सेक्स जीवन का क्या है सच?


मैं ठीक नहीं हूं। पहले मैं कितनी सुंदर     थी। चेहरा बिलकुल चिकना और सापफ-सुथरा था। मैं तुम्हें अब अच्छी नहीं लगती हूं न?’ दीपा ने अपने पति हरीश से पूछा तो पहले तो वह हंसा, पिफर वह भी दीपा की आंखों से ही उसे देखने लगा-‘हां, तुम पहले की तरह खूबसूरत नहीं हो।’ कहकर हरीश चुपचाप सो गया। दीपा ने एक-दो बार उसे छेड़ा तो वह भारी मन से बोला-‘न जाने  क्यों आजकल तुम्हारे होने न होने का मुझ पर कोई असर ही नहीं होता है। तुम्हारी ब्यूटी की तरह ही मेरी यौनोत्तेजनाएं भी ध्ूमिल पड़ गई हैं…’ हरीश ने यह कहकर दीपा के मन में और भी अध्कि हीनभावना भर दी।
पति या पत्नी में से जब कोई एक अपने आप के बारे में निगेटिव सोच बना लेता है तब दूसरा भी उसी रंग में रंग जाता है। वह यह
स्वीकार कर लेता है कि उसका पार्टनर पहले जैसा नहीं है। यह सोच सेक्स जीवन को प्रभावित करती है। मन में यौनेच्छा बनती ही नहीं है। प्रौढ़ावस्था में वैसे भी जोश ठंडा पड़ जाता है और इच्छाएं होते हुए भी व्यक्ति कुछ कर नहीं पाता है और जब ऐसे में पत्नी अपने पति के सामने अपने रूप-सौंदर्य में कमियां निकालने लग जाती है तब पति उसकी ही आंखों से उसे देखने लगता है। इसमें पति का कोई कसूर नहीं होता है। ऐसे में उसे पत्नी से अरुचि सी हो जाती है।
मन में अपने रूप-सौंदर्य के बारे में जो भी सोचना है आप बेशक सोचें, पर पति के आगे इसकी चर्चा न करें। इससे उसमें स्वाभाविक रूप से ठंडापन आ जाता है। पिफर आप का सजना-संवरना या उससे प्यार करना कोई भी जादू नहीं चला पाता है। इस सच को तो आप सभी जानते हैं कि जो खूशबू, जो मादकता, जो रूप-सौंदर्य, जो शारीरिक सुडौलता युवा अवस्था में होती है, वह दो-तीन बच्चों की मां बनने या उम्र ढल जाने के बाद कायम नहीं रह पाती है। यह बदलाव सिपर्फ पत्नी में ही नहीं होता है, पति में भी इस तरह का बदलाव आ जाता है। बढ़ती उम्र, हारी-बीमारी, तनाव और नाना प्रकार की समस्याएं स्वास्थ्य तथा सौंदर्य दोनों पर ही अपना गहरा प्रभाव छोड़ जाती हैं। आप लाख जतन करने के बाद भी स्वयं को वैसा बनाए नहीं रख पाते हैं जैसा आप शादी के शुरुआती दिनों में थे। ये बदलाव मन ही मन स्वीकार करने के लिए होते हैं, सबको बताने के लिए नहीं। जब आप खुद अपनी कमियों का जिक्र पति के सामने करेंगी तो यह स्वाभाविक है कि वह भी आपको उसी नजर से देखना शुरू कर देगा। आपको शायद यह नहीं पता, सेक्स का संबंध् मन और आंखों से शरीर की अपेक्षा अध्कि होता है। जब पति की आंखें पत्नी को बदसूरत मान बैठती हैं, तब मन भी पत्नी को सेक्स के लिए उपयुक्त नहीं स्वीकार कर पाता है।
दीपा हरीश के लिए कल तक तो बिलकुल ही परपफेक्ट थी। उसमें कोई कमी ही नहीं थी। अपनी कमियों को जब दीपा ने खुद बताया तब कहीं जाकर हरीश को दीपा में कमियां नजर आईं। पिफर उसे उससे अरुचि हो गई। वह उससे एक दूरी बनाकर उसके साथ रहने लगा। इस दूरी ने हरीश को यौन-ठंडेपन का शिकार बना दिया। आज की यह एक सबसे बड़ी समस्या है। इच्छा है पर जोश नहीं है। जोश क्यों नहीं है?इसका कारण दीपा और हरीश की बातचीत से सापफ जाहिर हो जाता है।
अध्किांश पत्नियां अपने पतियों को दीपा की तरह ही सोच मन में पालकर यौन-ठंडेपन का शिकार बना देती हैं और उफपर से यह रोना भी रोती हैं कि पति उन पर ध्यान नहीं देते या उनमें कोई रुचि नहीं लेते।
अपने शरीर को लेकर जो भी नकारात्मक विचार हैं उनको परे करें। उनको अपने बेडरूम में या सेक्स जीवन में कोई जगह न दें। यह तो स्वाभाविक बदलाव है, इसे आप क्या कोई भी रोक नहीं सकता है। इसे स्वीकार कर खुद को भरसक इतना बुलंद करें कि पति को यह अहसास ही न हो कि आप पहले वाली सुघड़ एवं चंचल युवा स्त्राी नहीं हैं।
बढ़ती उम्र आप के शरीर को प्रभावित कर सकती है, पर मन को भी प्रभावित करे यह संभव नहीं है क्योंकि मन की चपलता और चंचलता को बढ़ती उम्र छू तक भी नहीं पाती है। यह तो आप हैं कि मन को उसकी गिरफ्रत में लाती हैं। मन और सोच को बढ़ती उम्र के गिरफ्रत में न आने दें। मन के हारे हार है और मन के जीते जीत। दीपा मन से हार गई है। उसने यह कबूल कर लिया है कि वह पहले जैसी खूबसूरत और जवान नहीं है। यह सोच तो युवा व्यक्ति को भी बुढ़ापे में ला सकती है। कहने का तात्पर्य है कि आप अपने विचार को नकारात्मक न होने दें। हमेशा सकारात्मक सोचें और कोई गलती से भी यह कह दे कि आप पहले जैसी अब नहीं लगती हैं तो इसे स्वीकार न कर उसे यह समझाने का प्रयास करें कि मुझे तो पफर्क नजर नहीं आ रहा है। मैं तो पहले से कहीं बेटर पफील करती हूं।
और यह सच भी है। उम्र के साथ-साथ व्यक्ति के अनुभव में
जो इजापफा होता है, उससे उसकी लाइपफ और आसान व हसीन हो
जाती है। जो कार्य पहले वह ताकत के बल पर करता आ रहा था,
उसे अब वह अनुभव के बल पर और भी बेहतर ढंग से करने की कोशिश करता है।

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