ञान होता है और इन सबसे बढ़कर जो चीज उनमें होती है-वह पति के प्रति समर्पण का भाव है। मेरा पति समाज में सबको अच्छा लगे। उसे अपनी पर्सनैलिटी को लेकर किसी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े, पत्नी इस सोच के कारण ही अपने पति को टोकती है। अब यदि कोई पति इस सुझाव को गलत मान बैठे और उलटा-सुलटा बोलने लगे तो पिफर पत्नी टोकना ही छोड़ देती है और जब पत्नी पति को कोई सुझाव देना बंद कर देती है तो पिफर उसकी उसमें कोई रुचि भी नहीं रह जाती है। तब मन में यह भाव आ जाता है कि जब किसी को स्वयं में सुधर लाना ही नहीं है तो मैं अपना व्यर्थ में मूड क्यों खराब करूं। ऐसी स्थिति दांपत्य जीवन में नहीं आनी चाहिए। इससे विवाह का सारा आनंद ही कहीं लुप्त हो जाता है और उसमें कोई आकर्षण भी नहीं रह जाता है।
रवीना ने विनय के बालों व मूंछों पर कमेंट्स किए तो उसने कोई भी बहस नहीं की। उसने गुस्सा करने की बजाए पत्नी को सराहा और इन मूलभूत कमियों को दूर किया। पति-पत्नी एक-दूजे के लिए ही बने हुए होते हैं। इस रिश्ते में चाटुकारिता उतनी अच्छी नहीं होती है, जितनी आलोचनाएं कारगर साबित होती हैं। जो आपको अच्छा नहीं लग रहा है और ऐसा महसूस हो रहा है कि आपके जीवनसाथी का इससे भविष्य में नुकसान हो सकता है तो बेहिचक कह दीजिए। हो सकता है कुछ मिनटों के लिए आपकी सलाह उसे अच्छी न लगे, लेकिन वह जब इत्मीनान से इस पर चिंतन-मनन करेगा तो पिफर ध्न्यवाद सहित आपकी सलाह वह मानने के लिए तैयार हो जाएगा।
यादि रखिए, अच्छा सदा अच्छा ही होता है। उस पर कोई आंच नहीं आती है। आपने अपने जीवनसाथी के भले के लिए कोई कमेंट्स किए हंै तो देर-सवेर वह उन्हंे अवश्य ही अपनाएगा।

कितनी बदल सकती हैं आप पति को?

अमिता आज सुबह से ही राजन से नाराज थी। उसकी सारी जरूरतें पूरी कर रही थी, लेकिन राजन के प्रति उसके मन के किसी कोने में एक खीझ थी। राजन शाम को घर जैसे ही आया अमिता ने उसे पानी दिया और पिफर जाकर उसका बैग चेक करने लगी। सिगरेट की एक डिब्बी उसके हाथ लग गई। वह गुस्से से घूरती हुई बोल पड़ी-‘तुम जानना चाहते हो न कि मैं अचानक ही तुम पर नाराज क्यों हो जाती हूं?’
‘क्यों हो जाती हो, बताओ न?’ राजन ने भोलेपन से पूछा।
‘तुम सिगरेट पीना छोड़ दो। मैं तुम पर कभी भी नाराज नहीं होउफंगी। यह सिगरेट ही सारे पफसाद की जड़ है।’ अमिता एक सांस में ही बोल गई।
‘क्या-क्या मैं तुम्हें खुश रखने के लिए छोडन्ऩ्ं…?कल को कहोगी कि तुम टाइम से घर आना शुरू कर दो या पिफर मेरी बदतमीजियों को नजरअंदाज करना शुरू कर दो तो मैं नाराज नहीं होउफंगी।’ राजन के मन में जो आया बोल गया।
‘अब बातें मत बनाओ। तुम सिगरेट पीना छोड़ रहे हो या नहीं…?’
‘अच्छा बाबा, कोशिश करूंगा।’ कहकर राजन चुप हो गया।
सिगरेट अगले दिन से उसने छोड़ दी और गुटका पफांकने लगा। दो दिन तक तो अमिता कुछ नहीं बोली, तीसरे दिन उसने टोक ही दिया-‘एक गंदी लत छोड़ी तो दूसरी पकड़ ली?’ कहकर उसने बुरा-सा मुंह बना लिया।
राजन खीझ गया-‘तुम कभी मेरी खूबियों को भी तो देख लिया करो। मैं तुमसे कितना प्रेम करता हूं। तुम्हारा कितना ध्यान रखता हूं। तुम्हारे इशारे पर कैसे नाचता हूं। क्या इन सबका तुम्हें कभी अहसास नहीं हुआ?’
‘खराबियां खूबियों को ढक लेती हैं। पहले सिगरेट पीकर नाक में दम कर रखा था और अब गुटका खाकर परेशान कर रखा है।’ कहकर वह किचन में चली गई। राजन गुस्से से पफट पड़ा।
कल्पना लोक में जीने वाली पत्नी कभी भी पति से खुश नहीं रहती है। हर पत्नी की यह इच्छा होती है या सपना होता है कि उसका पति उसके सपनों के अनुकूल हो। उसमें ऐसी कोई भी लत न हो, जो उसे पसंद न हो। ऐसा संभव नहीं है क्योंकि व्यक्ति में खराबियां और खूबियां दोनों ही होती हैं और यह जरूरी नहीं कि पार्टनर उसके सपनों के इशारे पर ही नाचता पिफरे। खराबियों के साथ पति को स्वीकार करने में वहां दिक्कत होती हैं, जहां पत्नी के मन में निर्दोष और अवगुणहीन पति की कल्पना होती है। हम पहले ही बता चुके हैं कि कोई भी पति पत्नी के सपनों पर खरा नहीं उतर सकता है क्योंकि वह एक इंसान होता है, कोई भगवान नहीं होता है। लेकिन यहां दिक्कत यह है कि भारतीय पत्नी अपने पति को भगवान मानती है और भगवान जैसा ही अवगुणहीन उसे देखना पसंद करती है। जब उसका पति रुपी भगवान गुण और अवगुण का मिश्रण दिखता है तो उसे खीझ होती है। वह बार-बार उस पर बदलाव के लिए दबाव डालती है और जब पति उसके अनुसार नहीं, बल्कि अपनी सुविध के अनुसार स्वयं में बदलाव लाता है तो उसकी खीझ में और इजापफा ही होता है।
अमिता के साथ ऐसा ही तो हो रहा है। राजन को सिगरेट छोड़ने की हिदायत दी तो उसने गुटका खाना शुरू कर दिया। उसने स्वयं को बदला, लेकिन अपने हित-अहित को ध्यान में रखकर बदला। अमिता की परेशानी, नाराजगी और खीझ घटने की बजाए और बढ़ गई।
किसी को भी अपनी इच्छाओं के अनुसार बदला नहीं जा सकता है। अमिता ने  राजन को कहां बदला?मामला और भी टेढ़ा हो गया। अमिता राजन को बदलने की जिद छोड़ दे और उसकी खूबियों को महसूस करना शुरू कर दे तो जिंदगी हसीन हो सकती है और जीने का तरीका भी यही है। जीने के दो-चार दिन ही तो होते हैं और उन्हें गंदी लतांे को छुड़ाने में ही गुजार दिया जाए तो पिफर ऐसे वैवाहिक-जीवन का क्या लाभ?पति गंदी लतों को नहीं छोड़ता है तो इसके लिए जीवन में कड़वाहट को मत घोलिए। अपने गिरेबान में भी झांक कर देखिए कि क्या आप में खराबियां नहीं हैं या आप ऐसी लतों की शिकार नहीं हैं, जो पति को दिक्कतों में डाल रही हैं या डाल सकती हैं। जब आप इस तरह से स्वयं का निरीक्षण करना शुरू कर देंगी तब आपको अपने पति में खुद-ब-खुद ही खूबियां नजर आनेे लगंेगी। पिफर आप उसे अपने आप के अनुकूल बदलने की बजाए उससे प्यार करने लगेंगी।
आप को जो चीज बुरी लगती है, हो सकता है, वह आपके पति को अच्छी लगती हो। सिगरेट आपको पसंद इसलिए नहीं है क्योंकि आपको पता है कि यह सेहत पर बुरा प्रभाव डालती है। इसी तरह से आप और भी चीजों के बारे में जानती हैं, लेकिन आप क्या करेंगी। इस संसार में तो हर चीज में कुछ-न-कुछ स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक तत्व हैं। आप लिपस्टिक लगाती हैं। पफेस पाउडर लगाती हैं। मस्कारा लगाती हैं। बालों को रंगती हंै। तरह-तरह के स्प्रे और परफ्रयूम का इस्तेमाल करती हैं क्या ये सब चीजें आपके स्वास्थ्य के लिए पफायदेमंद हैं?जीवन को इतनी बारीकियों से देखने वाले खुशियों के पलों से सदा ही महरूम रहते हैं। उन्हें जीवन का आनंद कभी नहीं मिल पाता है। उनकी जिंदगी डरी-डरी सी और थकी-थकी सी बनी रहती है। अब अमिता की जिंदगी क्या है। इतना प्यार करने वाला पति उसे मिला हुआ है, लेकिन वह उसे कभी सिगरेट पीने को लेकर तो कभी गुटका खाने को लेकर जली-कटी सुनाती ही रहती है। वह अमिता से तालमेल बिठाने की कोशिश में एक चीज छोड़कर दूसरी अपनाता है, पिफर भी गड़बड़ हो जाती है। ऐसे में वह दिशाहीन हो गया है। अब उसे अच्छे-बुरे का ज्ञान भी नहीं रह गया है। जब किसी पर जरूरत से ज्यादा बंदिशें लाद दी जाती हैं तब वह अच्छे-बुरे में अंतर करना भूल जाता है और उफब कर उसे कहना ही पड़ जाता है कि मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा। रहना है तो मेरे साथ रहो वर्ना मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो। ऐसी नौबत आप तो कम से कम न आने दें। अपने पार्टनर को खूबियों एवं खराबियों दोनों के साथ ही स्वीकार करें। जहां खूबियां होती हैं वहां खराबियां भी होती हैं, इन्हें जीवन से बिलकुल ही निकाला नहीं जा सकता है। क्या चीज अच्छी है और क्या चीज
जीवन के लिए बुरी है, इसमें भेद आप करने लगीं, तो पिफर दांपत्य
जीवन का सुख सूख सकता है। मीनमेख निकालने में समय बर्बाद न करें। यह जीवन जो मिला हुआ है, उसकी कोई गारंटी नहीं है कि कब कहां जाकर ठहर जाए।

ठिन है।

आप कितनी कुशल पत्नी हैं?

 

मटर-पनीर की सब्जी क्या ऐसे ही बनती है?’ अशोक ने नाक चढ़ाते हुए कहा। प्रतिमा उसके पास बैठती हुई बोली-‘आज अचानक मेरे हाथ की सब्जी तुम्हें खराब क्यों लगने लगी?’
‘एक दोस्त आज आॅपिफस में मटर-पनीर की सब्जी लेकर आया था। उसका स्वाद गजब का था। तुम स्वयं को हर मामले में बदलो।’
यह कहकर अशोक चुप लगा गया। प्रतिमा को पति की बातें पहले बुरी तो लगीं, लेकिन जब ठंडे दिमाग से सोचा तो उसे भी लगा कि समय के साथ-साथ बदलना जरूरी है। इससे जीवन में एकरसता नहीं आ पाती।
यहां सिपर्फ मटर-पनीर की सब्जी की बात नहीं है। समय हर चीज के स्वाद और रूप में नयापन ला देता है। कल की उपयोगी और अच्छी चीजें बढ़ते समय के साथ अनुपयोगी हो जाती हैं और उनमें नयापन लाने से वे चीजें आज के परिवेश के अनुकूल पिफर से तैयार हो जाती हैं।
परिवेश और समय को जो पत्नी पकड़ना जानती है या बदलाव में रुचि लेती है या पुरानी चीजों को छोड़कर नई चीजों को अपनाने की आदी होती है, उसका पति उसे भरपूर महत्व देता है। कोई भी कार्य करने से पहले उससे सलाह लेता है और उसकी सलाह को प्राथमिकता देता है, क्योंकि पति की नजर में ऐसी पत्नी बु(िमान और चतुर होती है।
पति पर आप हावी होना चाहती हैं तो उसको यह यकीन दिलाना बहुत जरूरी है कि बाहर-भीतर जो कुछ भी बदल रहा है, उसका ज्ञान आपको है। आपमें अगर यह विशेषता नहीं है, तो आपका पति की नजरों में एक पत्नी का दर्जा तो बना ही रहेगा, लेकिन आप कभी भी उसकी एक अच्छी सलाहकार एवं मित्रा नहीं बन सकती हैं।
पति की दोस्त बनिए… हमसपफर बनिए जैसे शब्द सुनने को मिल तो जाते हैं, लेकिन क्या आप इनका भावार्थ भी जानते हैं? शायद नहीं जानते हैं, इसीलिए दुनिया के अध्किांश पति-पत्नी एक-दूसरे के सलाहकार या मित्रा नहीं बन पाते हैं। मैत्राीभाव का दांपत्य जीवन में उत्पन्न होना बहुत आवश्यक है। जहां मैत्राी भाव जैसी बात होती है, वहां पत्नी किसी विषय को लेकर पति को टोकती है या पति पत्नी के किसी कार्य की आलोचना करता है तो बात बिगड़ती नहीं है, क्योंकि मित्राता से मन में एक दूसरे को बर्दाश्त करने का जज्बा पैदा होता है।
प्रतिमा के हाथ की बनी सब्जी में नुक्स पति ने निकाला तो प्रतिमा को बुरा तो लगा कि इतने सालों से मेरे हाथ की बनी सब्जी पति खाता आ रहा है और आज दोस्त की बीवी के हाथ की सब्जी क्या खा ली, मेरी सब्जी को बकवास और खराब कह डाला। लेकिन अगले ही पल प्रतिमा ने यह कबूल कर लिया कि अशोक ने वही कहा है, जो सच है। ऐसा प्रतिमा ने दांपत्य जीवन में मैत्राी भाव के कारण ही सोचा। अगर उनमें बढ़िया वैचारिक तालमेल नहीं होता, तो शायद ही प्रतिमा अशोक के कहने का मतलब इतने अच्छे ढंग से समझ पाती।
आलोचना, शिकायत या उपदेश जो कुछ भी कह लें वहीं कारगर साबित होते हैं, जहां पति-पत्नी में वैचारिक तौर पर मित्राता होती है।
मित्राता नहीं तो बर्दाश्त करने की भावना भी नहीं। कौन ऐसे कोई किसी को बर्दाश्त करता है और आज के परिवेश में तो बिलकुल ही नहीं।
सरिता बेडरूम से बाहर आई तो ड्राइंगरूम में बैठा आदेश अचानक ही चहक पड़ा-‘अरे! कोई दूसरी ड्रेस पहनी होती।’
‘अपनी पसंद अपने पास ही रखो। सलाह देने का इतना शौक है, तो जाकर किसी और को दो…’ सरिता ने शुष्क लहजे में इन शब्दों को कहा।
आदेश चिढ़ गया। ईष्र्या और नपफरत सी उसके मन में उत्पन्न हो गई। पत्नी ने पति केे कमेंट्स को समझा नहीं, उफपर से खरी-खोटी भी सुना दी। पति-पत्नी के बीच जब भी एक-दूसरे को सुनने या सहने की प्रवृत्ति न हो तो समझिए वे सिपर्फ पति-पत्नी हैं, हमसपफर या मित्रा नहीं। आज कितने पति-पत्नी हमसपफर या मित्रा हैं।
टोकना भी दो तरह का होता है-एक तो वह, जो साथी को कुशल और एजुकेट करने के लिए टोका जाता है और दसूरा वह जो नीचा दिखाने के लिए प्वाइंट आउट किया जाता है। पति अगर पत्नी को आज के परिवेश के लिहाज से समझाता है और नई एवं बदली हुई चीजों का ज्ञान समय-समय पर उसे कराता रहता है तो पत्नी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि पति अपने साथ पत्नी को भी समय के साथ आगे बढ़ते हुए देखना पसंद करता है। ओल्ड, बासी, ठंडी, रुढ़िवादी आदि शब्द उन पत्नियों के लिए प्रयोग किए जाते हैं, जो नयेपन को पकड़ने में अपनी बेइज्जती समझती हैं और पति की ऐसी किसी भी सीख को नजरअंदाज कर देती हैं। पति का झगड़ा भी ऐसी पत्नी से ही होता है। नयेपन, आकर्षण, बदलाव और खूबसूरती को नकारना तथा अपनी जिद पर अड़े रहना या रुढ़िगत परंपराओं की दुहाई देकर पति की किसी भी तरह की बात को न मानना परस्पर मित्राता नहीं, दुश्मनी पैदा करता है। आज उन पति-पत्नियों के बीच खासकर मैत्राीभाव नहीं हैं, जो हमेशा निगेटिव ही बोलते हैं। यह काम तुम्हारे वश का नहीं है, अगर कहा नहीं मानोगे तो मुंह के बल गिरोगे, तुम्हारे वश का नहीं है अच्छा और स्वादिष्ट खाना बनाना आदि वाक्य पति-पत्नी दोनों के ही मन में खीझ पैदा करते हैं
और ऐसी सोच तभी पैदा होती है या एक-दूसरे के प्रति ऐसे
नकारात्मक शब्द तभी निकलते हैं जब मन में दूरियां हों, बदले की भावना हो, जलन और ईष्र्या हो। इस तरह की सोच आज के आधुनिक परिवेश की देन है, जहां पति-पत्नी सुशिक्षित होकर भी तलाक की मार झेल रहे हैं, अलगाव का विषपान कर रहे हैं और साथ रहकर भी साथ न होने की पीड़ा को झेल रहे हैं। मित्रा बनिए, दांपत्य जीवन को सुखमय संभावनाओं से भर दीजिए।

सेक्स जीवन का क्या है सच?


मैं ठीक नहीं हूं। पहले मैं कितनी सुंदर     थी। चेहरा बिलकुल चिकना और सापफ-सुथरा था। मैं तुम्हें अब अच्छी नहीं लगती हूं न?’ दीपा ने अपने पति हरीश से पूछा तो पहले तो वह हंसा, पिफर वह भी दीपा की आंखों से ही उसे देखने लगा-‘हां, तुम पहले की तरह खूबसूरत नहीं हो।’ कहकर हरीश चुपचाप सो गया। दीपा ने एक-दो बार उसे छेड़ा तो वह भारी मन से बोला-‘न जाने  क्यों आजकल तुम्हारे होने न होने का मुझ पर कोई असर ही नहीं होता है। तुम्हारी ब्यूटी की तरह ही मेरी यौनोत्तेजनाएं भी ध्ूमिल पड़ गई हैं…’ हरीश ने यह कहकर दीपा के मन में और भी अध्कि हीनभावना भर दी।
पति या पत्नी में से जब कोई एक अपने आप के बारे में निगेटिव सोच बना लेता है तब दूसरा भी उसी रंग में रंग जाता है। वह यह
स्वीकार कर लेता है कि उसका पार्टनर पहले जैसा नहीं है। यह सोच सेक्स जीवन को प्रभावित करती है। मन में यौनेच्छा बनती ही नहीं है। प्रौढ़ावस्था में वैसे भी जोश ठंडा पड़ जाता है और इच्छाएं होते हुए भी व्यक्ति कुछ कर नहीं पाता है और जब ऐसे में पत्नी अपने पति के सामने अपने रूप-सौंदर्य में कमियां निकालने लग जाती है तब पति उसकी ही आंखों से उसे देखने लगता है। इसमें पति का कोई कसूर नहीं होता है। ऐसे में उसे पत्नी से अरुचि सी हो जाती है।
मन में अपने रूप-सौंदर्य के बारे में जो भी सोचना है आप बेशक सोचें, पर पति के आगे इसकी चर्चा न करें। इससे उसमें स्वाभाविक रूप से ठंडापन आ जाता है। पिफर आप का सजना-संवरना या उससे प्यार करना कोई भी जादू नहीं चला पाता है। इस सच को तो आप सभी जानते हैं कि जो खूशबू, जो मादकता, जो रूप-सौंदर्य, जो शारीरिक सुडौलता युवा अवस्था में होती है, वह दो-तीन बच्चों की मां बनने या उम्र ढल जाने के बाद कायम नहीं रह पाती है। यह बदलाव सिपर्फ पत्नी में ही नहीं होता है, पति में भी इस तरह का बदलाव आ जाता है। बढ़ती उम्र, हारी-बीमारी, तनाव और नाना प्रकार की समस्याएं स्वास्थ्य तथा सौंदर्य दोनों पर ही अपना गहरा प्रभाव छोड़ जाती हैं। आप लाख जतन करने के बाद भी स्वयं को वैसा बनाए नहीं रख पाते हैं जैसा आप शादी के शुरुआती दिनों में थे। ये बदलाव मन ही मन स्वीकार करने के लिए होते हैं, सबको बताने के लिए नहीं। जब आप खुद अपनी कमियों का जिक्र पति के सामने करेंगी तो यह स्वाभाविक है कि वह भी आपको उसी नजर से देखना शुरू कर देगा। आपको शायद यह नहीं पता, सेक्स का संबंध् मन और आंखों से शरीर की अपेक्षा अध्कि होता है। जब पति की आंखें पत्नी को बदसूरत मान बैठती हैं, तब मन भी पत्नी को सेक्स के लिए उपयुक्त नहीं स्वीकार कर पाता है।
दीपा हरीश के लिए कल तक तो बिलकुल ही परपफेक्ट थी। उसमें कोई कमी ही नहीं थी। अपनी कमियों को जब दीपा ने खुद बताया तब कहीं जाकर हरीश को दीपा में कमियां नजर आईं। पिफर उसे उससे अरुचि हो गई। वह उससे एक दूरी बनाकर उसके साथ रहने लगा। इस दूरी ने हरीश को यौन-ठंडेपन का शिकार बना दिया। आज की यह एक सबसे बड़ी समस्या है। इच्छा है पर जोश नहीं है। जोश क्यों नहीं है?इसका कारण दीपा और हरीश की बातचीत से सापफ जाहिर हो जाता है।
अध्किांश पत्नियां अपने पतियों को दीपा की तरह ही सोच मन में पालकर यौन-ठंडेपन का शिकार बना देती हैं और उफपर से यह रोना भी रोती हैं कि पति उन पर ध्यान नहीं देते या उनमें कोई रुचि नहीं लेते।
अपने शरीर को लेकर जो भी नकारात्मक विचार हैं उनको परे करें। उनको अपने बेडरूम में या सेक्स जीवन में कोई जगह न दें। यह तो स्वाभाविक बदलाव है, इसे आप क्या कोई भी रोक नहीं सकता है। इसे स्वीकार कर खुद को भरसक इतना बुलंद करें कि पति को यह अहसास ही न हो कि आप पहले वाली सुघड़ एवं चंचल युवा स्त्राी नहीं हैं।
बढ़ती उम्र आप के शरीर को प्रभावित कर सकती है, पर मन को भी प्रभावित करे यह संभव नहीं है क्योंकि मन की चपलता और चंचलता को बढ़ती उम्र छू तक भी नहीं पाती है। यह तो आप हैं कि मन को उसकी गिरफ्रत में लाती हैं। मन और सोच को बढ़ती उम्र के गिरफ्रत में न आने दें। मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। दीपा मन से हार गई है। उसने यह कबूल कर लिया है कि वह पहले जैसी खूबसूरत और जवान नहीं है। यह सोच तो युवा व्यक्ति को भी बुढ़ापे में ला सकती है। कहने का तात्पर्य है कि आप अपने विचार को नकारात्मक न होने दें। हमेशा सकारात्मक सोचें और कोई गलती से भी यह कह दे कि आप पहले जैसी अब नहीं लगती हैं तो इसे स्वीकार न कर उसे यह समझाने का प्रयास करें कि मुझे तो पफर्क नजर नहीं आ रहा है। मैं तो पहले से कहीं बेटर पफील करती हूं।
और यह सच भी है। उम्र के साथ-साथ व्यक्ति के अनुभव में
जो इजापफा होता है, उससे उसकी लाइपफ और आसान व हसीन हो
जाती है। जो कार्य पहले वह ताकत के बल पर करता आ रहा था,
उसे अब वह अनुभव के बल पर और भी बेहतर ढंग से करने की कोशिश करता है।

दम भी नहीं फुर्सत भी नहीं पत्नी कैसे रहेगी खुश

tired men

आज अध्किांश स्त्राी-पुरुष दिन भर काम को लेकर व्यस्त रहते हैं पर उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं होता है। घर में अचानक आयी बीमारी, किसी पर्व-त्योहार या बच्चों के भविष्य पर खर्च करने के लिए आपके पास पैसे न हों तो आप चिंतन-मनन कीजिए। ऐसे मौकों पर भी जब आपके हाथ में जीरो है तो पिफर आपसे आपके बीवी-बच्चे कैसे जुड़े रह सकते हैं?
चल रहे हो मंदिर?’ स्मिता ने बेडरूम में आते हुए पूछा।
नीतेन ने उसकी बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। स्मिता ने पिफर टोका, ‘चलो बच्चे भी जिद कर रहे हैं।’
‘तुम्हीं चली जाओ न उनको लेकर… देख नहीं रही हो कितना काम है।’ नीतेन ने काम की मजबूरी सामने रखी तो स्मिता बिदक गई, ‘काम तो बस एक तुम्हीं करते हो और मर्द तो करते ही नहीं हैं।’ यह कहकर स्मिता किचन में चली गई।
नीतेन भी किचन में आ गया और उसे समझाने लगा, ‘मंदिर ही जाना है न, बच्चों को लेकर घूम आओ।’
‘जाने दो, मैं भी नहीं जा रही। तुम्हें तो जीवन भर काम से पुफर्सत ही नहीं मिलनी है, तो क्या हम कहीं घूमने-पिफरने नहीं जाएंगे?’
‘मंदिर जाने पर मेरा सारा दिन खराब हो जाएगा। वहां लम्बी लाइन लगती है।’ नीतेन ने शुष्क लहजे में कहा तो स्मिता चीख पड़ी, ‘दिन-रात तुम काम-काम करते रहते हो… कुछ ऐसा किया भी है?जब भी पैसा मांगो जेब झाड़ देते हो। देखो, तुम मेरी बात मानो या न मानो लेकिन यह सच है कि तुम इस तरह से स्वयं को मेहनत की भट्ठी में झोंक कर हमारी  तो क्या, अपनी जरूरतें भी पूरी नहीं कर सकोगे?’
नीतेन का चेहरा उतर गया। माथे पर पसीने की बूंदें उग आयीं। कड़वा सच व्यक्ति का ऐसा ही हाल कर देता है। नीतेन पत्नी के करीब आकर बोला, ‘गुस्से में ही सही, पर तुमने आज काम की बात की है। लेकिन मैं ऐसा करूं क्या कि नोटों की बारिश हो…?’
‘अपनी मेहनत को सही दिशा में लगाओ। अपने काम की कीमत को समझो। आगे बढ़ना है तो रिस्क लेना सीखो। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिनके पास टाइम भी होता है और पैसा भी होता है। तुम्हारे पास तो टाइम भी नहीं है और पैसा भी नहीं है। बच्चे छोटे हैं नहीं तो मैं भी कुछ करने के बारे में सोचती…’ कहकर स्मिता चुप हो गई।
नीतेन अगले पल ही मुस्करा पड़ा, ‘बच्चे तैयार हैं तो चलो अभी निकल चलते हैं मंदिर… काम तो होता रहेगा… समस्याएं पीछे लगी रहेंगी… पुफर्सत तो मरते दम तक नहीं मिलने वाली… लेकिन बच्चे तो हमेशा छोटे नहीं रहेंगे… तुम तो जवां नहीं रहोगी। मैं पैसे कमाने के लिए आज से देह का नहीं बल्कि दिमाग का इस्तेमाल करूंगा…’
नीतेन मंदिर जाने के लिए तैयार हो गया। स्मिता उसे अच्छी लगने लगी। काम का तनाव नीतेन के दिमाग से छंट गया।
टाइम और काम को लेकर अध्किांश पति अपनी पत्नी को
नाराज कर देते हैं। आज उन्हीं के टाइम और काम को सुना या बर्दाश्त किया जाता है जो मोटी रकम कमाते हैं। ऐसे पतियों की बातें पत्नियां
नहीं सुनतीं, जो दिन-रात मेहनत तो करते हैं पर उसके हिसाब से
कमाते नहीं हैं।
यह कुछ हद तक सही भी है। पति दिनभर आॅपिफस में हाड़तोड़ मेहनत कर घर आया और आते ही पुनः काम करने बैठ गया। पत्नी ने पैसे मांगे या बच्चों ने कोई चीज खरीदने की जिद की और पति ने पैसे और पुफर्सत न होने का रोना रोकर उन्हें झिड़क दिया तो ऐसे में पति की खैर नहीं है। उसे न तो पत्नी बर्दाश्त करेगी और न ही बच्चे ही ज्यादा देर तक बर्दाश्त करेंगे। स्मिता ने मंदिर चलने की बात की तो नीतेन ने पैसे और पुफर्सत न होने का बहाना कर टरकाना चाहा। स्मिता का मूड खराब हो गया। उसने नीतेन को यह जतला दिया कि चैबीस घंटे तुम काम करते हो लेकिन बदले में पाते क्या हो? न तो तुम्हारे पास हमारी जरूरतों के लिए पैसे होते हैं और न टाइम ही होता है। तुम स्वयं न तो टाइम से भोजन करते हो और न सोते-जागते ही हो। गुस्से में कही गई पत्नी की बातें नीतेन को शुरू-शुरू में बुरी तो लगीं, पर अगले पल ही वह यह सोचने पर मजबूर हो गया कि बात तो स्मिता ठीक ही कह रही है। मेहनत और काम के हिसाब से जब आमदनी न हो तो आदमी को थकान व तनाव ही मिलता है और पत्नी एवं बच्चों की जरूरतें तथा शौक पूरे न होने पर उनकी नाराजगी और झिड़कियां अलग से सहनी पड़ती हैं।
यह सच है, उस काम को करके आदमी कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता, जिसका मूल्यांकन वह नहीं कर पाता है। आज अध्किांश स्त्राी-पुरुष दिन भर काम को लेकर व्यस्त रहते हैं पर उनके पास पर्याप्त पैसा नहीं होता है। घर में अचानक आयी बीमारी, किसी पर्व-त्योहार या बच्चों के भविष्य पर खर्च करने के लिए आपके पास पैसे न हों तो आप चिंतन-मनन कीजिए। ऐसे मौकों पर भी जब आपके हाथ में जीरो है तो पिफर आपसे आपके बीवी-बच्चे कैसे जुड़े रह सकते हैं?आप बातों से तो उन्हें खुश कर सकते नहीं। कोई भी व्यक्ति बीवी-बच्चों की हसरतों को जानबूझ कर तो मसलना चाहता नहीं। उसके पीछे ठोस कारण होता है। हसरतें पूरी न करने का कारण या तो काम की व्यस्तता हो सकती है या ध्नाभाव हो सकता है। काम की व्यस्तता से कैसे छुट्टी मिलेगी और
ध्नाभाव से कैसे पीछा छूटेगा यह सोचना सिपर्फ पति का ही नहीं, बल्कि पत्नी का भी काम है। दोनों मिल-बैठकर बात कर सकते हैं तो अवश्य ही कोई हल निकल सकता है।
पत्नी पति की व्यस्तता और ध्नाभाव से खपफा होने की बजाए स्मिता की तरह बात करने की कोशिश करती है तो पति यह सोचने पर मजबूर हो जाता है कि उन्नति का आखिर सही रास्ता क्या है?सोचने से ही बात बनती है, समझाने और समझने से ही उम्मीद की लौ नजर आती है। स्मिता ने समझाया और नीतेन ने समझा। समझने की बजाए वह झगड़ पड़ता तो समस्या और बढ़ जाती। आप सदा अपनी जगह पर बीवी-बच्चों को रखकर सोचिए। घर में एक जगह पर रहकर वे उफब जाते हैं, इसीलिए वे पर्व-त्योहार या किसी पार्टी-पफंक्शन के अवसर पर आपसे जिद करते हैं, आप ऐसे मौकों पर भी असमर्थता जताते हैं तो पिफर आपकी कीमत उनकी नजरों में कोई खास नहीं रह जाती है। अपने प्रति उनकी उम्मीद को बनाए रखने के लिए मेहनत और आमदनी में संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, वरना आप नकार दिये जाएंगे।

पति की जासूसी न करें सरियलों को देखकर

वृंदा ने टी.वी. आॅन किया तो कोई धरावाहिक आ रहा था। आध्े घंटे के सीरियल में उसने बस यही देखा कि एक शादीशुदा मर्द से दो कुंआरी युवतियां प्यार कर रही हैं और एक दूसरे सीन में एक शादीशुदा स्त्राी से दो युवा मर्द प्यार कर रहे हैं।
वृंदा का मूड आॅपफ हो गया। टी.वी. बंद कर वह बेडरूम से बाहर आ गई। वह एक अजीब-सी बेचैनी अपने अंदर महसूस कर रही थी। उसने आलोक का नंबर मिलाया-‘अपना ध्यान रखना…’
‘आज बड़ी हमदर्दी दिखाई जा रही है। कोई खास बात तो नहीं है?’ आलोक के इतना पूछते ही एक महिला सहकर्मी खिल-खिलाकर हंस दी। वृंदा ने हड़बड़ाए स्वर में कहा-‘यह किस महिला के हंसने की आवाज है…?’
‘इतना बड़ा आॅपिफस है। यहां महिलाओं की कमी तो है नहीं…लेकिन तुम इतनी इंक्वारी क्यों कर रही हो…?’ आलोक ने थोड़ी सख्त आवाज में कहा तो वृंदा ने ध्ीमी आवाज में यह कहकर पफोन रख दिया कि घर पर अकेली हूं न…घर जल्दी आ जाना।
घबराहट में वृंदा पति के प्रश्न का जवाब नहीं दे सकी और यह कहकर पफोन बंद कर दिया कि वह घर पर अकेली है। जल्दी आ जाना। जबकि उसके मन में कुछ और ही खिचड़ी पक रही है। आलोक जहां सर्विस करता है, वहां महिलाएं भी काम करती हैं। आलोक की किसी-न-किसी महिला से दोस्ती और पिफर प्यार हो सकता है। घर में सब कुछ है। आलोक उसका पूरा ध्यान रखता है, पिफर भी वृंदा का मन अशांत है। यह अशांति उसे टीवी के सीरियलों ने दी है।
ऐसे में आपको यह सोचने की जरूरत है कि हकीकत में ऐसा कुछ भी नहीं है। धरावाहिकों की कहानियों में जिन पात्रों को जबर्दस्ती एक साथ दो-दो औरतों या पुरुषों से प्रेम करते दिखाया जाता है, रियल लाइपफ में ऐसा संभव नहीं है। क्योंकि आपने अब तक की अपनी लाइपफ में कितने स्त्राी-पुरुष को इतना भ्रष्ट देखा है, जो जान-बूझकर दो-दो बच्चों की मांओं या पिताओं से प्यार करने के लिए लालायित हों?
किसी लालच या मजबूरी में की गई शादी या प्यार की बात हम यहां नहीं कर रहे हैं। हम तो यहां यह बताना चाह रहे हैं कि जो आप पिफल्मों में या सीरियलों में काल्पनिक बेसिर-पैर के संबंधें को देखते हैं, उनका आपकी लाइपफ से कोई वास्ता नहीं है। वृंदा सीरियलों के दृश्यों और घटनाओं को देख-देखकर ही तो पागल सी हो गई है और निर्दोष आलोक उसे सपनों में भी दोषी ही नजर आ रहा है।
घर बिगाड़न्न् धरावाहिकों की टी.वी. पर भरमार है, जिन्हें महिलाएं ही अध्कि देखती हैं और किसी भी घटना को अपने पति से जोड़कर अचानक ही तनाव में आ जाती हैं।
प्रतिभा दोपहर से तनाव में थी। कभी बेडरूम में आ रही थी, तो कभी ड्राइंग रूम में जा रही थी। उसे कहीं भी चैन नहीं मिल रहा था। तभी उसकी एक सहेली का पफोन आ गया-‘कैसी हो प्रतिभा?’
‘क्या बताउफं तुझसे… आज तो मन बहुत ही अशांत है। अच्छा किया तुमने पफोन कर लिया।’
प्रतिभा के इतना बोलने पर सहेली ने सवाल कर दिया-‘आज तुम्हारा मन अशांत क्यों है?तुम्हारे पास तो सब कुछ है।’
‘अरे यार क्या बताउफं… अभी-अभी एक सीरियल देखा, जिसमें बाॅस अपनी सेक्रेटरी के साथ ही रोमांस कर रहा है… कहीं अंकुश भी अपनी सेक्रेटरी के साथ…’ यह बोलते-बोलते प्रतिभा की आवाज पफंस गई और वह गला सापफ करने लगी।
‘इन मर्दों का कुछ नहीं भरोसा… इन्हें पिफसलते देर नहीं लगती है।’ सहेली ने प्रतिभा की बात का समर्थन कर पफोन काट दिया। प्रतिभा अब तो और भी अध्कि परेशान और दुःखी हो गई। शाम को अंकुश के घर आते ही उसने सवाल कर दिया-‘सेक्रेटरी का जाॅब लोग औरतों को ही क्यों देते हैं?’
‘मुझे नहीं मालूम…’
‘सेक्रेटरी का जाॅब पुरुष भी तो कर सकते हैं?’
‘हां, कर सकते हैं…’
‘तो पिफर तुमने सेक्रेटरी के पद पर महिला को क्यों रखा है?’
‘तो क्या हो गया?वह भी तो इंसान ही होती है। आज तुमने महिलाओं के खिलापफ मोर्चा क्यों खोल रखा है?’ अंकुश ने पत्नी को आश्चर्य से घूरते हुए पूछा।
‘मुझे डर है कि कहीं तुम मुझे छोड़कर उससे शादी न कर लो…’ प्रतिभा के इतना कहने पर अंकुश गुस्सा हो गया-‘तुमने जरूर किसी सीरियल में ऐसा होते देखा होगा। तुम्हारे दिमाग की उपज तो यह हो नहीं सकती। सीरियलों की घटनाओं को रियल लाइपफ से जोड़कर देखना बंद कर दो वर्ना एक दिन पागल हो जाओगी।’
वास्तव में आज अध्किांश महिलाओं को सीरियलों ने रोगी बना दिया है। हर चीज को शक की निगाहों से देखने की उन्हें आदत-सी पड़ गई है। पति को तो वे शक की निगाहों से हर हाल में देखती हैं और उनकी गतिविध्यिों पर सदा ही नजर टिकी रहती है। पत्नी की इस जासूसी से पति की मनःस्थिति पर गलत प्रभाव पड़ता है। जो पति गलत नहीं है और पत्नी के प्रति पूरी तरह से समर्पित है अगर ऐसे में पत्नी उसकी जासूसी करते हुए पकड़ी जाती है, तो पत्नी के प्रति उसकी आस्था कम हो जाती है।
अच्छे-बुरे का पता लगाना अलग बात है और छुप-छुप कर जासूसी करना अलग चीज है। भंडा पफूटता है तो इमेज खराब हो जाती है। शरीपफ और स्नेही हृदय का पति पिफर जिद पकड़ लेता है कि जब इसे मुझ पर विश्वास ही नहीं है तो शरापफत का जामा पहन कर घूमने से क्या पफायदा?
कहने का तात्पर्य है कि कहीं पर कोई कुछ भी घटता हो तो उसे अपने साथ जोड़कर ऐसा न सोचें कि भविष्य में आपके पति या बच्चे भी इस तरह की हरकतें कर सकते हैं या कर रहे होंगे।
यह सच है कि हमारे सामने जो भी कुछ घटता है, वह हमें प्रभावित करता है और हम न चाहकर भी उसमें स्वयं को कहीं-न-कहीं महसूस करने लगते हैं। यह स्थिति खतरनाक साबित होती है। उसका पति अपनी सहकर्मी के साथ भाग गया, मेरा पति भी ऐसा कर सकता है, यह नकारात्मक सोच है। हर आदमी की सोच, नजरिया और स्वभाव दूसरे से भिन्न होता है। आपने देखा भी होगा-एक व्यक्ति नशेड़ी है, जुआरी है, औरतों का रसिया है और दूसरा कोई भी नशा नहीं करता है, उसमें कोई भी गंदी लत नहीं है, पिफर भी वे दोनों गहरे मित्रा होते हैं। हमारे भी कई ऐसे दोस्त हैं, जो शराब पीते हैं और खूब पीते हैं, पर हम शराब को हाथ भी नहीं लगाते हैं।
हमारा कहने का मतलब है कि आॅपिफस में कोई कर्मचारी गलत है या किसी का किसी से चक्कर चल रहा है तो आपके पति भी ऐसा कर सकते हैं, यह सोचना गलत है क्योंकि उनकी सोच उनके साथ होती है, आपका प्यार उनके साथ होता है, वे ऐसा करने से पहले सौ बार सोच सकते हैं। इस तरह के शौक तो वे लोग पालते हैं, जो शुरू से ऐसे ही होते हैं। जो गलत नहीं है और यदि किसी मजबूरी वश बहक गया है तो यह स्थिति लंबे समय तक के लिए नहीं होती है। आप पति के प्रति अपना नजरिया स्पष्ट एवं सापफ रखिए।

पति को रीझाना जानती हैं आप

राकेश ने बेडरूम का     दरवाजा खोला और सोपफे पर जाकर ध्म्म से बैठ गया। आज आॅपिफस में भी खूब काम था और उसे बाहर भी जाना पड़ा था। आध्े घंटे के बाद सुचित्रा आॅपिफस से घर पहुंची तो राकेश अस्त-व्यस्त सोपफे पर बैठे-बैठे ही सो गया था। थकी तो वह भी थी। प्रिफज से पानी की एक बोतल निकाली और गिलास में पानी डालकर राकेश को जगाया-‘लो, पानी पियो। आॅपिफस से आकर तुम सोते तो कभी नहीं हो। आज कुछ ज्यादा ही काम था क्या?’ एक-दो घूंट पानी पीने के बाद राकेश ने पूछा-‘तुम कब आई?’
‘दस मिनट हो गए। मैं चाय बनाकर ला रही हूं। तब तक तुम कपड़े बदल लो।’ यह कहकर सुचित्रा किचन में चली आई। चाय चूल्हे पर रखकर सुबह के जूठे बर्तन सापफ करने लगी, पिफर बेडरूम में पोंछा लगाया। इसके बाद चाय लाकर टेबल पर रख दी-‘तुम चाय पियो, मैं तब तक कपड़े धे लेती हूं।’
‘नहीं डार्लिंग, मुझे भी कुछ करने दो। तुम जाकर खाना बनाओ और मैं कपड़े धेने जा रहा हूं। काम तो तुम भी करके आई हो।’
‘ठीक है, लेकिन मेरे कपड़े मत धेना।’
‘क्यों नहीं धेना?तुम भी तो मेरे काम करती हो?’ राकेश ने सुचित्रा को आश्चर्य से देखते हुए कहा तो वह शरमाती हुई बोली-‘मैं तुम्हारी पत्नी हूं। तुम मेरे कपड़े धेओगे तो क्या यह अच्छा लगेगा?’
‘इसमें अच्छे-बुरे की बात कहां से आ गई?न तो पत्नी छोटी होती है और न ही पति बड़ा होता है। ये सब हमारे बनाए हुए नियम हैं कि पत्नी खाना बनाएगी, बर्तन सापफ करेगी, झाड़न्न्-पोंछा लगाएगी, बच्चों की देखभाल करेगी और पति सिपर्फ ध्नोपार्जन का काम करेगा, लेकिन ये तब की बातें हैं, जब पत्नी घर में ही रहती थी।’ राकेश यह कहकर कपड़े
धेने चला गया। सुचित्रा किचन में जाकर खाना बनाने लगी। आध्े घंटे के भीतर ही राकेश ने सारे कपड़े धे दिए और तब तक सुचित्रा ने भी खाना बना लिया। समय से ही खा-पीकर वे सो गए।
सुचित्रा एक सुलझे हुए विचारों की महिला है। राकेश भी पाॅजिटिव सोच रखने वाला व्यक्ति है। राकेश आॅपिफस से घर लेट पहुंचता है तो सुचित्रा कोई कमेंट्स या टोन नहीं करती है और सुचित्रा देर से घर आती है तो राकेश कोई सवाल नहीं करता है। यह सब सुचित्रा के कारण ही संभव हो सका है। आज वह आॅपिफस से घर लेट पहुंची तो थके होने का रोना रोने की बजाए उसने  पानी के गिलास के साथ राकेश को जगाया, पिफर चाय बनाकर दी। इसके बाद किचन सापफ किया। बेडरूम में पोंछा लगाया और पिफर बड़े ही विनम्र स्वर में बोली कि मैं कपड़े धेकर आती हूं तब खाना बनेगा। वह यह भी कह सकती थी कि चलो तुम खाना बनाओ, मैं कपड़े धेने जा रही हूं। नौकरी करके तुम थके हो तो मैं भी थकी हूं, लेकिन सुचित्रा ने अध्किार भाव का प्रयोग नहीं किया क्योंकि उसे यह अच्छी तरह से पता है कि अध्किारों की बात अगर उसने कर दी तो राकेश तो काम करने से रहा, उफपर से बहस भी शुरू हो जाएगी।
जीने का यह सबसे बेहतर तरीका है, जिसका बोध् बहुत कम पति-पत्नी को ही होता है। सुचित्रा ने पति को काम के लिए एक बार भी नहीं कहा, अकेले ही सारा काम करती रही। अंत में पति को खुद-ब-खुद ही पफील हुआ कि सुचित्रा भी तो थकी है। वह घर के सारे काम करती रही तब तो खाना रात के दस बजे तक भी नहीं बन पाएगा। ऐसे तो हम दोनों ही आराम नहीं कर पाएंगे। राकेश को ऐसा सोचने पर मजबूर किया सुचित्रा की पाॅजिटिव सोचों ने और यह सच भी है, सामने वाले को कोई चीज या कोई बात महसूस करानी हो तो आप उससे  कुछ भी कहिए नहीं, बस आप जितना कर सकते हैं करते रहिए। वह अगले पल ही अपने आप से शर्मिंदा हो जाएगा। राकेश को सुचित्रा ने अपने कार्यों से इतना शर्मिंदा कर दिया कि उसे कहना ही पड़ गया कि तुम खाना बनाओ। मैं कपड़े धेने जा रहा हूं। सुचित्रा ने अपने कपड़े न धेने की बात कहकर पति के मन की पफीलिंग भी जान ली कि पति उसके कपड़े धेने के लिए तैयार है या नहीं।
ऐसे गुण एक सुपर गृहिणी में ही हो सकते है, वरना तो नौकरीशुदा पत्नियां चुप कहां रहती हैं। घर में घुसते ही वे कार्यों का बंटवारा कर देती हैं कि तुम कपड़े धेओ और मैं खाना बनाने जा रही हूं। तुम झाड़न्न्-पोंछा लगा दो, तब तक मैं किचन सापफ कर देती हूं। तुम यह कर दो, मैं वह कर देती हूं, इस तरह के शब्द पति के मन में द्वेष भाव उत्पन्न करते हैं और उसके ईगो को हवा देते हैं। पति पत्नी के ऐसे आदेशों से स्वयं को अपमानित महसूस करता है और मन में यह भाव भी भर लेता है कि नौकरी कर रही है तो घर का काम मुझसे करवाना चाहती है। पति के मन में इस तरह के भाव जब आ जाते हैं तो वह यह सोच-सोच कर अपफसोस करता है कि उसने एक नौकरीशुदा लड़की से शादी क्यों की?
पति के मन में इस तरह का प्रश्न सुपर गृहणियां उठने भी नहीं देती और अपनी व्यवहार कुशलता के दम पर पति को घर के काम करने के लिए स्वाभाविक रूप से राजी भी कर लेती हैं। कहकर जो काम आसानी से नहीं कराए जा सकते हैं, वे काम बिना कहे ही कराए जा सकते हैं। बस पत्नी में ध्ैर्य और त्याग की भावना होनी चाहिए। सुचित्रा में ध्ैर्य और त्याग दोनों का ही मिला-जुला भाव है। वह कभी भी काम के लिए पति से नहीं कहती है। अपनी शक्ति और क्षमता भर वह करती रहती है। राकेश को खुद ही पफील हो जाता है कि हाथ पर हाथ रखकर बैठने से तो अच्छा है कि वह भी एकाध् काम कर दे। इससे उसे पत्नी का साथ भी मिल जाएगा और वह सुबह जल्दी भी उठ सकेगा।
आप पति हों या पत्नी एक-दूसरे को अपने-अपने अध्किारों का अहसास न करवा कर कुछ सुचित्रा की तरह ऐसा करें कि साथी के मन में स्वाभाविक रूप से कार्यों में सहयोग देने की इच्छा प्रबल हो उठे। यह मेरा काम नहीं है, तुम्हारा है, कहना अनुचित है क्योंकि जब पति-पत्नी दोनों ही नौकरीशुदा हैं तो घर का काम सिपर्फ एक का नहीं है। पत्नी आठ बजे घर आई है तो घर के सारे कार्य निपटा कर वह खाना बनाना शुरू करेगी, तो खाते-पीते ग्यारह बज जाना ही है। पिफर सुबह उठने की जल्दी, ऐसे में पति-पत्नी की अपनी कोई भी लाइपफ नहीं रह जाती है। महानगरों में या नगरों में आजकल परिवार के नाम पर सिपर्फ पति-पत्नी और एकाध् बच्चे ही होते हैं अध्किांश पति-पत्नी नौकरी करते हैं। वे जब घर पहुंचते हैं तो किचन में जूठे बर्तन, गंदा बेडरूम और बाथरूम में सुबह के पड़े कपड़े देखकर आपस में न चाहते हुए भी झगड़ पड़ते हैं। ऐसे में पत्नी सुचित्रा की तरह समझदार होती है तो बड़ी कुशलता से ही पति को कार्यों में हाथ बंटाने के लिए स्वाभाविक रूप से राजी कर लेती है एक सुपर गृहिणी या सुपर पत्नी की पहचान भी यही है।