जो व्यक्ति इस्त्री से सम्बन्ध नहीं बना पता उसे नामर्दी का मरीज कहते है अन्य शब्दो में जब व्यक्ति को कामउत्तेजना थोड़े समय के लिए ही होती हो या बिलकुल न होती हो इस अवस्था को ही नामर्दी कहते है I

नामर्दी के दो प्रकार होते है

1. मानसिक – कुछ लोग मानसिक रूप से नामर्द होते है शारीरिक रूप से नहीं I मानसिक रोगी स्त्री के पास जाने से डर जाता है या फिर अत्यधिक उत्तेजित हो जाता है । जिस से वह सम्भोग नहीं कर पाता और मानसिक नामर्दी के शिकार हो जाता है ।

2. शारीरिक – पोस्टिक आहार की कमी, अत्यधिक हस्तमैथुन, अन्य किसी बीमारी के साइड इफ़ेक्ट सवरूप या किसी दुर्घटना से कुछ व्यक्ति नामर्दी के शिकार हो जाते है ।

नामर्दी का इलाज
नामर्दी के लिए योग
1. कंडासना

नामर्दी को दूर करने के लिए कंडासना सबसे उपयुक्त आसान है । इसके निरन्तर अभ्यास से नामर्दी की समस्य जड़ से खत्म हो जाती है ।

विधि
1 – निचे बैठ जाये
2 – टांगो को मुड़ते हुए सीना के नजदीक लाये
3 – पेरो का आधार साइन की तरफ रखे
4 – कुछ छण इसी अवस्ता में रहे फिर सामान्य स्थिति में आ जाये

2. हलासन

इस आसान आसन से नामर्दी की समस्या को ठीक किया जाता है । इस में शरीर का आकार खेत में चलाए जाने वाले हल के समान हो जाता है। इसीलिए इस आसन को हलासन कहा जाता हैं।

विधि
1- शवासन की अवस्था में भूमि पर लेट जाएं। एड़ी-पंजे मिला लें। हाथों की हथेलियों को भूमि पर रखकर कोहनियों को कमर से सटाए रखें।
2- श्वास को सुविधानुसार बाहर निकाल दें। फिर दोनों पैरों को एक-दूसरे से सटाते हुए ऊपर उठाते जाएं। घुटना सीधा रखते हुए पैर पूरे ऊपर 90 डिग्री के कोण में उठाएं।
3-हथेलियों को भूमि पर दबाते हुए हथेलियों के सहारे नितंबों को उठाते हुए, पैरों को पीछे सिर की ओर झुकाते हुए पंजों को भूमि पर रख दें।
4-अब दोनों हाथों के पंजों की संधि कर सिर से लगाएं। फिर सिर को हथेलियों से थोड़-सा दबाएं, जिससे आपके पैर और पीछे की ओर खसक जाएंगे।

5-पुन: क्रमश: शवासन में लौट आएं अर्थात पहले हाथों की संधि खोलकर पुन: हथेलियों के बल पर 90 और फिर 60 डिग्री में पैरों को लाते हुए भूमि कर टिका दें।

नामर्दी के घरेलू इलाज
  • छुहारे – छुहारे को दूध में देर तक उबालकर खाने से और उसी दूध को पीने से नपुंसकता खत्म होती है। रात को पानी में दो छुहारे और 5 ग्राम किशमिश भिगो दें। सुबह को पानी से निकालकर दोनों मेवे को दूध के साथ खायें।
  • बादाम : बादाम की गिरी, मिश्री, सौंठ और काली मिर्च कूट-पीसकर चूर्ण बनाकर कुछ हफ्ते खाने से और ऊपर से दूध पीने से धातु (वीर्य) का खत्म होना बन्द होता है। बादाम को गर्म पानी में रात में भींगने दें। सुबह थोड़ी देर तक पकाकर पेय बनाकर 20 से 40 मिलीलीटर रोज पीयें इससे मूत्रजनेन्द्रिय संस्थान के सारे रोग खत्म हो जाते हैं।
नामर्दी के आयुर्वेदिक इलाज
    1. अश्वगंधा : अश्वगंधा का चूरन, असगंधा और बिदारीकंड को 100-100 ग्राम मात्रा में बारीक़ पीसकर चूरन तैयार करें। रोज़ सुबह शाम दूध के साथ आधा चम्मच यह चूरन लेने से वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या बढ़ती है और मर्दाना कमज़ोरी दूर होती है।
    2. जायफल : 15 ग्राम जायफल, 5 ग्राम अकरकरा, 20 ग्रामा हिंगुल भस्म और 10 ग्राम केसर मिलाकर पीस लें। अब इस मिश्रण में शहद मिलाकर घोट लें। फिर चने के दाने के बराबर गोलियाँ बना लें। रोज़ सोने से पहले 2 गोलियाँ दूध के साथ खाएँ। इस आयुर्वेदिक उपाय से शिशन का ढीलापन ख़त्म हो जाएगा और नामर्दी से छुटकारा मिलेगा।
दिए गए उपायों से लाभ न हो तो अपने फॅमिली डॉक्टर से सलहा ले या किसी अनुभवी सेक्सोलॉजिस्ट को दिखाए ।
डॉ अशोक गुप्ता

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