कितनी बदल सकती हैं आप पति को?

अमिता आज सुबह से ही राजन से नाराज थी। उसकी सारी जरूरतें पूरी कर रही थी, लेकिन राजन के प्रति उसके मन के किसी कोने में एक खीझ थी। राजन शाम को घर जैसे ही आया अमिता ने उसे पानी दिया और पिफर जाकर उसका बैग चेक करने लगी। सिगरेट की एक डिब्बी उसके हाथ लग गई। वह गुस्से से घूरती हुई बोल पड़ी-‘तुम जानना चाहते हो न कि मैं अचानक ही तुम पर नाराज क्यों हो जाती हूं?’
‘क्यों हो जाती हो, बताओ न?’ राजन ने भोलेपन से पूछा।
‘तुम सिगरेट पीना छोड़ दो। मैं तुम पर कभी भी नाराज नहीं होउफंगी। यह सिगरेट ही सारे पफसाद की जड़ है।’ अमिता एक सांस में ही बोल गई।
‘क्या-क्या मैं तुम्हें खुश रखने के लिए छोडन्ऩ्ं…?कल को कहोगी कि तुम टाइम से घर आना शुरू कर दो या पिफर मेरी बदतमीजियों को नजरअंदाज करना शुरू कर दो तो मैं नाराज नहीं होउफंगी।’ राजन के मन में जो आया बोल गया।
‘अब बातें मत बनाओ। तुम सिगरेट पीना छोड़ रहे हो या नहीं…?’
‘अच्छा बाबा, कोशिश करूंगा।’ कहकर राजन चुप हो गया।
सिगरेट अगले दिन से उसने छोड़ दी और गुटका पफांकने लगा। दो दिन तक तो अमिता कुछ नहीं बोली, तीसरे दिन उसने टोक ही दिया-‘एक गंदी लत छोड़ी तो दूसरी पकड़ ली?’ कहकर उसने बुरा-सा मुंह बना लिया।
राजन खीझ गया-‘तुम कभी मेरी खूबियों को भी तो देख लिया करो। मैं तुमसे कितना प्रेम करता हूं। तुम्हारा कितना ध्यान रखता हूं। तुम्हारे इशारे पर कैसे नाचता हूं। क्या इन सबका तुम्हें कभी अहसास नहीं हुआ?’
‘खराबियां खूबियों को ढक लेती हैं। पहले सिगरेट पीकर नाक में दम कर रखा था और अब गुटका खाकर परेशान कर रखा है।’ कहकर वह किचन में चली गई। राजन गुस्से से पफट पड़ा।
कल्पना लोक में जीने वाली पत्नी कभी भी पति से खुश नहीं रहती है। हर पत्नी की यह इच्छा होती है या सपना होता है कि उसका पति उसके सपनों के अनुकूल हो। उसमें ऐसी कोई भी लत न हो, जो उसे पसंद न हो। ऐसा संभव नहीं है क्योंकि व्यक्ति में खराबियां और खूबियां दोनों ही होती हैं और यह जरूरी नहीं कि पार्टनर उसके सपनों के इशारे पर ही नाचता पिफरे। खराबियों के साथ पति को स्वीकार करने में वहां दिक्कत होती हैं, जहां पत्नी के मन में निर्दोष और अवगुणहीन पति की कल्पना होती है। हम पहले ही बता चुके हैं कि कोई भी पति पत्नी के सपनों पर खरा नहीं उतर सकता है क्योंकि वह एक इंसान होता है, कोई भगवान नहीं होता है। लेकिन यहां दिक्कत यह है कि भारतीय पत्नी अपने पति को भगवान मानती है और भगवान जैसा ही अवगुणहीन उसे देखना पसंद करती है। जब उसका पति रुपी भगवान गुण और अवगुण का मिश्रण दिखता है तो उसे खीझ होती है। वह बार-बार उस पर बदलाव के लिए दबाव डालती है और जब पति उसके अनुसार नहीं, बल्कि अपनी सुविध के अनुसार स्वयं में बदलाव लाता है तो उसकी खीझ में और इजापफा ही होता है।
अमिता के साथ ऐसा ही तो हो रहा है। राजन को सिगरेट छोड़ने की हिदायत दी तो उसने गुटका खाना शुरू कर दिया। उसने स्वयं को बदला, लेकिन अपने हित-अहित को ध्यान में रखकर बदला। अमिता की परेशानी, नाराजगी और खीझ घटने की बजाए और बढ़ गई।
किसी को भी अपनी इच्छाओं के अनुसार बदला नहीं जा सकता है। अमिता ने  राजन को कहां बदला?मामला और भी टेढ़ा हो गया। अमिता राजन को बदलने की जिद छोड़ दे और उसकी खूबियों को महसूस करना शुरू कर दे तो जिंदगी हसीन हो सकती है और जीने का तरीका भी यही है। जीने के दो-चार दिन ही तो होते हैं और उन्हें गंदी लतांे को छुड़ाने में ही गुजार दिया जाए तो पिफर ऐसे वैवाहिक-जीवन का क्या लाभ?पति गंदी लतों को नहीं छोड़ता है तो इसके लिए जीवन में कड़वाहट को मत घोलिए। अपने गिरेबान में भी झांक कर देखिए कि क्या आप में खराबियां नहीं हैं या आप ऐसी लतों की शिकार नहीं हैं, जो पति को दिक्कतों में डाल रही हैं या डाल सकती हैं। जब आप इस तरह से स्वयं का निरीक्षण करना शुरू कर देंगी तब आपको अपने पति में खुद-ब-खुद ही खूबियां नजर आनेे लगंेगी। पिफर आप उसे अपने आप के अनुकूल बदलने की बजाए उससे प्यार करने लगेंगी।
आप को जो चीज बुरी लगती है, हो सकता है, वह आपके पति को अच्छी लगती हो। सिगरेट आपको पसंद इसलिए नहीं है क्योंकि आपको पता है कि यह सेहत पर बुरा प्रभाव डालती है। इसी तरह से आप और भी चीजों के बारे में जानती हैं, लेकिन आप क्या करेंगी। इस संसार में तो हर चीज में कुछ-न-कुछ स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक तत्व हैं। आप लिपस्टिक लगाती हैं। पफेस पाउडर लगाती हैं। मस्कारा लगाती हैं। बालों को रंगती हंै। तरह-तरह के स्प्रे और परफ्रयूम का इस्तेमाल करती हैं क्या ये सब चीजें आपके स्वास्थ्य के लिए पफायदेमंद हैं?जीवन को इतनी बारीकियों से देखने वाले खुशियों के पलों से सदा ही महरूम रहते हैं। उन्हें जीवन का आनंद कभी नहीं मिल पाता है। उनकी जिंदगी डरी-डरी सी और थकी-थकी सी बनी रहती है। अब अमिता की जिंदगी क्या है। इतना प्यार करने वाला पति उसे मिला हुआ है, लेकिन वह उसे कभी सिगरेट पीने को लेकर तो कभी गुटका खाने को लेकर जली-कटी सुनाती ही रहती है। वह अमिता से तालमेल बिठाने की कोशिश में एक चीज छोड़कर दूसरी अपनाता है, पिफर भी गड़बड़ हो जाती है। ऐसे में वह दिशाहीन हो गया है। अब उसे अच्छे-बुरे का ज्ञान भी नहीं रह गया है। जब किसी पर जरूरत से ज्यादा बंदिशें लाद दी जाती हैं तब वह अच्छे-बुरे में अंतर करना भूल जाता है और उफब कर उसे कहना ही पड़ जाता है कि मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा। रहना है तो मेरे साथ रहो वर्ना मुझे मेरे हाल पर छोड़ दो। ऐसी नौबत आप तो कम से कम न आने दें। अपने पार्टनर को खूबियों एवं खराबियों दोनों के साथ ही स्वीकार करें। जहां खूबियां होती हैं वहां खराबियां भी होती हैं, इन्हें जीवन से बिलकुल ही निकाला नहीं जा सकता है। क्या चीज अच्छी है और क्या चीज
जीवन के लिए बुरी है, इसमें भेद आप करने लगीं, तो पिफर दांपत्य
जीवन का सुख सूख सकता है। मीनमेख निकालने में समय बर्बाद न करें। यह जीवन जो मिला हुआ है, उसकी कोई गारंटी नहीं है कि कब कहां जाकर ठहर जाए।

ठिन है।

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