रागिनी ने आॅपिफस के लिए तैयार हो रहे विक्रम से कहा-‘आज जरा जल्दी आ जाना।’
‘क्यों, आज क्या बात है, भई? टिपिफन तैयार कर दिया?’ विक्रम ने कारण जानना चाहा तो रागिनी ध्ीमे स्वर में बोली-‘वाॅशिंग मशीन तीस प्रतिशत छूट पर मिल रही है। रुपए दोगे तभी तो मैं खरीदूंगी।’
‘चुप रह, पिफजूल की बातों में हमेशा लगी रहती है। घर में कोई वाॅशिंग मशीन नहीं आएगी… पैसे पेड़ पर पफलते हैं क्या?’ कहकर विक्रम आॅपिफस चला गया।
शाम को वह घर आया तो रागिनी ने चाय-पानी तो दिया लेकिन कोई बातचीत नहीं की। थोड़ी देर के बाद वह बेडरूम में आई तो चाय का कप खिड़की के पास देखकर भड़क उठी-‘चाय पीकर खिड़की के पास कप रख दिया। इतने थके तो नहीं हो कि किचन में ले जाकर नहीं रख सकते? बच्चे तुमसे ही तो गंदी आदतें सीख रहे हैं।’ रागिनी यह कहकर किचन में चली गई। टिपिफन खोला, पिफर बड़बड़ाने लगी-‘खाना तो खाना आता है और टिपिफन में पानी डालकर धेना नहीं आता… इसमें से कैसी दुर्गंध् आ रही है।’ रागिनी ने अजीब-सा मुंह बनाकर कहा तो विक्रम को भी गुस्सा आ गया-‘सुबह का गुस्सा इस समय उतार रही हो। जो लोग कमजोर होते हैं, वही अपनी भड़ास इस तरह गलत तरीके से निकालते हैं। वाशिंग मशीन उतना जरूरी भी नहीं है और पैसे भी इस समय नहीं हैं… दोनों ही बात है।’
यह कहकर विक्रम चुप हो गया। तभी बारह वर्षीय बेटे ने
आकर दस रुपए मांगे। विक्रम ने मना कर दिया-‘अभी खुले नहीं हैं, बाद में दे दूंगा…’
बेटा गुस्सा हो गया और जाकर किताब पलटने लगा। कोई दस मिनट के बाद विक्रम ने बेटे से पानी मांगा तो उसने यह कहकर टाल दिया-‘मैं पढ़ रहा हूं, पापा… मम्मी से मांग लो।’ विक्रम ने खुद उठकर पानी लिया, पिफर कहा-‘तुम मां-बेटे एक जैसे हो। वाॅशिंग मशीन लाने से मना कर दिया तो उसने मुझमें दोष निकालकर बदला ले लिया और तुझे दस रुपए नहीं दिए तो तूने पढ़ाई का बहाना कर पानी लाने से मना कर दिया, लेकिन मेरी मजबूरी को किसी ने भी समझा नहीं।’
विक्रम यह कहकर तनाव में आ गया। घर में पत्नी, बच्चे सभी थे, पर वह स्वयं को एकदम अकेला महसूस कर रहा था। घर में किसी से कुछ कहने या मांगने में जब संकोच महसूस हो तो पिफर आदमी अपनों के बीच अनजान और अकेला पड़ जाता है और वह उन्नति नहीं कर पाता है। उसके मन में यह सोच घर कर जाती है कि जब कोई मेरी सुनता ही नहीं है, कोई मेरा हमदर्द ही नहीं है और जरूरतें पूरी न कर पाने की स्थिति में हर कोई बदले की भावना मन में पाल ले तो पिफर मैं उन्नति के बारे में क्यों सोचूं? उन सब के लिए क्यों दिन-रात मरूं, जो अपने हैं ही नहीं।
आज अध्किांश पति-पत्नियों में इस तरह की समस्या है और उनकी इस समस्या का गलत प्रभाव बच्चों पर भी पड़ रहा है। विक्रम से बेटे ने रुपए मांगे। उसने देने से मना भी नहीं किया। बस खुले रुपए न होने की बात कही और बेटे के मन में उसके प्रति बदले की भावना घर कर गई। पानी मांगने पर उसने अपरोक्ष रूप से मना कर दिया कि मैं पढ़ रहा हूं। पत्नी की मांग पैसे न होने के कारण पूरी न कर सका तो उसने चाय पीकर कप खिड़की के पास क्यों रखा, टिपिफन धेया क्यों नहीं आदि बातें सुनाकर अपनी भड़ास निकाल कर ही दम लिया। ऐसा करना गलत है। आप किसी चीज की मांग करती हैं और पति पैसे न होने की बात बताकर मना कर देता है तो जो कहना हो उसी समय कहकर मामला रपफा-दपफा कीजिए। इस बात को खींचने की कोशिश मत कीजिए। खींचेंगी तो बात बिगड़ेगी। बच्चे नकल करने में बड़े ही निपुण होते हैं। आपके इस आचरण का वे भी नकल कर आप जैसा ही दुव्र्यवहार आपके साथ या आपके पति के साथ या पिफर किसी के भी साथ करने का प्रयास करेंगे, जो उनके भविष्य के लिए किसी भी रूप में सही नहीं होगा।
यह सोचने वाली बात है। विक्रम चाय पीने के बाद कप बेडरूम में शुरू से ही रखता आ रहा है। टिपिफन भी वह आॅपिफस से जूठा ही लेकर आता रहा है। रागिनी ने कभी भी तो इसका कोई विरोध् नहीं किया या बुरा-भला नहीं कहा। पिफर आज उसने हंगामा क्यों खड़ा किया?इससे तो यही बात सि( होती है न कि घर में वाॅशिंग मशीन लाने से पति ने मना कर दिया तो उसने पति को जलील करने का पफैसला कर लिया। जान-बूझकर उसने बच्चों के सामने उसे बुरा-भला कहा। बच्चे ने जब देखा कि पापा ने मां की मांग पूरी नहीं की तो उसने पापा के भी साथ कोई अच्छ व्यवहार नहीं किया पिफर मेरी मांग पूरी नहीं की तो मैं क्यों उन्हें पानी लाकर दूं। डायरेक्ट रूप से उसमें मना करने की हिम्मत नहीं थी तो उसने पढ़ाई की आड़ में मना करना सुरक्षित समझा। कल को यही बच्चा जब बड़ा हो जाएगा तब उसे किसी बहाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
ऐसी नौबत न आए, इसलिए यह आवश्यक है कि पति-पत्नी एक-दूसरे को समझें। ऐसे व्यवहार सिपर्फ पति-पत्नी तक ही सीमित नहीं रहते हैं, ध्ीरे-ध्ीरे पफैलते हुए बच्चों के दिलो दिमाग तक भी पहुंच जाते हैं, पिफर बाद में महसूस होने लगता है कि हमने जो भी आचरण एक-दूसरे के साथ किया उसे बच्चों ने भी ग्रहण कर लिया। पिफर भस्मासुर वाली स्थिति आ जाती है। अपने ही बच्चे माता-पिता को उंगली दिखाने लगते हैं और कहने लगते हैं कि ऐसे आंखें पफाड़कर क्या देख रहे हो… तुमने भी तो यही सब किया हुआ है।
पिफर अपनी गलती का अहसास पति-पत्नी को होने लगता है, लेकिन इस अहसास का कोई मूल्य नहीं रह जाता है। बेटे ने जब पानी देने से मना किया या कहा कि मम्मी से मांग लो, मैं पढ़ रहा हूं तो इस पर रागिनी को चुप्पी साध्ना नहीं चाहिए था। वह बच्चे को डांटती और उठकर पानी देने को कहती तो शायद बच्चा मां के आचरणों की नकल करने की गलती पिफर कभी नहीं कर पाता। कहने का तात्पर्य है कि दुनिया के क्या अमीर, क्या गरीब, क्या पढ़े, क्या अनपढ़ सभी पति-पत्नियांे में वैचारिक मतभेद होते हैं और जरूरतें पूरी न होने पर वे एक-दूसरे से नाराज भी होते हैं, पर ऐसी स्थिति में इस बात का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी हो जाता है कि उनके झगड़ों का असर बच्चों पर न पड़े। वे इन से बिलकुल ही अनछुवे रहें और उनका प्यार, विश्वास दोनों के ही प्रति बना रहे तथा उनकी नजरों में पति-पत्नी आदर्श माता-पिता ही बने रहें। इसके लिए पति-पत्नी दोनों को ही मनमुटाव के पलों में भी हंसते हुए और सामान्य भाव से बच्चों के सामने मिलना आवश्यक है। बड़े होते बच्चों के सामने बेढंगे और अव्यावहारिक तरीके से लड़ना-झगड़ना या गालियां निकालना भी गलत साबित हो सकता है क्योंकि बच्चों में नकल करने की प्रवृत्ति होती है और उन्हें अच्छे-बुरे का ज्ञान नहीं होता है।

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