गुप्त रोग की जानकारी हिंदी में | Gupt rog ki jankari hindi me ​

Gupt rog ki jankari hindi me

हमारी वेबसाइट पर आप का स्वागत है | में डॉक्टर अशोक गुप्ता अशोक क्लिनिक दिल्ली से आपकी सेवा में हाजिर हु | और हम अपने ज्ञान के अनुसार अपनी वेबसाइट के माधयम से आप को कुछ न कुछ बताते रहते है |

आज हम आपको गुप्त रोग की जानकारी हिंदी में (Gupt rog ki jankari hindi me ​) बतायंगे | गुप्त रोग के बात सुनते ही व्यक्ति मुँह बना लेते है | गुप्त रोगी को हीन भावना से देखते है |

वास्तव में लोगो को गुप्त रोग की जानकरी नहीं है | आपको इसकी सही जानकारी की जरुरत है | लोग हेर प्रकार की गुप्त अंगो की बीमारी को गुप्त रोग समझते है | पर गुप्त रोग केवल सिफलिस और गोनोरिया ये सामान रूप से औरतो और मर्दो को होते है |

गुप्त रोग के कारण

ये सम्भोग के माध्यम से फलते है |
१. पार्टनर का इस समस्या का होना |
२. अनजान व्यक्ति से बनी कंडोम सम्भोग करना |

गुप्त रोग दो प्रकार के होते है |

१. गोनोरिया – निसेरिया गोनोरीए नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। जो सम्भोग के दौरान पीड़ित से दूसरे के गुप्त अंग पैर भी आ जाता है| | यह बहुत तेजी से फैलता है। यह आपके गले, मूत्र नली, योनि और गुदा को संक्रमित कर सकता है। इस से बचने के लिए पीड़ित पार्टनर का इलाज कराये | अनजान व्यक्ति से बनी कंडोम सेक्स न करे |

२. सिफलिस – सिफलिस में गुप्तांग पर छाले पड़ जाते है खून बहता है, जखम हो जाते है | इस से बचने के लिए हमे कंडोम का इस्तमाल करना चाहिए |

गुप्त रोग का समाधान

अगर अब अभी किसी भी गुप्त रोग से पीड़ित है तो अपने फॅमिली डॉक्टर को दिखये, अपना खून टेस्ट कराये | हिचकिचाए नहीं, सरमाये नहीं सवाल आपके शरीर का हे |

किसी भी प्रकार की सहायता के लिए कभी भी मुझे संपर्क करे | हम आपके स्वतः के लिए समर्पित है |

उम्मीद करता हु आपको मेरा लेख पसंद आया होगा | अगर पसंद आया है तो इसे शेयर करे ताकि आपके नजदीकियों को भी इसका लाभ मिल सके |

अगर आपक गुप्त रोग का घरेलू उपाय जानना कहते है तो यह क्लिक करे |

Gupt rog

 

हस्तमैथुन सही या गलत ? (Hastmaithun sahi ya galat)

हेलो दोस्तों ! आपका स्वागत है. आज मैं डॉ अशोक गुप्ता यहाँ आपके साथ इस लेख में एक बहुत ही संवेदनशील विषय पर जानकारी शेयर कर रहा हूँ।
आज के इस आधुनिक युग में किसी भी पेरकरी की जानकरी किसी से भी छुपी नहीं है । इसके फायदे भी है और नुकसान भी, इन्ही में से इक नुकसान है । एडल्ट कंटेंट का कम उपंर के बचो तक पहुंचना। जिसक्के कारन वो बचपन में ही गलत आदतों में पद जाते है जैसे हस्तमैथुन ।

हस्तमैथुन सही या गलत ।
अधिकतर लोग अपने जीवन में हस्थमैतुन करते है और ये एक सामान्य बात है पैर समस्या तब गंभीर हो जाती है । जब आप इसके अदि हो जाये और हफ्ते में २ बार से ज्यादा हस्तमैथुन करे। इसके परिणाम और भी गंभीर हो सकते है यदि 18 से कम उमार में हे आपको हस्तमैथुन की लत हो जाये ।

हस्तमैथुन की लत के कारण ।
हस्तमैथुन का सीधा और साफ कारण है दिमाग में गलत विचार का होना । जीन वजहों ये ये गलत विचार दिमाग में आते है वो इस प्रकार है ।
1. यौवन का आना – जब लड़को या लड़कियों को यौवन अत है तो उनकी गुप्त अंग में रूचि बढ़ जाती है । और किसी दोस्त की सलहा को मानकर हस्तमैथुन करने लगते है अगर उन्हें समय पर सही सेल्हा न मिले तो वो इसके अदि हो जाते है ।
2. गलत संगत – बचे अधिकतर हस्तमैथुन गलत सांगत में ही सीखते है या गलत संगत में एडल्ट फिल्म देखकर काम उम्र में ही उत्तेजित होने लगते है और ऐसे में हस्तमैथुन की लत का सीकर जो जाते है ।
3. अकेलापन – जैसा हम जानते है की खली दिमाग शैतान का घर होता है । खली समय में दिमाग में यौवन अवस्था के कारण एडल्ट बाते आने लगती है और बच्चे हस्तमैथुन करने लगते है ।
4. इंटरनेट – आज कल हेर घर में इंटरनेट है । और बच्चोके हाथ में मोबाइल रहते है तो वो इस का इस्तमाल पोर्न देखने में करने लगते है और हस्तमैथुन के अदि हो जाते है ।
5. सही सलहा का आभाव – हम चाहे कितना भी दोसे संगति या पोर्न को दे ले पर सच यह भी है की इन सबके होते हुए भी कुछ बचे हस्तमैथुन नहीं करते । इसके सबसे मुखी कारण सही सलहा का आभाव है । हमारे समाज के रवैये के कारण सेक्स एजुकेशन को गलत मानाजाता है न ही कोई घर में इस गंभीर मुड़े पर बात करता है । तो बच्चा को जो बात दोस्तों से पता चलते है उसे ही सही मने लगता है । चाहे वो सही हो या गलत ।

हस्तमैथुन के नुकसान ।

अत्यधिक हस्तमैथुन के मनु शरीर पर काफी दुष्प्रभाव होते है । जैसे..

1 शरीर में कमजोरी – जैसा आप जानते होंगे 1 विरए की बुँदे बने में 10 खून की बूंदो का योगदान होता है । अत्यधिक हटमाटहुँ से काफी वीर्यव निकलता है । और शरीर का अधिकतर खून विरए बनाने के ही लग जाता है और शरीर में कमजोरी अणि लगती है ।
2 आलास – शरीर में कमजोरी आने से सुस्ती आजाती है और किसी काम में मन नहीं लगता। जिसका सदी असर आपकी पढाई और काम पर होता है ।
3 कमर के निचले हिसे में दर्द होना – अत्यधिक हस्तमैथुन करने से कमर का निचला हिस्सा कमजोर जो जाता है । फलसवरूप कम उम्र में ही निचले हिंसा में दर्दे रहने लगता है । उम्र बढ़ने के साथ घुटनो में भी दर्दे रहें लगता है ।
4 शुक्राणु की कमी – अधिक विरए निकलने ये विरए कफर पतला हो जाता है और शुक्राणु की कमी आजाती है ।
5 शीघ्रपतन की समस्या – हस्तमैथुन करते समय वयक्ति को क्लाइमेक्स तक पहुंचने की जल्दी होती है, ऐसा लम्बे समय तक करने से यही उसके शरीर की आदत भी हो जाती है और पार्टनर के साथै सेक्स करते समय आदत वस् क्लाइमेक्स जल्दी हो जाता है और पार्टनर भी असंतुस्ट रह जाता है।
6 नामर्दी की शिकायत – कुछ मामलों में अत्यधिक हस्तमैथुन से सेक्स में रूचि कम हो जाती है और sadi के बाद वयक्ति को तनाव नहीं आता और वह सेक्स करने में असफल रहते है ।

हस्तमैथुन का इलाज ।

हस्तमैथुन इक मानसिक बीमारी है । इसका इलाज भी संभव है । इसका इलाज किस डॉक्टर से जयादा रोगी की इच्छाशक्ती पर निर्भर है । यदि रोगी इस के इलाज के लिए दृढ़संकल्प है तो केवल इसके कारणो को रोकना होता है ।

1. किसी भी प्रकार के एडल्ट बातो, फोटो या वीडियो से दूर रहे ।
2. अपने दिमाग को किसी बड़े लक्ष्य की और केंद्रित करे । इस से बेकार बातो के लिए आप के दिमाग में जगह ही नहीं रहेगी ।
3. केवल उन्ही लोगो के साथ रहे जो आपकी लक्ष्य प्राप्ति में सहायक हो । इस से आपकी संगत सही होगी और टोकरी में सब का उद्धरण तो आप भी जानते होंगे ।
4. कुछ युवाओ को रात में हस्त्मथुन के बिना नींद नहीं आती वो सुबह जल्दी उठे दिन में आराम न करे, अगले दिन के लिए सोने से पहले योजना बनाये, इस से आप अगले दिन के लिए उत्साहित रहेंगे और आप को नींद भी जल्दी आएगी ।
5. उपरोक्त सभी से ज्यादा जरूरत है यौवन अवस्था में सही सलहा की ताकि हस्तमैथुन की लत ही न लगे। अगर बचे के माँ-बाप या विध्यापक इस से सम्बंधित सही जानकरी नहीं देंगे तो वो कही सुने बातो को मानकर जीवन को बर्बाद कर लेंगे । आपकी शर्म और संकोच बच्चो के लिए हानिकारक हो सकते है ।

आखिर में मैं डॉ अशोक गुप्ता यही कहना चाहूंगा की बच्चे हमारे देशका भविष्ये है शर्म और संकोच में पेड़ केर इन्हे अज्ञान के अंधरे में न धकेले । अगर आप को लगता है की आप या आपका बच्चा हस्तमैथुन की लत से पीड़ित है तो आप मेरे उपरोक्त दिए इलाज को अपनये इस से आप को जरूर फायदा मिलेगा अगर आप ऐसा कर पाने में असमर्थ है तो निसकंकोच मुझे संपर्क करे ।

धन्यवाद
डॉ अशोक गुप्ता,
अशोक क्लिनिक दिल्ली

gupt rog kya hai

Gupt Rog Kya Hai – गुप्त रोग क्या है

सैक्यूली ट्रांसमिटिड डिसीसेस को हम गुप्त रोग कहते है हैं । क्योंकि हमारे समाज में सेक्स संबधित सारी बातों के बारे में खुलकर बातें नहीं कर सकते। सेक्स शाररिक और मानसिक जरूरत वाली चीज है। सम्भोग का आन्नद पाने के लिए पुरूश व महिला दोनों अलग अलग आदमी और औरतें से समभोग करते हैं तो उनको गुप्त रोग होने की सम्भावना होती है। गुप्त रोग आपस में आदमी या महिला चेन्ज करने से या बल्ड से या सिरिंज के प्रयोग करने से एक दूसरे से फैलता है। अगर किसी गर्भवती महिला को गुप्त रोग है तो उसके बच्चे को भी गुप्त रोग हो जाता है। इस लिए यह जाना आप के लिए जरुरी है की “गुप्त रोग क्या है”।

गुप्त रोग के प्रकार

गोनोरिया
सिफलिस
हर्पीस
क्लैमाडिया
एच आई वी

गुप्त रोगो के बारे में विस्तृत जानकारियाँ

गोनोरिया – निसिरिया गोनोरिया नाम का बैक्टिरिया नाम का नाम का गुप्त रोग का कारण है। ये बैक्टिरिया सेक्स के दौरान एक आदमी से दूसरे आदमी फैलता है। इस रोग के लक्षण पुरूशों में इंसैक्षन के 14 दिनों बाद इनकी पेशाब की नली में जलन होने लगती है इससे पीला या सफेद पानी बाहर निकलता है। और गृहस्थी करने में पहले झड़ जाता है और पेशाब में जलन होती है।

सिफिलिस – टेरीपोनिमा पालीडम बैक्टिरिया सिफिलिस के कारण होता है। यह रोग भी सेक्स के कारण ही पैदा होता है । इस गुप्त रोग से 10 दिन के बाद इंफेक्सन की जगहे एक लाल सा निषान हो जात है। यह निषान बाद में चला जाता है। लेकिन बैक्टीरिया फिर भी रह जाता है। और इसकी दूसरी स्टेज पर 15 दिन से 6 महीने के बाद परागत होता है और शरीर पर रास होता है। खासकर पैरों के तलवे व हाथ में इसका असर हो जाता है। इस बीमारी से सिर में दर्द और बुखार भी आ जाता है। यह दवाई से सही हो जाता है लेकिन जो तीसरी स्टेज है वह बहुत ही खतरनाक होती है । ये दीमाग, दिल हडडी, व रीड़ की हर्डिडयो पर अपना असर दिखाता है जिससे हार्टअटैक, पागल, पायरलिस, बहरापन और हड्डियों के रोग से पीडित होता है। अगर गर्भवती महिला ने बच्चा पैदा किया तो बह होते ही मर जायेगा, बहरापन, या अन्धा पेदा होगा।

हर्पीस – हर्पीस होने का कारण है हर्पीस सिम्पलैक्स वायरस जो कि दो प्रकार का होता है। इस रोग का संक्रमण सैक्स के दौरान होता है। यह वायरस शरीर में रहकर भी इसके कोई लक्ष्ण नहीं होता है। इस बीमारी से पहले बुखार आता है, गर्दन में दर्द होता है फिर षरीर में कमजोरी महसूस होती है इस इंसपैक्सन से गुप्तांगों में होता है और एक छोटा सा पोडली होता है जो कि अल्सर में परिवर्तित हो जाता है। इससे पेषाब करने पर खुजली होती है और 15 दिन के बार ये अल्सर अपने आप गायब हो जाते हैं। फिर दोबार दिखाई देने लगते हैं।

क्लैमाईडिया – क्लैमाईडिया को उरिर्थिसिस के नाम से जाना जाता है। ये जन्तु सैक्स के दौरान फैलते हैं और गेनोरिया जैसे गुप्त रोग उत्पन्न हो जाते हैं। इसका इंसपैक्सन होने के 7 से 21 दिनों तक इसके लक्षण महसूव किये जात सकते हैं।

एचआईवी – एचआईवी एक जानलेवा बीमारी है जिसका कोई ईलाज नहीं है। इसका असर सीधा इतना खतरनाथ नहीं है लेकिन इमुनिटि को नाष करने के कारण षरीर में सभी प्रकार के रोग हो सकते हैं।

गुप्त रोग के लक्षण:
1. पेषाब में जलन
2. गुप्तांगों पर फफोले
3. गुप्तांगों में मस्से हो जाना
4. त्वचा पर रास
5. लिंग या योनी से डिस्चार्ज
6. पेट में दर्द

क्या गुप्त रोग मिट सकते है |

हाँ जी गुप्त रोगों का समय पर ईलाज किया जाए तो इनका जड़ से खतम किया जा सकत है। इसके लिए आप किसी सही से डाक्टर से ईलाज करवा सकतेे हैं। या आप घरेलू उपचार से इलाज कर सकते हैं। कई बार ऐसा होता है कि कीटाणु ज्यादा फैल जाते हैं तो घरेलू उपचार काम नहीं करता है तो आयुर्वेदिक दवा से भी इस बीमारी का इलाज कर सकते हैं। ऐलापैथिक इवाई से भी इस बीमारी का इलाज किया जाता है। पेन्सििलिन से सिफिलिस का इलाज किया जाता है कुछ एन्टीवाइटिक दवाओं से एचआईवी का इलाज किया जाता है।

किसी भी परकर की जानकारी के लिए संपर्क करे अशोक क्लिनिक दिल्ली । हम आपकी सहायता का पूरा प्रयास करेंगे ।

डॉ अशोक गुप्ता,
धनयवाद

नपुंसकता का इलाज (Napunsakta ka ilaj)

Napunsakta Ka Ilaj

नपुंसकता जिसे आम बोल-चाल के भाषा में मर्दाना कमजोरी अथवा नामर्दी के नाम से जानते हैं, आज के बदलते परिवेश में नामर्दी अथवा नपुंसकता के बारे में अधिकतर लोग जानते है ||

नपुंसकता क्या हैं ?

नपुंसकता पुरुषों में होने वाला यौन रोग हैं , जिससे पुरुषों के लिंग में उत्तेजना न आना, उत्तेजना के बाद जल्दी शांत हो जाना, कामेच्छा की कमी और संभोग करने के समय या करने से पहले घबराहट होना |

 

नामर्दी अथवा नपुंसकता के कारण

साधारणतः पुरुषों में 60 साल के बाद और महिलाओं में 45 साल के बाद हॉर्मोन की कमी होने लगती है, जिससे उनके उत्तेजित होने में समय लगता है या फिर वे उत्तेजित ही नहीं हो पाते हैं। इसके आलावा नपुंसकता के दो अहम कारण होते हैं |

1 शारीरिक
शारीरिक नपुंसकता गुप्तांग में ब्लड सप्लाई की कमी की वजह से या नर्व्स की गड़बड़ी से या हॉर्मोनल असंतुलन इसकी वजह हो सकते है । किसी अन्य बीमारी के साइड इफ़ेक्ट के कारण भी नपुंसकता की समस्या हो सकती है |

2 मानसिक
वही मानसिक नपुंसकता दिमाग से जुड़ी रहती है, अधिकतर लोग मानशिक नपुंसकता के ही शिकार होते है | इसका कारण मुखी तेह भय, चिंता और हीन-भावना होती हैं।

 

नपुंसकता का इलाज

 

नपुंसकता के घरेलू इलाज

1. जामुन की गुठली पीस कर इसका पाउडर बना ले और गरम दूध के साथ हर रोज ले। इस उपाय से स्पर्म की संख्या बढ़ने लगेती है और कामेच्छा की कमी को दूर करता हैं ।

2. वीर्य दोष यानि आपको धातु क्षिणता हो तो आधा चम्मच हल्दी पाउडर एक चम्मच शहद में मिला कर सुबह सुबह खाली पेट सेवन करते रहने से संभोग शक्ति बढ़ती है।

3. मेवों के सेवन से भी उत्‍तेजना की समस्‍या का इलाज किया जा सकता है. बादाम, खजूर, किश्‍मिश और पिस्‍ता का रोजाना सीमित मात्रा में सेवन करने से सेक्‍स समस्‍याओं से निजात मिल सकती है.

नपुंसकता के लिए जरुरी योग आसन और व्यायाम

वज्रोली क्रियाविधि :- इस से वीर्य स्थिर होगा मस्पसिओ में मजबूती आएगी. इसे से नपुंशकता के सतह स्वप्नदोष और शीघ्रपतन छुटकारा मिलता है |

भुजंगासन :- इस से आपके गुप्तांग के नसों में मजबूती आएगी मलस्वरूप लिंग में तनाव आने लगेगा और आप की नपुंसकता की समस्या ख़तम हो अजयेगी ।

सलहा : – अगर उपरोक्त दे गयी जानकारी से लाभ नहीं होता है तो अपने फॅमिली डॉक्टर से या किसी नजदीकी अनुभवी डॉक्टर को दिखाए |

या कॉल करे अशोक क्लिनिक पर किसी भी समय |

धन्यवाद,
डॉ. अशोक गुप्ता

वजन कम करें – (Weight Loss)


वज़न कम करना बहुत मुश्किल लक्ष्य लग सकता है लेकिन वास्तविकता में आप सीख सकते हैं कि बुद्धिमत्तापूर्ण रूप से भोजन और व्यायाम को अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करके आप किस प्रकार दो महीनों में अपना वज़न 14 किलोग्राम तक कम कर सकते हैं | नौ सप्ताह की समयावधि में इतने वज़न को कम करने के लिए आपको एक योजना और समर्पण की आवश्यकता होगी लेकिन अगर आप एक बार अपने मन में ठान लें तो आपने लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं |

बेसल मेटाबोलिक रेट एक ऐसी गणना है जिसमे प्रारूपि रूप से एक दिन में आपके द्वारा जलाई गयी कैलोरी की गणना की जाती है | बेसल मेटाबोलिक रेट की गणना करें और आपके द्वारा खर्च की जाने वाली कैलोरी की अपेक्षा कम कैलोरी ग्रहण करें |

1 माह में कितना वजन कम किया जा सकता है ?

प्रशिक्षित डॉक्टर और डाइटिशियन मानते हैं कि प्रति माह 3 से 4 किलोग्राम वज़न कम करना स्वास्थ्य की दृष्टी से उचित है | इससे अधिक वजन कम करना निश्चित रूप से संभव है, हालाँकि ये बात अलग है कि यह स्वास्थ्य की दृष्टी से सही है या नहीं | जिसके हम आपको सेल्हा भी नहीं देंगे |

2. वज़न घटाने के लिए कितनी कैलोरी को जलाएं ?

एक किलो में 1700 कैलोरी होती है | इसका मतलब है कि आपको एक किलो वज़न कम करने के लिए दिन में ली जाने वाली कैलोरी की अपेक्षा 1700 से अधिक कैलोरी को जलाने की ज़रूरत है |

3. वज़न कम करने का सही तरीका क्या है ?

मनुष्य कई भिन्न-भिन्न तरीकों से वज़न कम कर सकते हैं | इनमे मांसपेशियों की हानि, वसा की हानि, और पानी की हानि शामिल है | दो महीनों के दौरान आपकी आशा के अनुरूप कम होने वाला वज़न पानी की हानि होने से होता है और यह ठीक है | अगर आप अपनी स्वस्थ जीवनशैली के साथ नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या में शामिल करते हैं तो आप अपने लक्ष्य को हासिल करने में कामयाब हो सकेंगे

4. भोजन क्यों न छोड़ें ?

चूँकि एक सफल डाइटिंग की कुंजी है कि खर्च की जाने वाली कैलोरी से कम कैलोरी ग्रहण करें, इस तरीके में भोजन को छोड़ना शामिल नहीं किया गया है | भोजन छोड़ना भुखमरी प्रतिक्रिया का संभावित ट्रिगर है और अधिक लालच में आकर ठूस-ठूस कर खाना भी बंद करें |

5. क्या खाये ?

A. लीन प्रोटीन खाएं

उच्च प्रोटीन युक्त डाइट वज़न कम करने के लिए ज़रूरी होती है | अध्ययन दर्शाते हैं कि उच्च प्रोटीन डाइट के द्वारा कम कैलोरी खाने का पालन करने वाले प्रतियोगियों में अधिक संतोष देखा गया है और इस प्रकार की डाइट को शुरू करने से पहले की अपेक्षा वे अधिक संतुष्टि अनुभव करते हैं |

लीन मीट जैसे टर्की और चिकन ब्रैस्ट
मछली जैसे टूना
लीन डेरी जैसे स्किम मिल्क या कॉटेज चीज़ या कम वसा युक्त दही
सोया-प्रोडक्ट्स, जैसे टोफू
बीन्स और फलियाँ जैसे राजमा और दालें

B. साधारण कार्बोहायड्रेट के स्थान पर जटिल कार्बोहायड्रेट को प्राथमिकता दें

जटिल और साधारण कार्बोहायड्रेट में ज़मीन-आसमान का अंतर है | साधारण कार्बोहायड्रेट जैसे सफ़ेद ब्रेड, सोडा पॉप और कूकीज़ में एक साधारण केमिकल संरचना होती है जिसे हमारा शरीर अपेक्षाकृत जल्दी पचा लेता है; और अधिकतर इसकी अतिरिक्त मात्रा फैट या वसा के रूप में जमा हो जाती है |

जटिल कार्बोहायड्रेट जैसे

सफ़ेद ब्रेड के स्थान पर समग्र अनाज वाली ब्रेड चुनें
”सामान्य” पास्ता के स्थान पर समग्र अनाज वाला पास्ता चुनें
सफ़ेद चावल के स्थान पर ब्राउन राइस चुनें
स्टार्च से भरपूर आलू के स्थान पर सब्जियां जैसे ब्रोकॉली चुनें
शर्करा, सोडा और मिठाइयों के स्थान पर नट्स, बीन्स और फलियाँ चुनें

ये शरीर में लम्बे समय के बाद पचते हैं अर्थात् आपको लम्बे समय तक पेट के भरे होने की अनुभूति रहती है जिससे ये सम्भावना कम हो जाती है कि आपके द्वारा खाया जाने वाला कार्बोहायड्रेट फैट के रूप में जमा होगा |

C. स्वस्थ वसा चुनें:

सभी वसाओं (Fats) को नहीं छोड़ना चाहिए | व्यापक रूप से कहें तो, दो प्रकार के “स्वस्थ” फैट और दो प्रकार के “अस्वस्थ” फैट होते हैं | अपनी डाइट में कुछ स्वस्थ फैट का समावेश करने से वज़न कम करने पर भी आपको स्वस्थ रहने में मदद मिल सकती है |

“Polyunsaturated” को मनुष्य के लिए स्वस्थ फैट माना गया है और इन्हें सुरक्षित रूप से डाइट में शामिल किया जा सकता है |
Polyunsaturated फैट के उदाहरण में शामिल हैं – एवोकाडो, नट्स, ऑलिव और कद्दू के बीज | पोलीअनसैचुरेटेड फैट के उदाहरण हैं- ओमेगा-3 फैटी एसिड्स जैसे Salmon मछली और सन के बीज |

”Saturated” और Trans fats से बचें: ये फैट न केवल कोलेस्ट्रॉल स्तर के लिए बुरे हैं जिनसे आपको कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (cardiovascular dieases) होने की सम्भावना बढ़ जाती है, बल्कि इनसे कोई वास्तविक पोषण का लाभ भी नहीं मिलता है | जब आप डाइटिंग कर रहे हों तब विशेषरूप से इनसे दूर रहना चाहिए | सभी फ़ास्ट फ़ूड Saturated फैट के मुख्य श्रोते है |

Note : जब वज़न कम करने की बात आती है तो शाकाहारी बनने से बहुत लाभ मिलते हैं, इससे आपको स्वस्थ भोजन करने में मदद मिलेगी |

6. डाइटिंग करनी चाहिए ?

डाइटिंग करनी चाहिए | पर कुछ लोग डाइटिंग बनी विचार किये बिना किसी विशेषज्ञ की सेल्हा के खुद ही शुरू क़र देते है जिसके परिणाम बहुत हानि कारक हो सकते है | आप ऐसा न करे |
हर व्यक्ति का वेट लोस्स के लिए डाइट उनके शरीर के अनुसरे दे जाती है | इस लिए सभी डाइटिंग चार्ट एक जैस अनहि हो सकता | इसलिए आप डाइट एक्सपर्ट से सेल्हा लेकर अपने लिए उपयुक्त डाइट चार्ट त्यार करे, तभी आप स्वस्थ रूप से वजन घटा सकते है |

निरंतरता बनाये रखें:

निरंतरता बनाये रखना बहुत जरुरी है | सब्सि बड़ी कठनाई वजन घटने के लिए निरंतरता बनये रखना हे | निरंतरता बनये रखने के लिए प्रेरित रहना जरुरी है | प्रेरित रहने के लिए एक साप्ताहिक या मासिक लक्ष्य निर्धारित करें, और है अपना शरुआती लक्ष्ये बड़ा न रखे, शुरु में छोटे – छोटे लक्ष्य बनाये और उन्हें पूरी मेहनती से प्राप्त करे इस से आप की निरंतरता बनी रहेगी |

आयुर्वेदा को अपनाये –

अगर आप सही डाइट, योग और व्यायाम के साथ आयुर्वेदा इलाज को जोड़े लेंगे तो आपको वजन कम करने में काफी आसानी होगी | क्योकि आयुर्वेद में काफी साडी ऐसी जड़ीबूटियां जो Saturated फैट को आसानी से कम कर सकती है | में अशोक क्लिनिक से डॉ अशोक गुप्ता सालो से इन्ही जड़ीबूटियों ये लोगो की वजन घटाने में मदत करता आये हु |

अगर आप भी वजन घटाने चाहते है तो उपरोक्त दी सेल्हा को अवस्य अपनये |

हमारा आर्टिकल पढ़ने के लिए धन्यवाद | उम्मीद करता हु आपके जीवन में मेरी सलहा काम आये |

धन्यवाद

सुहागरात कैसे मनाएं (Suhagrat Kaise Manaye)

अधिकतर युवाओं में यह बहुत बड़ी उलझन रहती है कि सुहागरात कैसे मनाये. आज हम इसी विषय पर बात करेंगे.

पुरुष सुहागरात कैसे मनाये

पुरुष को चाहिए कि माहौल को सहज बनाने की कोशिश करें. इसलिए शुरुआत दोस्ती से की जाए तो बेहतर है. दोनों एक-दूसरे को बगैर स्पर्श किये, अपने विषय में कुछ रोमांटिक अंदाज में कहें. एक-दूसरे का स्वागत अपनी जिंदगी में करें. उनकी घबराहट को दूर करने में उनकी मदद करें.
शादी में क्या-क्या हुआ, इस पर चर्चा करें. उनकी की तारीफ़ करें. तारीफ़ के लिए कुछ शायरी याद कर लें तो और भी बेहतर है. दोस्ताना प्रतिक्रिया मिलने पर उनका हाथ पकड़ें. आप दोनों की जिंदगी की यह पहली सुहागरात है, इस रात को धीरे-धीरे आगे बढ़ने दें.
याद रखे ये पल जो इस वक्त गुजर रहे हैं, वो फिर कभी नहीं मिलेंगे, और इसका परभाव सारि उम्र रहनेवाला है. इसलिए सलीके से पेश आएं.

महत्वपुर्ण जानकारी
ऐसा जरूरी नहीं है कि इस खास रात में शारीरिक संबंध कायम किया जाए. यह तभी करें जब आपकी नयी-नवेली दुल्हन इसके लिए खुद तैयार हों, इसके लिए ज़ोर-ज़बरदस्ती करना ठीक नहीं होगा. यह रात दो जिन्द्कियो के मिलन की रात है इसमें शारीरक मिलान आवश्यक नहीं है. आवश्यक यह है की आप अपने जीवन साथी से दोस्ती करें. उसके बाद दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में खुद ही बदल जायेगी. प्यार होने के बाद के मिलन का मज़ा ही अलग है.

लड़किया सुहागरात कैसे मनाएं

अगर आपकी शादी आपकी मर्जी से हुई है
आपकी शादी अगर आपकी मर्जी से हुई है तब तो आपको घबराहट नहीं होनी चाहिए. इस शादी के लिए आपकी सहमति थी तब तो आप खुश होंगे अगर अपनी पास्ट अभी तक शेयर नहीं कीं हैं तो अभी मत कीजिये. अपने रिश्ते को पहले समय दे समझें. अपने साथी को पहले अच्छी तरह जान लें. रिश्तों में गहराई आने के बाद ही कुछ कहें. फिलहाल इस रात को यादगार बनने दें. इस रात में आप भी सपोर्ट करें, ध्यान रखें कि सुहागरात में शब्दों से अधिक बॉडी लैंग्वेज बोलती हैं. आप भले ही अपने उनको पहले से जानती हों, फिर भी मन में एक झिझक होगी. जब आप उन्हें जानती थी तब एक लड़की थी, लेकिन अब आप एक दुल्हन हैं.

यदि आपकी शादी अरैंजड है
अगर आप एक-दूसरे से बिल्कुल अंजान हैं. शादी से पहले आप उनसे कभी नहीं मिली हैं तो मन में एक डर होगा. सबसे पहले तो इस डर को निकाल फेंकें. हमें पता है कि इस डर को निकालना आसान नहीं है. फिरभी आपको मन से स्ट्रांग बनना ही होगा. आप इस वक्त जिनके साथ में हैं वो कोई और नहीं आपके जीवन साथी हैं. इस सच को स्वीकार कर लें कि आपकी पूरी ज़िन्दगी अब उनके साथ ही गुजरने वाली हैं. उनकी ज़िन्दगी भी अब आपके नाम हो चुकी है. सुहागरात की इस विशेष रात में पास्ट की फिक्र बिल्कुल भी ना करें. हो सकता है शादी से पहले आपकी शारीरिक सम्बन्ध बन चुके हों. फिर भी घबराने की कोई जरूरत नहीं. अपने मन से इस डर को निकाल फेंकें कि आप पकड़ी जाएंगी. एक बात ध्यान रखें कि वर्जिनिटी की कोई पहचान नहीं होती.

 

सुहागरात में कमरा कैसे सजाये

नए जोड़े की जिंदगी की खास रात होती है सुहागरात. इस रात को यादगार और रंगीन बनाने के लिए कमरे की सजावट का खूबसूरत होना जरूरी है. आप दोनों की जिंदगी को रंगीन और खुशबूदार बनाने के लिए अपने कमरे में विशेष प्रकार के रंग और खुशबू का प्रयोग करें. फूलों से महकते हुए खूबसूरत कमरे में आपका मूड रोमांटिक हो जाएगा. फूलों से सजा कमरा नव दंपत्ति को एक-दूसरे के करीब लाने में मदद करेगा. इसलिए ताजे गुलाब, मोगरा, रातरानी, जूही आदि फूलों से सेज सजाएं. इस खास रात के लिए स्पंज या फोम वाला बिस्तर हो तो बेहतर है, इससे आप दोनों आनंदित महसूस करेंगे.

 

सुहागरात में सावधानी

सुहागरात में जल्दबाजी से बचे – आमतौर पर नवविवाहित जोड़े जल्दबाजी और उत्तेजना की वजह से उस सुख से वंचित रह जाते हैं.
सुहागरात में नशे से बचें – सुहागरात में सिर्फ सुहागरात का आनंद लें. नशा इंसान के मानसिक स्थिति का क्या हाल करता है आप जानते हैं. हो सकता है आपके साथी को नशा नापसंद हो. इस से आपकी सुहागरात खराब हो जायगी.
कंडोम का इस्तेमाल – कंडोम का इस्तेमाल करना न भूलें.
जबजस्ती न करे – अंतिम और महत्वपूर्ण सेल्हा आपकी लिए यही है की अगर महिला सम्भोग के लिए अभी त्यार नहीं है तो जबरजस्ती न करे.

हम आशा करते है इस जानकरी से आप अपनी सुहागरात यादगार बनायेंगे.
धनयवाद
Dr Ashok Gupta

रोमांटिक पलों में पति को न करें नाराज


रात के दस बज रहे थे। रोमा और नवीन बेडरूम में बैठे-बैठे एक-दूसरे को देख रहे थे। छेड़छाड़ भी शुरू थी। माहौल ध्ीरे-ध्ीरे रंगीन होता जा रहा था। ऐसे में नवीन ने रोमा से एक गिलास पानी मांगा। रोमा ने मना कर दिया-‘तुम खुद उठकर पानी ले लो। इतना-सा भी अपना काम नहीं कर सकते?’
नवीन का चेहरा उतर गया। चुलबुली और हसीन लगने वाली रोमा खराब लगने लगी। छेड़छाड़ बंद हो गई। माहौल बदरंग और बोझिल हो गया। नवीन ने उठकर पानी पिया और चुपचाप सो गया।
सेक्स शब्दों का खेल है। बहुत कम ही दंपत्ति इस बात को जानते हैं। वे समझते हैं कि सामाजिक एवं कानूनी रूप से वे एक-दूसरे के पति-पत्नी हैं तो किन्हीं भी हालातों में सेक्स का आनंद ले सकते हैं, लेकिन उनका यह सोचना गलत है क्योंकि हालात अनुकूल और हसीन न होने पर दूरियां बढ़ जाती हैं, मन में खटास पसर जाती है और उत्तेजनाएं ठंडी पड़ जाती हैं। पति-पत्नी एक-दूसरे के लिए सुलभ नहीं रह जाते हैं।
किसी भी चीज के लिए सापफ मना कर देना एक तरह का निगेटिव संदेश है। पति जब कोई चीज मांगता है और पत्नी दो टूक शब्दों में यह कह देती है कि तुम इतना भी नहीं कर सकते या मैं नहीं कर सकती, स्वयं उठकर कर लो तब पति को करंट-सा छू जाता है। वह अंदर ही अंदर गुस्से से सुलग उठता है और पत्नी के प्रति उसके मन में जो भी कोमल भाव होते हैं, वे मिट जाते हैं। उनके स्थान पर पत्नी के लिए नपफरत पैदा हो जाती है। यह नपफरत पति के मन से सेक्स को धे-पोंछकर सापफ कर देती है।
मना करना एक अवगुण है, बुराई है और व्यक्ति की सबसे खतरनाक हैबिट है। बहुतों को आदत होती है छोटी-छोटी सी बात पर भी ‘ना’ कहने की। वे तो स्वभाववश मना कर देते हैं और सामने वाला अगले पल ही डिस्टर्ब हो जाता है। उसका दिल टूट जाता है। रोमांस और प्यार के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। जहां रोमांस नहीं… प्यार नहीं, वहां भला सेक्स का क्या काम?
इतना तो आप समझ ही लीजिए-पति को बात-बात पर मना करने की आदत सेक्सुअल लाइपफ के लिए किसी भी दृष्टि से लाभप्रद नहीं है। रोमा और नवीन के बेडरूम का माहौल बिलकुल ही हसीन था। वे एक-दूसरे को छेड़ भी रहे थे और ध्ीरे-ध्ीरे तन एवं मन से एक-दूसरे के करीब आते भी जा रहे थे। जब नवीन ने अचानक एक गिलास पानी मांग लिया और रोमा ने झट से पानी लाने से मना कर दिया, तो बात बिगड़ गई। नवीन का चेहरा उतर गया। मन में गुस्सा भर गया। रोमा उच्छृंखल और मुंहपफट लगने लगी। रंगीन माहौल को बदरंग रोमा के चंद शब्दों ने बना दिया। जो नवीन उसके तन की खूशबू से मदहोश उसको अपनी बांहों में भरने के लिए लालायित था, वह नवीन अब उससे ईष्र्या करने लगा।
इतनी जल्दी इतना बड़ा परिवर्तन किसने किया…?रोमा के शब्दों ने ही तो किया। अपने पार्टनर को किसी भी बात के लिए जल्दी मना न करें और यदि मना करना जरूरी ही हो तो मौके की नजाकत को समझें। रोमा ने समय और स्थान का ध्यान नहीं रखा। रात का समय था। दोनों एक-दूसरे में डूबने के लिए मूड बना रहे थे। नवीन ने पानी मांगा और रोमा ने मना कर दिया। अगर रोमा ने बेडरूम के हसीन माहौल और मूड को देखते हुए पानी लाकर नवीन को दे दिया होता तो पिफर उनके बीच और नजदीकियां बढ़ गई होतीं। नवीन का मूड खराब नहीं हुआ होता।
कुछ शब्द जीवन से जोड़ दिए जाएं तो लाइपफ अपने आप ही रोमांटिक बन जाती है और कुछ शब्द ऐसे भी हैं जो जीवन से जुड़ जाएं तो लाइपफ नरक बन जाती है। जीवन को रोमांटिक और सेक्सी बनाने वाले शब्द हैं-‘जैसा तुम सोचते हो वैसा ही मैं भी सोचती हूं’ या ‘तुम होते हो तो सब कुछ अच्छा लगता है और नहीं होते हो तो जीवन नीरस सा हो जाता है।’
आपको शायद नहीं पता, शब्दों में उफर्जा का प्रवाह निरंतर होता रहता है। मन को सूट करने वाले शब्दों से पाॅजिटिव उफर्जा प्रवाहित होती है और वह पार्टनर के मूड को आशिकाना बनाती है। जो शब्द मन को नहीं भाते हैं, वे निगेटिव उफर्जा से भरे हुए होते हैं और पार्टनर का अच्छा-खासा मूड भी इनसे बिगड़ जाता है।
जब आपका पार्टनर आपसे किसी चीज की उम्मीद करता है और आप स्वभाववश बड़ी लापरवाही के साथ मना कर देती हैं तो वह निराशा से भर जाता है। वह सोचने लगता है, आप के साथ दिल लगाकर उसने गलती की है। आप तो हर पल दिल तोड़ने वाली बातें करना जानती हंै। पिफर वह मानसिक तौर पर आपसे कटने लगता है। आपकी बातों को नजरअंदाज करने लगता है। आप कितना भी उसे विश्वास दिलाती हैं, लेकिन वह आपके लिए सहज नहीं बन पाता है और जो पार्टनर अपनी पत्नी के प्रति सहज नहीं होता, वह सेक्स को भी कोई अंजाम नहीं दे पाता है। रोमा जीवन के प्रति सहज न रही तो उसने कहां सेक्स को अंजाम दिया। बेहतर सेक्स जीवन के लिए आंखों में अपने जीवनसाथी के प्रति शर्म का होना जरूरी है। पति ने कहा कि चलो आज नाश्ते में दलिया ही बना दो और पत्नी ने नाक चढ़ाते हुए कह दिया कि कौन इतना झंझट करेगा। आज तुम ब्रेड-मक्खन से ही नाश्ता कर लो। इस तरह का सुझाव देते हुए पति की इच्छा की अवहेलना करने वाली पत्नियों की कोई कमी नहीं है। पत्नी ने दलिया भी नहीं बनाया और उफपर से सुझाव भी दे दिया कि ब्रेड-मक्खन लाकर नाश्ता कर लो। यह ब्रेड-मक्खन पति की नहीं, पत्नी की पसंद है। अब ऐसे में क्या पति का मूड आॅपफ नहीं होगा?बात भी नहीं मानना और उफपर से अपनी पसंद भी थोप देना आपसी तालमेल को बिखेर कर रख देता है और जब आपसी तालमेल बिखर जाता है तब रोमांस भी नहीं रहता है और जब रोमांस नहीं होता है तब प्यार का सोता भी सूख जाता है और जब प्यार का सोता सूख जाता है तब सेक्स भी नहीं होता है।
‘हां’ कहना सीखिए, कोई चीज मांगने पर मना न कर लाकर देने की आदत डालिए। रोमांस, प्यार और सेक्स इन तीनों के ही संगम से जीवन सहज बना रहता है।

जब पति हो नेचुरल ब्यूटी का आशिक


इतनी गाढ़ी लिपस्टिक…! इससे क्या तुम्हारी खूबसूरती में चार चांद लग गए हैं?’ संदीप ने नाक-भौंह सिकोड़ते हुए कहा तो महिमा का चेहरा अचानक ही सपफेद पड़ गया। वह तो सज-संवरकर इतराती हुए उसके सामने आई थी कि वह उसकी खूबसूरती की प्रशंसा करेगा, लेकिन उसने तो उसके साज-शृंगार में कमी ही निकाल दी थी।
‘साज-शृंगार न करूं तब भी तो तुम चुप नहीं रहते। कोई-न-कोई कमेंट्स कर ही देते हो।’ महिमा यह कहते-कहते चुप हो गई।
‘मेरी बातों का बुरा मान गई?मैं तो तुम्हें यह बताना चाह रहा हूं कि इतना गाढ़ा और भड़कीला मेकअप तुम्हारी नेचुरल ब्यूटी को बिगाड़ सकता है और पिफर मैंने तो तुम्हें कभी तुम्हारी स्वाभाविक सुंदरता के साथ देखा ही नहीं। सुबह, दोपहर, शाम और रात में भी मेकअप की परतें तुम्हारे चेहरे पर चढ़ी रहती हैं।’ संदीप ने मुस्कराते हुए अपनी बात कही तो महिमा ने बुरा नहीं माना क्योंकि वह एक समझदार और कुशल व्यवहारों वाली महिला थी। वह बोली-‘तुम्हारा सुझाव मुझे अच्छा लगा। चलो इसी बहाने पता तो चला कि तुम्हें मेरी चिंता है और तुम मुझे चाहते भी हो। मेरी स्वाभाविक सुंदरता की पिफक्र भी तुम्हें है। मुझे यह अच्छी तरह से पता है, आदमी उसी को टोकता है, जिसे पसंद करता है। मैं आज से इतने भड़कीले मेकअप में नहीं रहूंगी और अपनी नेचुरल ब्यूटी की हिपफाजत तुम्हारे लिए जरूर करूंगी… मुझे नहीं पता था कि तुम स्वाभाविक सुंदरता के आशिक हो…’
संदीप के दिल में महिमा एक बार क्या उतरी दिन-प्रतिदिन उतरती ही चली गई। बदलाव जब अच्छे के लिए हों और मानसिक एवं शारीरिक दृष्टि से भी लाभप्रद हों तो पति-पत्नी को एक-दूसरे का सुझाव बुरा नहीं लगना चाहिए। महिमा जैसी सुलझी हुई महिलाएं आज बहुत कम हैं। पति की अच्छी सलाह को भी वे इसलिए मानने से इंकार कर देती हैं कि वह कोई सौंदर्य विशेषज्ञ तो नहीं है जो उसकी सलाह मानकर वे अपने साज-शृंगार में बदलाव लाएं। इसमें सौंदर्य विशेषज्ञ होने की क्या बात है। पत्नी के सजने-संवरने का मकसद पति की आंखों को अच्छा लगना होता है और जब पति को ही पत्नी अपने साज-शृंगार से रीझा नहीं पाती है तो पिफर उसका सजना-संवरना व्यर्थ ही तो माना जाएगा।
आप विचारों से परिपक्व और पढ़ी-लिखी महिला हैं। पति का कौन-सा सुुझाव आपके लिए पफायदेमंद है और कौन-सा सुझाव आपके लिए सही नहीं है, इतना तो आपको मालुम हो ही जाता है। जायज बातों को मानने से परहेज न करें और नाजायज बातों का विरोध् करने में कोई संकोच न करें। संदीप की शिकायत प्रासंगिक भी है और जायज भी है। भड़कीले और गाढ़े मेकअप के प्रयोग से वास्तविक सुंदरता दिखती नहीं है और समय के साथ-साथ वह नष्ट भी हो जाती है, पिफर आपका चेहरा मेकअप का मोहताज बन जाता है यानी बिना मेकअप के आप अच्छी नहीं लगती हैं। ऐसे में मेकअप करना आपकी मजबूरी बन जाता है। संदीप ने महिमा को इसी बात का बोध् कराया कि मेकअप पर निर्भर खूबसूरती किसी को ज्यादा देर तक लुभा नहीं पाती है। मेकअप उतरते ही उसका बेजान व भद्दा चेहरा सामने वाले के मन में उसके प्रति अरुचि-सी भर देता है। हम यहां यह भी नहीं कहना चाह रहे कि आप मेकअप करना बिलकुल ही छोड़ दें। मेकअप कीजिए, पर तब जब आप किसी खास अवसर के लिए सज-संवर रही हैं। कभी-कभार का मेकअप आपको एक नया लुक देता है और पति को आप अलग ही अंदाज और एक नई ही ब्यूटी में दिखती हैं, जो उसे आपके ही इर्द-गिर्द मंडराने के लिए मजबूर कर देता है। सिपर्फ पति ही पत्नी की ब्यूटी पर टीका-टिप्पणी नहीं करता है, पत्नी भी पति की पोशाक, शारीरिक बनावट और चेहरे के रख-रखाव पर कमेंट्स करती है।
रवीना ने आॅपिफस जाते वक्त पति को टोक दिया-‘कान तक कैसे बेतरतीब बाल पफैले पड़े हैं। पंद्रह दिन में नहीं तो महीने में एक बार तो कटिंग करवा लिया करो। दाढ़ी रोज बनाते हो लेकिन मूंछों का कोई ध्यान नहीं है। एकाध् जो सपफेद बाल हैं, उन्हें निकाल देते तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाता…’
रवीना के इस कमेंट्स पर विनय ने मुड़कर उसे देखा, पिफर कहा-‘नजर तो बड़ी दूर की रखती हो।’
‘लेकिन तुम तो नजर दूर की नहीं रखते… इतनी अच्छी पर्सनैलिटी का बेड़ा गर्क कर रखा है। मूंछों की देखभाल नहीं कर सकते हो तो उन्हें सापफ क्यों नहीं कर देते?’
‘यह तुम क्या कह रही हो, मूंछें मेरे चेहरे पर जंचती हैं…’ विनय ने कोई गुस्सा नहीं किया, बल्कि बैग रखकर पत्नी के सामने कुर्सी खींच कर बैठगया।
‘लेकिन इस समय तो होंठों के नीचे तक पफैली तुम्हारी मूंछें बिलकुल ही नहीं जम रही हैं। अपनी उम्र मत देखो… सिपर्फ यह देखो कि तुम्हारी पर्सनैलिटी पर क्या खिलता है।’ रवीना की बातों में दम था। आज का दौर भी स्मार्ट और खूबसूरत दिखने का है और जिसकी पर्सनैलिटी आकर्षक नहीं होती है, उसमें कोई खिंचाव भी नहीं होता है और पिफर वह किसी भी क्षेत्रा में उन्नति नहीं कर पाता है।
इस राज को जो पत्नियां जानती हैं, उन्हें युग का बोध् होता है, लेटेस्ट पफैशन का ज्ञान होता है और इन सबसे बढ़कर जो चीज उनमें होती है-वह पति के प्रति समर्पण का भाव है। मेरा पति समाज में सबको अच्छा लगे। उसे अपनी पर्सनैलिटी को लेकर किसी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े, पत्नी इस सोच के कारण ही अपने पति को टोकती है। अब यदि कोई पति इस सुझाव को गलत मान बैठे और उलटा-सुलटा बोलने लगे तो पिफर पत्नी टोकना ही छोड़ देती है और जब पत्नी पति को कोई सुझाव देना बंद कर देती है तो पिफर उसकी उसमें कोई रुचि भी नहीं रह जाती है। तब मन में यह भाव आ जाता है कि जब किसी को स्वयं में सुधर लाना ही नहीं है तो मैं अपना व्यर्थ में मूड क्यों खराब करूं। ऐसी स्थिति दांपत्य जीवन में नहीं आनी चाहिए। इससे विवाह का सारा आनंद ही कहीं लुप्त हो जाता है और उसमें कोई आकर्षण भी नहीं रह जाता है।
रवीना ने विनय के बालों व मूंछों पर कमेंट्स किए तो उसने कोई भी बहस नहीं की। उसने गुस्सा करने की बजाए पत्नी को सराहा और इन मूलभूत कमियों को दूर किया। पति-पत्नी एक-दूजे के लिए ही बने हुए होते हैं। इस रिश्ते में चाटुकारिता उतनी अच्छी नहीं होती है, जितनी आलोचनाएं कारगर साबित होती हैं। जो आपको अच्छा नहीं लग रहा है और ऐसा महसूस हो रहा है कि आपके जीवनसाथी का इससे भविष्य में नुकसान हो सकता है तो बेहिचक कह दीजिए। हो सकता है कुछ मिनटों के लिए आपकी सलाह उसे अच्छी न लगे, लेकिन वह जब इत्मीनान से इस पर चिंतन-मनन करेगा तो पिफर ध्न्यवाद सहित आपकी सलाह वह मानने के लिए तैयार हो जाएगा।
यादि रखिए, अच्छा सदा अच्छा ही होता है। उस पर कोई आंच नहीं आती है। आपने अपने जीवनसाथी के भले के लिए कोई कमेंट्स किए हंै तो देर-सवेर वह उन्हंे अवश्य ही अपनाएगा।

कितनी बदल सकती हैं आप पति को?

अमिता आज सुबह से ही राजन से नाराज थी। उसकी सारी जरूरतें पूरी कर रही थी, लेकिन राजन के प्रति उसके मन के किसी कोने में एक खीझ थी। राजन शाम को घर जैसे ही आया अमिता ने उसे पानी दिया और पिफर जाकर उसका बैग चेक करने लगी। सिगरेट की एक डिब्बी उसके हाथ लग गई। वह गुस्से से घूरती हुई बोल पड़ी-‘तुम जानना चाहते हो न कि मैं अचानक ही तुम पर नाराज क्यों हो जाती हूं?’
‘क्यों हो जाती हो, बताओ न?’ राजन ने भोलेपन से पूछा।
‘तुम सिगरेट पीना छोड़ दो। मैं तुम पर कभी भी नाराज नहीं होउफंगी। यह सिगरेट ही सारे पफसाद की जड़ है।’ अमिता एक सांस में ही बोल गई।
‘क्या-क्या मैं तुम्हें खुश रखने के लिए छोडन्ऩ्ं…?कल को कहोगी कि तुम टाइम से घर आना शुरू कर दो या पिफर मेरी बदतमीजियों को नजरअंदाज करना शुरू कर दो तो मैं नाराज नहीं होउफंगी।’ राजन के मन में जो आया बोल गया।
‘अब बातें मत बनाओ। तुम सिगरेट पीना छोड़ रहे हो या नहीं…?’
‘अच्छा बाबा, कोशिश करूंगा।’ कहकर राजन चुप हो गया।
सिगरेट अगले दिन से उसने छोड़ दी और गुटका पफांकने लगा। दो दिन तक तो अमिता कुछ नहीं बोली, तीसरे दिन उसने टोक ही दिया-‘एक गंदी लत छोड़ी तो दूसरी पकड़ ली?’ कहकर उसने बुरा-सा मुंह बना लिया।
राजन खीझ गया-‘तुम कभी मेरी खूबियों को भी तो देख लिया करो। मैं तुमसे कितना प्रेम करता हूं। तुम्हारा कितना ध्यान रखता हूं। तुम्हारे इशारे पर कैसे नाचता हूं। क्या इन सबका तुम्हें कभी अहसास नहीं हुआ?’
‘खराबियां खूबियों को ढक लेती हैं। पहले सिगरेट पीकर नाक में दम कर रखा था और अब गुटका खाकर परेशान कर रखा है।’ कहकर वह किचन में चली गई। राजन गुस्से से पफट पड़ा।
कल्पना लोक में जीने वाली पत्नी कभी भी पति से खुश नहीं रहती है। हर पत्नी की यह इच्छा होती है या सपना होता है कि उसका पति उसके सपनों के अनुकूल हो। उसमें ऐसी कोई भी लत न हो, जो उसे पसंद न हो। ऐसा संभव नहीं है क्योंकि व्यक्ति में खराबियां और खूबियां दोनों ही होती हैं और यह जरूरी नहीं कि पार्टनर उसके सपनों के इशारे पर ही नाचता पिफरे। खराबियों के साथ पति को स्वीकार करने में वहां दिक्कत होती हैं, जहां पत्नी के मन में निर्दोष और अवगुणहीन पति की कल्पना होती है। हम पहले ही बता चुके हैं कि कोई भी पति पत्नी के सपनों पर खरा नहीं उतर सकता है क्योंकि वह एक इंसान होता है, कोई भगवान नहीं होता है। लेकिन यहां दिक्कत यह है कि भारतीय पत्नी अपने पति को भगवान मानती है और भगवान जैसा ही अवगुणहीन उसे देखना पसंद करती है। जब उसका पति रुपी भगवान गुण और अवगुण का मिश्रण दिखता है तो उसे खीझ होती है। वह बार-बार उस पर बदलाव के लिए दबाव डालती है और जब पति उसके अनुसार नहीं, बल्कि अपनी सुविध के अनुसार स्वयं में बदलाव लाता है तो उसकी खीझ में और इजापफा ही होता है।
अमिता के साथ ऐसा ही तो हो रहा है। राजन को सिगरेट छोड़ने की हिदायत दी तो उसने गुटका खाना शुरू कर दिया। उसने स्वयं को बदला, लेकिन अपने हित-अहित को ध्यान में रखकर बदला। अमिता की परेशानी, नाराजगी और खीझ घटने की बजाए और बढ़ गई।
किसी को भी अपनी इच्छाओं के अनुसार बदला नहीं जा सकता है। अमिता ने राजन को कहां बदला?मामला और भी टेढ़ा हो गया। अमिता राजन को बदलने की जिद छोड़ दे और उसकी खूबियों को महसूस करना शुरू कर दे तो जिंदगी हसीन हो सकती है और जीने का तरीका भी यही है। जीने के दो-चार दिन ही तो होते हैं और उन्हें गंदी लतांे को छुड़ाने में ही गुजार दिया जाए तो पिफर ऐसे वैवाहिक-जीवन का क्या लाभ?पति गंदी लतों को नहीं छोड़ता है तो इसके लिए जीवन में कड़वाहट को मत घोलिए। अपने गिरेबान में भी झांक कर देखिए कि क्या आप में खराबियां नहीं हैं या आप ऐसी लतों की शिकार नहीं हैं, जो पति को दिक्कतों में डाल रही हैं या डाल सकती हैं। जब आप इस तरह से स्वयं का निरीक्षण करना शुरू कर देंगी तब आपको अपने पति में खुद-ब-खुद ही खूबियां नजर आनेे लगंेगी। पिफर आप उसे अपने आप के अनुकूल बदलने की बजाए उससे प्यार करने लगेंगी।
आप को जो चीज बुरी लगती है, हो सकता है, वह आपके पति को अच्छी लगती हो। सिगरेट आपको पसंद इसलिए नहीं है क्योंकि आपको पता है कि यह सेहत पर बुरा प्रभाव डालती है। इसी तरह से आप और भी चीजों के बारे में जानती हैं, लेकिन आप क्या करेंगी। इस संसार में तो हर चीज में कुछ-न-कुछ स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक तत्व हैं। आप लिपस्टिक लगाती हैं। पफेस पाउडर लगाती हैं। मस्कारा लगाती हैं। बालों को रंगती हंै। तरह-तरह के स्प्रे और परफ्रयूम का इस्तेमाल करती हैं क्या ये सब चीजें आपके स्वास्थ्य के लिए पफायदेमंद हैं?जीवन को इतनी बारीकियों से देखने वाले खुशियों के पलों से सदा ही महरूम रहते हैं। उन्हें जीवन का आनंद कभी नहीं मिल पाता है। उनकी जिंदगी डरी-डरी सी और थकी-थकी सी बनी रहती है। अब अमिता की जिंदगी क्या है। इतना प्यार करने वाला पति उसे मिला हुआ है, लेकिन वह उसे कभी सिगरेट पीने को लेकर तो कभी गुटका खाने को लेकर जली-कटी सुनाती ही रहती है। वह अमिता से तालमेल बिठाने की कोशिश में एक चीज छोड़कर दूसरी अपनाता है, पिफर भी गड़बड़ हो जाती है। ऐसे में वह दिशाहीन हो गया है। अब उसे अच्छे-बुरे का ज्ञान भी नहीं रह गया है। जब किसी पर जरूरत से ज्यादा बंदिशें लाद दी जाती हैं तब वह अच्छे-बुरे में अंतर करना भूल जाता है और उफब कर उसे कहना ही पड़ जाता है कि मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा। रहना है तो मेरे साथ रहो वर्ना मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो। ऐसी नौबत आप तो कम से कम न आने दें। अपने पार्टनर को खूबियों एवं खराबियों दोनों के साथ ही स्वीकार करें। जहां खूबियां होती हैं वहां खराबियां भी होती हैं, इन्हें जीवन से बिलकुल ही निकाला नहीं जा सकता है। क्या चीज अच्छी है और क्या चीज
जीवन के लिए बुरी है, इसमें भेद आप करने लगीं, तो पिफर दांपत्य
जीवन का सुख सूख सकता है। मीनमेख निकालने में समय बर्बाद न करें। यह जीवन जो मिला हुआ है, उसकी कोई गारंटी नहीं है कि कब कहां जाकर ठहर जाए।

ठिन है।

आप कितनी कुशल पत्नी हैं?

 

मटर-पनीर की सब्जी क्या ऐसे ही बनती है?’ अशोक ने नाक चढ़ाते हुए कहा। प्रतिमा उसके पास बैठती हुई बोली-‘आज अचानक मेरे हाथ की सब्जी तुम्हें खराब क्यों लगने लगी?’
‘एक दोस्त आज आॅपिफस में मटर-पनीर की सब्जी लेकर आया था। उसका स्वाद गजब का था। तुम स्वयं को हर मामले में बदलो।’
यह कहकर अशोक चुप लगा गया। प्रतिमा को पति की बातें पहले बुरी तो लगीं, लेकिन जब ठंडे दिमाग से सोचा तो उसे भी लगा कि समय के साथ-साथ बदलना जरूरी है। इससे जीवन में एकरसता नहीं आ पाती।
यहां सिपर्फ मटर-पनीर की सब्जी की बात नहीं है। समय हर चीज के स्वाद और रूप में नयापन ला देता है। कल की उपयोगी और अच्छी चीजें बढ़ते समय के साथ अनुपयोगी हो जाती हैं और उनमें नयापन लाने से वे चीजें आज के परिवेश के अनुकूल पिफर से तैयार हो जाती हैं।
परिवेश और समय को जो पत्नी पकड़ना जानती है या बदलाव में रुचि लेती है या पुरानी चीजों को छोड़कर नई चीजों को अपनाने की आदी होती है, उसका पति उसे भरपूर महत्व देता है। कोई भी कार्य करने से पहले उससे सलाह लेता है और उसकी सलाह को प्राथमिकता देता है, क्योंकि पति की नजर में ऐसी पत्नी बु(िमान और चतुर होती है।
पति पर आप हावी होना चाहती हैं तो उसको यह यकीन दिलाना बहुत जरूरी है कि बाहर-भीतर जो कुछ भी बदल रहा है, उसका ज्ञान आपको है। आपमें अगर यह विशेषता नहीं है, तो आपका पति की नजरों में एक पत्नी का दर्जा तो बना ही रहेगा, लेकिन आप कभी भी उसकी एक अच्छी सलाहकार एवं मित्रा नहीं बन सकती हैं।
पति की दोस्त बनिए… हमसपफर बनिए जैसे शब्द सुनने को मिल तो जाते हैं, लेकिन क्या आप इनका भावार्थ भी जानते हैं? शायद नहीं जानते हैं, इसीलिए दुनिया के अध्किांश पति-पत्नी एक-दूसरे के सलाहकार या मित्रा नहीं बन पाते हैं। मैत्राीभाव का दांपत्य जीवन में उत्पन्न होना बहुत आवश्यक है। जहां मैत्राी भाव जैसी बात होती है, वहां पत्नी किसी विषय को लेकर पति को टोकती है या पति पत्नी के किसी कार्य की आलोचना करता है तो बात बिगड़ती नहीं है, क्योंकि मित्राता से मन में एक दूसरे को बर्दाश्त करने का जज्बा पैदा होता है।
प्रतिमा के हाथ की बनी सब्जी में नुक्स पति ने निकाला तो प्रतिमा को बुरा तो लगा कि इतने सालों से मेरे हाथ की बनी सब्जी पति खाता आ रहा है और आज दोस्त की बीवी के हाथ की सब्जी क्या खा ली, मेरी सब्जी को बकवास और खराब कह डाला। लेकिन अगले ही पल प्रतिमा ने यह कबूल कर लिया कि अशोक ने वही कहा है, जो सच है। ऐसा प्रतिमा ने दांपत्य जीवन में मैत्राी भाव के कारण ही सोचा। अगर उनमें बढ़िया वैचारिक तालमेल नहीं होता, तो शायद ही प्रतिमा अशोक के कहने का मतलब इतने अच्छे ढंग से समझ पाती।
आलोचना, शिकायत या उपदेश जो कुछ भी कह लें वहीं कारगर साबित होते हैं, जहां पति-पत्नी में वैचारिक तौर पर मित्राता होती है।
मित्राता नहीं तो बर्दाश्त करने की भावना भी नहीं। कौन ऐसे कोई किसी को बर्दाश्त करता है और आज के परिवेश में तो बिलकुल ही नहीं।
सरिता बेडरूम से बाहर आई तो ड्राइंगरूम में बैठा आदेश अचानक ही चहक पड़ा-‘अरे! कोई दूसरी ड्रेस पहनी होती।’
‘अपनी पसंद अपने पास ही रखो। सलाह देने का इतना शौक है, तो जाकर किसी और को दो…’ सरिता ने शुष्क लहजे में इन शब्दों को कहा।
आदेश चिढ़ गया। ईष्र्या और नपफरत सी उसके मन में उत्पन्न हो गई। पत्नी ने पति केे कमेंट्स को समझा नहीं, उफपर से खरी-खोटी भी सुना दी। पति-पत्नी के बीच जब भी एक-दूसरे को सुनने या सहने की प्रवृत्ति न हो तो समझिए वे सिपर्फ पति-पत्नी हैं, हमसपफर या मित्रा नहीं। आज कितने पति-पत्नी हमसपफर या मित्रा हैं।
टोकना भी दो तरह का होता है-एक तो वह, जो साथी को कुशल और एजुकेट करने के लिए टोका जाता है और दसूरा वह जो नीचा दिखाने के लिए प्वाइंट आउट किया जाता है। पति अगर पत्नी को आज के परिवेश के लिहाज से समझाता है और नई एवं बदली हुई चीजों का ज्ञान समय-समय पर उसे कराता रहता है तो पत्नी को कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए क्योंकि पति अपने साथ पत्नी को भी समय के साथ आगे बढ़ते हुए देखना पसंद करता है। ओल्ड, बासी, ठंडी, रुढ़िवादी आदि शब्द उन पत्नियों के लिए प्रयोग किए जाते हैं, जो नयेपन को पकड़ने में अपनी बेइज्जती समझती हैं और पति की ऐसी किसी भी सीख को नजरअंदाज कर देती हैं। पति का झगड़ा भी ऐसी पत्नी से ही होता है। नयेपन, आकर्षण, बदलाव और खूबसूरती को नकारना तथा अपनी जिद पर अड़े रहना या रुढ़िगत परंपराओं की दुहाई देकर पति की किसी भी तरह की बात को न मानना परस्पर मित्राता नहीं, दुश्मनी पैदा करता है। आज उन पति-पत्नियों के बीच खासकर मैत्राीभाव नहीं हैं, जो हमेशा निगेटिव ही बोलते हैं। यह काम तुम्हारे वश का नहीं है, अगर कहा नहीं मानोगे तो मुंह के बल गिरोगे, तुम्हारे वश का नहीं है अच्छा और स्वादिष्ट खाना बनाना आदि वाक्य पति-पत्नी दोनों के ही मन में खीझ पैदा करते हैं
और ऐसी सोच तभी पैदा होती है या एक-दूसरे के प्रति ऐसे
नकारात्मक शब्द तभी निकलते हैं जब मन में दूरियां हों, बदले की भावना हो, जलन और ईष्र्या हो। इस तरह की सोच आज के आधुनिक परिवेश की देन है, जहां पति-पत्नी सुशिक्षित होकर भी तलाक की मार झेल रहे हैं, अलगाव का विषपान कर रहे हैं और साथ रहकर भी साथ न होने की पीड़ा को झेल रहे हैं। मित्रा बनिए, दांपत्य जीवन को सुखमय संभावनाओं से भर दीजिए।