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यदि आप गर्भधारण करना चाहती है तो इन बातों का रखें जरूर ध्यान

pregnancyविवाह पश्चात हर स्त्री की इच्छा होती है कि वो भी एक बच्चे की मां बने (Pregnancy) लेकिन आज की कामकाजी महिलायें अत्यधिक भागदौड़ व  पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच खुद के खान-पान का ध्यान नहीं रख पाती और अति व्यस्तता के कारण वो तनाव में रहने लगती है जिसका असर उसके स्वास्थय पर भी पड़ता है। यदि आप भी गर्भधारण करने की सोच रही है तो आपको निम्न बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए ।

संतुलित एवं स्वस्थ आहार लें : स्वस्थ गर्भधारण के लिए जरुरी है कि आप प्रोटीनयुक्त और आइरन से भरपूर आहार ले। इसके लिए आप फल व सब्जियों का विशेषकर हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक और केला, इनमें फोलिक एसिड प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।  ब्रोकली में विटामिन सी और फोलिक एसिड तो टमाटर में लाइकोपिन होता है जो स्पर्म काउंट को बढ़ाता है वहीं गाजर में बीटा कैरोटीन पाया जाता है। अगर फलों की बात करें तो इनमें एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो कि गर्भधारण के लिए बहुत ही उपयोगी माने जाते हैं।  विटामिन बी 6 और पौटेशियम से युक्त केला हार्मोन्स को संतुलित रखता है।  संतुलित और स्वस्थ आहार कंसीव करने की ताकत को बढ़ाने के अलावा स्वस्थ ओव्यूलेशन की सम्भावना को बढ़ाते हैं। गर्भधारण की संभावना को बढ़ाने के लिए आप आर्गेनिक फ़ूड लें तथा साबुत अनाज, अंकुरित दालें व ताजे फलों के रस को अपनी डाइट में इस्तेमाल करें । हाँ इस दौरान सुबह का नाश्ता जरूर लें। यदि आपको पीसीओएस है तो कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम कर दें।

तनाव, चिंता को पास आने दें : अक्सर देखा गया है कि बहुत ज्यादा तनाव, डेप्रेशन, चिंता हाइपोथैलस ग्रंथि जो कि अंडाशय को अंडे रिलीज करने के लिए संकेत भेजने वाले हार्मोन को रेगुलेट करने में मुख्य भूमिका निभाती है का कामकाज प्रभावित होता है। कई शोधों से साबित होता है कि जो महिलाएं अधिक तनाव, डेप्रेशन व चिंता  में रहती हैं उन्हें गर्भधारण करने में कई तरह की दिक्कतें आती है।

नशों के सेवन से बचें : अक्सर देखा गया है कि पुरुषों की नशों की आदत के कारण महिलाओं को भी उनके साथ रहकर नशों के प्रभाव का शिकार होना पड़ता है या फिर अधिक तनाव को कम करने के लिए कुछ महिलाएं  स्वयं  कई तरह के नशे  करने लगती है जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत ही नुकसानदायक है। नशों से निकलने वाले विषाक्त पदार्थ प्रजनन अंगों को प्रभावित कर शुक्राणुओं और अंडों के उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं तथा कई बार नशे अण्डों को समय से पहले समाप्त कर देता है।

अपने वजन को मेंटेन रखें : गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. मीना गुप्ता जी बताती हैं कि ज्यादा वजन या बहुत कम वजन होना सामान्य ओव्यूलेशन की दर को धीमा कर देता है। इसलिए गर्भधारण की स्थिति में अपने बीएमआई पर नज़र रखना अति आवश्यक है। इसके साथ ही नियमित रूप से व्यायाम करें लेकिन व्यायाम करने से पूर्व अपने डॉक्टर से सलाह आवश्य ले लें।

 

 

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