जब पति हो नेचुरल ब्यूटी का आशिक


इतनी गाढ़ी लिपस्टिक…! इससे क्या तुम्हारी खूबसूरती में चार चांद लग गए हैं?’ संदीप ने नाक-भौंह सिकोड़ते हुए कहा तो महिमा का चेहरा अचानक ही सपफेद पड़ गया। वह तो सज-संवरकर इतराती हुए उसके सामने आई थी कि वह उसकी खूबसूरती की प्रशंसा करेगा, लेकिन उसने तो उसके साज-शृंगार में कमी ही निकाल दी थी।
‘साज-शृंगार न करूं तब भी तो तुम चुप नहीं रहते। कोई-न-कोई कमेंट्स कर ही देते हो।’ महिमा यह कहते-कहते चुप हो गई।
‘मेरी बातों का बुरा मान गई?मैं तो तुम्हें यह बताना चाह रहा हूं कि इतना गाढ़ा और भड़कीला मेकअप तुम्हारी नेचुरल ब्यूटी को बिगाड़ सकता है और पिफर मैंने तो तुम्हें कभी तुम्हारी स्वाभाविक सुंदरता के साथ देखा ही नहीं। सुबह, दोपहर, शाम और रात में भी मेकअप की परतें तुम्हारे चेहरे पर चढ़ी रहती हैं।’ संदीप ने मुस्कराते हुए अपनी बात कही तो महिमा ने बुरा नहीं माना क्योंकि वह एक समझदार और कुशल व्यवहारों वाली महिला थी। वह बोली-‘तुम्हारा सुझाव मुझे अच्छा लगा। चलो इसी बहाने पता तो चला कि तुम्हें मेरी चिंता है और तुम मुझे चाहते भी हो। मेरी स्वाभाविक सुंदरता की पिफक्र भी तुम्हें है। मुझे यह अच्छी तरह से पता है, आदमी उसी को टोकता है, जिसे पसंद करता है। मैं आज से इतने भड़कीले मेकअप में नहीं रहूंगी और अपनी नेचुरल ब्यूटी की हिपफाजत तुम्हारे लिए जरूर करूंगी… मुझे नहीं पता था कि तुम स्वाभाविक सुंदरता के आशिक हो…’
संदीप के दिल में महिमा एक बार क्या उतरी दिन-प्रतिदिन उतरती ही चली गई। बदलाव जब अच्छे के लिए हों और मानसिक एवं शारीरिक दृष्टि से भी लाभप्रद हों तो पति-पत्नी को एक-दूसरे का सुझाव बुरा नहीं लगना चाहिए। महिमा जैसी सुलझी हुई महिलाएं आज बहुत कम हैं। पति की अच्छी सलाह को भी वे इसलिए मानने से इंकार कर देती हैं कि वह कोई सौंदर्य विशेषज्ञ तो नहीं है जो उसकी सलाह मानकर वे अपने साज-शृंगार में बदलाव लाएं। इसमें सौंदर्य विशेषज्ञ होने की क्या बात है। पत्नी के सजने-संवरने का मकसद पति की आंखों को अच्छा लगना होता है और जब पति को ही पत्नी अपने साज-शृंगार से रीझा नहीं पाती है तो पिफर उसका सजना-संवरना व्यर्थ ही तो माना जाएगा।
आप विचारों से परिपक्व और पढ़ी-लिखी महिला हैं। पति का कौन-सा सुुझाव आपके लिए पफायदेमंद है और कौन-सा सुझाव आपके लिए सही नहीं है, इतना तो आपको मालुम हो ही जाता है। जायज बातों को मानने से परहेज न करें और नाजायज बातों का विरोध् करने में कोई संकोच न करें। संदीप की शिकायत प्रासंगिक भी है और जायज भी है। भड़कीले और गाढ़े मेकअप के प्रयोग से वास्तविक सुंदरता दिखती नहीं है और समय के साथ-साथ वह नष्ट भी हो जाती है, पिफर आपका चेहरा मेकअप का मोहताज बन जाता है यानी बिना मेकअप के आप अच्छी नहीं लगती हैं। ऐसे में मेकअप करना आपकी मजबूरी बन जाता है। संदीप ने महिमा को इसी बात का बोध् कराया कि मेकअप पर निर्भर खूबसूरती किसी को ज्यादा देर तक लुभा नहीं पाती है। मेकअप उतरते ही उसका बेजान व भद्दा चेहरा सामने वाले के मन में उसके प्रति अरुचि-सी भर देता है। हम यहां यह भी नहीं कहना चाह रहे कि आप मेकअप करना बिलकुल ही छोड़ दें। मेकअप कीजिए, पर तब जब आप किसी खास अवसर के लिए सज-संवर रही हैं। कभी-कभार का मेकअप आपको एक नया लुक देता है और पति को आप अलग ही अंदाज और एक नई ही ब्यूटी में दिखती हैं, जो उसे आपके ही इर्द-गिर्द मंडराने के लिए मजबूर कर देता है। सिपर्फ पति ही पत्नी की ब्यूटी पर टीका-टिप्पणी नहीं करता है, पत्नी भी पति की पोशाक, शारीरिक बनावट और चेहरे के रख-रखाव पर कमेंट्स करती है।
रवीना ने आॅपिफस जाते वक्त पति को टोक दिया-‘कान तक कैसे बेतरतीब बाल पफैले पड़े हैं। पंद्रह दिन में नहीं तो महीने में एक बार तो कटिंग करवा लिया करो। दाढ़ी रोज बनाते हो लेकिन मूंछों का कोई ध्यान नहीं है। एकाध् जो सपफेद बाल हैं, उन्हें निकाल देते तो तुम्हारा क्या बिगड़ जाता…’
रवीना के इस कमेंट्स पर विनय ने मुड़कर उसे देखा, पिफर कहा-‘नजर तो बड़ी दूर की रखती हो।’
‘लेकिन तुम तो नजर दूर की नहीं रखते… इतनी अच्छी पर्सनैलिटी का बेड़ा गर्क कर रखा है। मूंछों की देखभाल नहीं कर सकते हो तो उन्हें सापफ क्यों नहीं कर देते?’
‘यह तुम क्या कह रही हो, मूंछें मेरे चेहरे पर जंचती हैं…’ विनय ने कोई गुस्सा नहीं किया, बल्कि बैग रखकर पत्नी के सामने कुर्सी खींच कर बैठ गया।
‘लेकिन इस समय तो होंठों के नीचे तक पफैली तुम्हारी मूंछें बिलकुल ही नहीं जम रही हैं। अपनी उम्र मत देखो… सिपर्फ यह देखो कि तुम्हारी पर्सनैलिटी पर क्या खिलता है।’ रवीना की बातों में दम था। आज का दौर भी स्मार्ट और खूबसूरत दिखने का है और जिसकी पर्सनैलिटी आकर्षक नहीं होती है, उसमें कोई खिंचाव भी नहीं होता है और पिफर वह किसी भी क्षेत्रा में उन्नति नहीं कर पाता है।
इस राज को जो पत्नियां जानती हैं, उन्हें युग का बोध् होता है, लेटेस्ट पफैशन का ज्ञान होता है और इन सबसे बढ़कर जो चीज उनमें होती है-वह पति के प्रति समर्पण का भाव है। मेरा पति समाज में सबको अच्छा लगे। उसे अपनी पर्सनैलिटी को लेकर किसी के सामने शर्मिंदा न होना पड़े, पत्नी इस सोच के कारण ही अपने पति को टोकती है। अब यदि कोई पति इस सुझाव को गलत मान बैठे और उलटा-सुलटा बोलने लगे तो पिफर पत्नी टोकना ही छोड़ देती है और जब पत्नी पति को कोई सुझाव देना बंद कर देती है तो पिफर उसकी उसमें कोई रुचि भी नहीं रह जाती है। तब मन में यह भाव आ जाता है कि जब किसी को स्वयं में सुधर लाना ही नहीं है तो मैं अपना व्यर्थ में मूड क्यों खराब करूं। ऐसी स्थिति दांपत्य जीवन में नहीं आनी चाहिए। इससे विवाह का सारा आनंद ही कहीं लुप्त हो जाता है और उसमें कोई आकर्षण भी नहीं रह जाता है।
रवीना ने विनय के बालों व मूंछों पर कमेंट्स किए तो उसने कोई भी बहस नहीं की। उसने गुस्सा करने की बजाए पत्नी को सराहा और इन मूलभूत कमियों को दूर किया। पति-पत्नी एक-दूजे के लिए ही बने हुए होते हैं। इस रिश्ते में चाटुकारिता उतनी अच्छी नहीं होती है, जितनी आलोचनाएं कारगर साबित होती हैं। जो आपको अच्छा नहीं लग रहा है और ऐसा महसूस हो रहा है कि आपके जीवनसाथी का इससे भविष्य में नुकसान हो सकता है तो बेहिचक कह दीजिए। हो सकता है कुछ मिनटों के लिए आपकी सलाह उसे अच्छी न लगे, लेकिन वह जब इत्मीनान से इस पर चिंतन-मनन करेगा तो पिफर ध्न्यवाद सहित आपकी सलाह वह मानने के लिए तैयार हो जाएगा।
यादि रखिए, अच्छा सदा अच्छा ही होता है। उस पर कोई आंच नहीं आती है। आपने अपने जीवनसाथी के भले के लिए कोई कमेंट्स किए हंै तो देर-सवेर वह उन्हंे अवश्य ही अपनाएगा।

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