आज जल्दी घर आ गए हो, तो चलो जरा बाहर ही टहल आते हैं।’ लता ने अवि के कंध्े पर बड़े ही याराना अंदाज में हाथ रखकर कहा, तो अवि की दिनभर की थकान मिट गई। लता ने पिफर अपनी बात दोहराई-‘क्या इरादा है?’
‘अब तुम इतनी मोहक अदा से कह रही हो, तो बंदा मना कैसे कर सकता है। सिपर्फ टहलने का ही इरादा है या और कुछ…?’
लता हंस पड़ी-‘इतने बु(ू तो तुम हो नहीं… टहलने जाएंगे, तो घर आकर खाना तो बनेगा नहीं।’
‘तो फटापफट तैयार हो जाओ। आज तुम्हें एक ऐसे रेस्टोरेंट में ले चलूंगा कि वहां का खाना खाकर तुम और भी अध्कि मुझसे प्यार करने लगोगी।’
वे दोनों रेस्टोरंेट से रात के नौ बजे घर लौटे। लता बेडरूम में आकर कपड़े चेंज करने लगी। तभी अवि पीछे से उसे बांहों में लेते हुए बोला-‘क्या इरादा है?’
‘इरादा नेक है, लेकिन मुझे तो नींद आ रही है। क्या कोई ऐसा उपाय है, जो नींद को दूर कर दे?’ लता यह कहकर अपनी पीठ अवि की छाती पर रगड़ने लगी।
‘खुजली हो रही है क्या?’ अवि ने यह कहते हुए उसकी पीठ पर उंगलियां रख दीं, पिफर आहिस्ता-आहिस्ता उंगलियां पीठ पर पिफराने लगा। लता की नींद अब ध्ीरे-ध्ीरे गायब होती जा रही थी।
वह अचानक ही मुड़कर अवि की छाती से चिपक गई-‘आखिर तुमने नींद तोड़ ही दी। आज पहली बार तुमने ऐसा किया है। अब तक मुझे इस आनंद से तुमने वंचित क्यों रखा?’
‘बु(ू, मुझे भी इसके बारे में कहां पता था। यह जो तुमने अपनी पीठ मेरी छाती में रगड़ी तो मुझे लगा कि मेरे हाथों का स्पर्श भी तुम्हें अच्छा लगा। यह तो इत्तेपफाक है।’ कहकर अवि ने लता को गोद में उठा लिया और पलंग की ओर बढ़ गया।
सेक्स समय मांगता है, प्यार मांगता है, मनुहार मांगता है और दर्द से राहत पाने के लिए साथ मांगता है। पत्नी के पास आना और सहवास रत हो जाना तथा पत्नी के पास आना और उसे सुनना-समझना ये दोनों ही बातें अलग-अलग हैं। दुनिया के सभी पति-पत्नी सेक्स जीवन को जीते हैं, लेकिन कितने जोड़े सुखद यौन-जीवन को जी रहे हैं या जीते हैं, सोचने वाली बात यह है। अब लता और अवि को ही लीजिए। अवि आॅपिफस से जल्दी घर आ गया, तो लता ने अपने मन की बात कह दी-‘चलो कहीं बाहर घूमने चलते हैं। घूमने का या टहलने का मतलब ही होता है चेंजिंग। घर में दिनभर रहते-रहते मन, शरीर आदि सब कुछ एकरसता के शिकार हो जाते हैं, उन्हें बदलाव चाहिए… नयापन चाहिए। किचन में रोजाना ही खाना बनाना, बर्तन मांजना, झाड़न्न्-पोंछा लगाना आदि सब ये घरेलू कार्य पत्नी को भीतर ही भीतर शुष्क और ईष्र्यालु बना देते हैं और इन बातों का सेक्स जीवन से गहरा संबंध् है। पत्नी अंदर ही अंदर टूट-बिखर रही है। खीझ, गुस्सा, ईष्र्या लिए घूम रही है, तो उसके साथ यौन-संबंध् बनाना या न बनाना बराबर है। वह पति को सेक्स में तृप्ति नहीं दे पाती है और उफपर से खीझ एवं गुस्से से पति को भर भी देती है। जब ऐसी पत्नी से पति यौन-संबंध् बनाता है, तो उसे आनंद नहीं मिलता है क्योंकि उसका मन तो पति से जुड़ा हुआ ही नहीं होता है। वह तो मानसिक तौर पर उसकी होती ही नहीं है, सिपर्फ शारीरिक रूप से उसकी होती है। तो शरीर का क्या करना जब मन कुंठित है और ईष्र्या एवं घृणा से भरा है।
अवि एक कुशल पति है। लता ने जब बाहर चलने की बात कही, तो लगे हाथ उसने रेस्टोरेंट चलने की भी बात कह दी। पत्नी जब घर से बाहर चलने की जिद करती है या आग्रह करती है, तो पति को समझ जाना चाहिए कि जरूर कोई न कोई बात है। पत्नी एक ही तरह की दिनचर्या से उफब गई है, बोर हो गई है। उसकी इस जिद को टालना ठीक नहीं है। अवि ने इस स्तर पर ही सोचा और लता को न सिपर्फ घुमाने ले गया, बल्कि रेस्टोरेंट भी ले गया और उसकी पसंद का ही भोजन उसे करवाया।
एक पति के लिए यह कोई बहुत बड़ी बात नही है, लेकिन इतना करने के बाद जो पत्नी से पति को मिलता है, वह बेशकीमती होता है। सेक्स जीवन में नयापन और बदलाव इन बातों से ही आता है। कहते हैं कि उम्र की ढलान में आकर पत्नी ईष्र्यालु हो जाती है। सेक्सी नहीं रह जाती है। जोर-जर्बदस्ती करो तो जली-कटी सुनाकर मूड ही खराब कर देती है, लेकिन यह सच नहीं है। ऐसी नौबत बढ़ती उम्र की वजह से नहीं आती है, बल्कि पति की वजह से पत्नी उसकी ओर से इतनी बेपरवाह हो जाती है। अक्सर देखा गया है जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है वैसे-वैसे पति अपनी पत्नी में रुचि लेना कम करता चला जाता है और उसमें एक ऐसी सोच कह लें या नजरिए का विकास होता चला जाता है कि पत्नी बच्चा पैदा कर-कर के बूढ़ी हो। अब उसमें पहले वाली बात नहीं रही। इस नजरिए से जब पति पत्नी को देखने-समझने लगता है तब उसकी रुचि पत्नी से कम उम्र की महिलाओं के प्रति बढ़ जाती है। कम उम्र की महिलाएं उसे मिलंे या न मिलें यह अलग बात है पर इतना तय है कि इस सोच की वजह से पत्नी के लिए वह नपुंसक जैसा ही हो जाता है। साल-छः माह में उसका पत्नी पर कभी दिल आता भी है, तो पत्नी कोई ध्यान नहीं देती है। पत्नी का ऐसा करना स्वाभाविक है। जब कोई पफीलिंग ही नहीं है, खिंचाव ही नहीं है तो पिफर सिपर्फ हवस मिटाने के लिए नजदीक आने से क्या लाभ।
अवि की तरह जो पति होते हैं, उनकी पत्नियां हर उम्र में कमसिन बनी रहती हैं, क्योंकि वे कमसिन हैं, सुंदर हैं, जवां हैं, इसकी अनुभूति उनके पति उन्हें कराते रहते हैं। किसी भी आदमी को बार-बार कहा जाए कि तुम बहुत कमजोर हो तो वह स्वयं को अकारण ही कमजोर महसूस करने लगेगा। गलत और सही दोनों बातों का दिमाग पर असर होता है। इसलिए पत्नी को कभी भी कमजोर न बताएं। कल और आज की तुलना कर उसकी सुंदरता और आकर्षण का निर्धरण न करें। वह जैसी कल थी आज भी वैसी ही है, इन शब्दों से उसका आकर्षण बना रहता है। वह हर पल स्वयं को जवान महसूस करती रहती है। सेक्स इन सारी बातों पर ही निर्भर करता है। घटता-बढ़ता भी इन्हीं से है।

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