सुलेखा बार-बार पति से आग्रह कर रही थी कि वह उसकी सहेली के घर चले। उसका पति कमल उसकी बात को काटकर कुछ और ही कहने के लिए बेताब था, लेकिन सुलेखा उसे मौका ही नहीं दे रही थी। अंत में कमल झल्ला ही पड़ा-‘‘सुलेखा, तुम से कई बार कह चुका हूं कि मुझे तुम्हारी सहेली के घर जाना अच्छा नहीं लगता। वह सहेली तुम्हारी है। जब मिलने का मन करे, जाकर मिल आया करो। मैंने तुम्हें रोका थोड़े ही है।’’ पति की बात पर सुलेखा झल्ला कर रह गयी।
अगर आपके किसी मित्रा या रिश्तेदार को आपके पति पसंद नहीं करते हैं तो उन्हें वहां जबदस्ती मिलवाने न ले जायंे। इससे आपके पति आप पर खुश होने की बजाए नाराज ही होंगे। अच्छी जिंदगी जीने के लिए अपने स्वभाव में यह सोच पैदा कीजिए।
रीमा अपने पति के साथ एक दावत में गयी। भीड़ कापफी थी। स्त्राी-पुरुष हंस-बोल रहे थे। रीमा भी एक जगह खड़ी हंस-बोल रही थी। उसकी साड़ी का पल्ला बगल में खड़े युवक की बांहों को छू रहा था और युवक अपने दोस्तों को दिखा-दिखाकर आत्म विभोर हो रहा था। तभी रीमा के पति की नजर पत्नी पर पड़ी। वह मन-ही-मन दांत भींच कर रह गया। घर पहुंचा तो रीमा पर बरस पड़ा-‘‘तुम्हें पार्टी-पफंक्शन में उठना-बैठना भी नहीं आता। कम-से-कम अपने कपड़े सहेज कर तो उठना-बैठना सीख लो।’’
रीमा को तो इस बात की कोई खबर ही नहीं थी। पति के बताने पर उसे अपने आप पर कापफी गुस्सा आया कि वह इतनी लापरवाह कब से हो गयी।
बात सच भी है, कहीं बाहर जायें तो अपना पर्स, कोट, साड़ी का पल्ला या दुपट्टा सम्हाल कर बैठें या खड़े हों, ताकि वे दूसरों का स्पर्श न करें। ऐसा न करने पर भरी महपिफल में आपकी बेइज्जती हो सकती है।
उफषा ने पति को सूचित किए बिना ही होटल जाने का प्रोग्राम बना लिया। पति घर पर आये तो पत्नी को बन-संवरकर बैठे देख अवाक् रह गये। चाय की पफरमाइश की तो उफषा ठुनक कर बोली, ‘‘चाय होटल में ही पी लेंगे।’’
‘‘होटल!… कौन जा रहा है होटल?’’ तुम्हारा दिमाग तो नहीं खराब हो गया। मैंने एक पार्टी को समय दिया हुआ है। वह मेरा इंतजार कर रही होगी। चाय पिलानी हो तो पिला दो वरना मैं चलता हूं।
पत्नी को कोई भी प्रोग्राम बनाने से पहले पति से बात तो कर ही लेनी चाहिए। यदि आप पति को कहीं ले जाना चाहती हैं तो कार्यक्रम बनाने से पहले उनसे पूछ जरूर लें अन्यथा व्यर्थ का क्लेश होगा। यह बात तो छोटी है, पर पति को नजदीक लाने में बहुत कारगर सि( होगी।
वास्तव में जीवन जीने का तरीका अगर आपको नहीं मालूम तो पिफर आप अपने पति के करीब मानसिक तौर पर कतई नहीं आ सकती हैं। आप अपने पति के कार्य को समझें। अपनी रुचि प्रदर्शित करें। कार्यालय में उन्हें बार-बार पफोन न करें। पफरमाइश करते समय सोच लें कि क्या उस वस्तु की आपको सचमुच ही जरूरत है। पति इन बातों से मानसिक रूप से संतुष्ट रहेगा।
इसी प्रकार मेहमानों के प्रति भी स्वस्थ व्यवहार करना सीखें,
क्योंकि कि घर आये मेहमानों के प्रति आपकी जितनी जिम्मेदारी होती, उतनी पति की नहीं होती है। चाय से लेकर लंच तक का प्रबंध् आपको ही तो करना होता है। मेहमान चाहे आपकी पसंद के हों या नापसंद के, उनसे मुस्कराकर मिलें और पूरा ध्यान उन पर दें। यदि मेहमान आपके घर रहने के लिए आये हैं और आपको देर से सुबह उठने की आदत है तो उन्हें बता दें कि चाय का सामान कहां रखा है ताकि वे खुद चाय बना सकें। यदि आप खुद मेहमान हैं तो पिफजूल की पफरमाइश न करें और जिसके घर आप गई हैं, उनके समय का ध्यान रखें तथा घर के नियमों का पालन करें। जीवन जीने की इस शैली से खुश होकर जब मेहमान या मेजबान आपके पति के सामने आपकी प्रशंसा करेंगे तो वह पफूले नहीं समायेंगे। कोई भी पति दूसरे के मुंह से अपनी पत्नी के बारे में अच्छी बातें सुनकर पत्नी पर मंत्रामुग्ध् हो जाता है।
आप जितनी ही शिष्ट, शालीन, स्मार्ट और मृदुभाषी बनी रहेंगी पति का सामीप्य उतना ही आपको मिलेगा। शिष्टाचार से पति को अपने वश में करना बहुत आसान है। अपनी जीवन शैली में समय-समय पर पफेर बदल करते रहना जरूरी है। पति के मित्रों से भी मिलने का तौर-तरीका व्यावहारिक होना चाहिए। पति की मौजूदगी या नामौजूदगी में उसके मित्रों से सहज और शालीन व्यवहार करना ही अच्छा रहता है।
अब रीमा को ही लीजिए। वह सुशिक्षित होते हुए भी इन सब बातों को नहीं समझ पाती। उसका मानना है कि नारी स्वतंत्रा है। उसको इतनी आजादी तो मिलनी ही चाहिए कि वह पुरुष मित्रों के साथ बोल-बतिया सके। इसे आजादी नहीं, स्वच्छंदता कहा जा सकता है। नारी को या पुरुष को आजादी तो मिलनी चाहिए, लेकिन स्वच्छंदता नहीं।
शिखा का पति चाहकर भी उसको टोक नहीं पाता है। उसके मित्रा घर पर जब भी आते हैं, वह उनसे बात करते-करते लट्टू हो जाती है। वैसे शिखा के मन में कोई गलत भाव नहीं हैं, पर घर-परिवार में एक बहू का शिष्ट और सौम्य तरीका किसी से मिलने-जुलने के लिए तो होना ही चाहिए। शिखा शायद इन तौर-तरीकों से अनभिज्ञ है। पति अंदर ही अंदर कुढ़ता हुआ चुप्पी साध्े रहता है। वह रोमा से सीध्े मुंह बात भी नहीं करता है तो पिफर आप ऐसी स्थिति आने ही क्यों दें?
पति के मित्रों का स्वागत चाय नाश्ते से करने के बाद आप स्वयं को अन्य कार्यों में व्यस्त कर लें। पति के दोस्तों से आपका व्यवहार पति की इच्छानुसार हो तो अच्छा है, लेकिन पति की किसी गलत बात को आप हरगिज न मानें। न बहुत पुराना और न अति आध्ुनिक-बस बीच का रास्ता अपनाएं, तभी पति आप पर विश्वास कर पायेगा तथा आपको इज्जत भी भरपूर मिल पायेगी।

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