रसना ड्राइंग रूम में आई, तो अरविंद ने कहा-‘टेबल पर खाना लगाओ। मम्मी-पापा के लिए भी खाना लगा देना।’
रसना वापस किचन में चली गई। टेबल पर सबके लिए खाना लगा दिया। रसना भी साथ में बैठकर खाना खाने लगी। अरविन्द ने अपनी मां की ओर देखते हुए कहा-‘किचन में आजकल तुम नहीं जाती हो क्या मां?’
‘नहीं, मैं नहीं जाती… आजकल तेरी बीवी ही खाना बना रही है।’
‘रसना कैसे परिवार की है, तुम्हें तो पता ही है। रसना यहां भी खाना अपने मां-बाप की पसंद का ही बनाती है। आज का खाना कितना मरा-मरा सा है।’
‘मरा-मरा…’ कहकर सास खूब जोर से हंसी। ससुर भी मुस्करा पड़े। अरविंद मन-ही-मन मजे ले रहा था।
रसना कुछ नहीं बोली। चुपचाप बेडरूम में आ गई। अरविंद आॅपिफस चला गया।
रात के आठ बजे वह घर आया, तो रसना ने उससे कोई बात नहीं की। वह सीध्े बेडरूम में जाकर लेट गई। अरविंद ने उसे खाने पर बुलाया, तो उसने कह दिया कि मुझे बुखार है। तुम मां-बाबूजी के साथ खाना खा लो। अरविंद के पापा ने ध्ीमी आवाज में कहा-‘बहू तो दोपहर तक ठीक ही थी। वह शायद किसी बात को लेकर नाराज है।’ यह कहकर वह आगे बोले-‘देखो, तुम मां-बेटे बहू का मजाक बनाना छोड़ दो। वह कितनी अच्छी है कि अंदर-ही-अंदर घुटकर रह जाती है, पर जवाब नहीं देती है। सुबह का खाना इतना बुरा तो नहीं बना था कि तुम मां-बेटे ने बहू पर कटाक्ष किया…’ पापा के शब्द पूरे होते-होते अरविंद परेशान हो गया। वह ठीक से खाना भी नहीं खा सका।
वह बेडरूम में घुसते ही बोला-‘रसना, बुखार है तो दवा क्यों नहीं ली?’
‘दवा लेकर ही क्या करूंगी, जब तुम रोग देने के लिए हर पल तैयार बैठे रहते हो।’ रसना ने गुस्से से कहा।
‘यह क्या कह रही हो…?’ अरविंद यह कहते-कहते सकपका गया। रसना कापफी आवेश में थी-‘ठीक ही तो कह रही हूं। मम्मी-पापा कभी कुछ नहीं कहते। उनके सामने जब-तब मुझे अपमानित अगर कोई करता है, तो वह तुम हो… तुम… मैं अच्छा से अच्छा करने की कोशिश हमेशा करती हूं सिपर्फ तुम्हारी खातिर और तुम हो कि मेरी भावनाओं को समझते ही नहीं हो…’
‘साॅरी… आज पापा ने मुझे इस बात का अहसास करा दिया है कि मैं गलत हूं।’
‘पापा के अहसास करवाने पर तुम मुझसे मापफी मांग रहे हो, नहीं तो मुझे ऐसे ही सबके सामने नीचा दिखाते रहते?’
‘नहीं यार… तुम तो दिल से लगा बैठी हो।’
कहकर अरविंद ने रसना को अपनी तरपफ खींच लिया-‘यह समय गुस्सा करने के लिए नहीं होता है। शांत हो जाओ। मैं तो मजाक-मजाक में आज तक तुम्हें टोकता रहा… कोई-न-कोई कमेंट्स करता रहा… और तुम्हारे प्यार एवं जज्बात से महरूम रहा… अब बस भी करो…’ कहते हुए अरविंद ने रसना के गाल पर अपने होंठ रख दिए। रसना का गुस्सा कापफूर हो गया। वह पति की पीठ को ध्ीरे-ध्ीरे सहलाने लगी।
भावनाएं आहत होती हैं, दिल पर चोट पहुंचती है, अपमान मिलता है तो सेक्स जीवन भी इनसे किसी-न-किसी रूप में अवश्य ही प्रभावित होता हैं। जो पति पत्नी को बात-बात पर टोकते रहते हैं, कोई भी बात कहने से पहले स्थान, समय और आस-पास खड़े लोगों का ध्यान नहीं रखते हैं, उनकी सैक्सुअल लाइपफ बहुत ही नाजुक दौर से गुजरती है। ऐसे पति की पत्नी जिद्दी, नकचढ़ी, गुस्सैल और निडर बन जाती है। वह सैक्सुअल लाइपफ में चाहकर भी कभी डूब नहीं पाती और पति को उलटा ही जवाब देती है, जिससे पति जान-बूझकर उसे सार्वजनिक जगहों पर जलील करने की कोशिश करता है और पत्नी को अपमानित या नीचा दिखाने की पति की यह कोशिश पत्नी को भूलकर भी पति के करीब पहुंचने नहीं देती है, सेक्स को महसूस करने या समझने की बात तो दूर की रही।
रसना अरविंद से तब तक दूर ही रही… एक पहली सी ही बनी रही और सशरीर अरविंद की बांहों में आने के बाद एक गुड़िया-सी बेजान अरविंद को लगती रही जब तक अरविंद ने इसकी वजह नहीं जानी और उससे साॅरी नहीं कहा। पति को पत्नी तो मिलेगी ही कितनी भी बदतमीजियां करने के बावजूद, लेकिन सेक्स भी मिलेगा इसकी कोई गारंटी नहीं क्योंकि सेक्स एक जल प्रवाह सा सहज होता है, आजाद होता है और कोई बाध सहन नहीं करता है। और आप तो जानते ही हैं कि सेक्स पत्नी के ही इर्द-गिर्द घूमता है। वह पति से असंतुष्ट है, नाराज है, उसके मन में कोई गांठ है या पति द्वारा अपमानित होने का अहसास है तो वह तन-मन से पति से जुड़ नहीं पाती है। पति उस पर इसके लिए दबाब बनाता है, उसे यातनाएं देता है या कोसता है या उस पर बंदिशें लगाता है या सताता है तो पत्नी उसके प्रति विद्रोही हो जाती है। विद्रोही पत्नी कुछ भी कर सकती है, घर से भाग भी सकती है, पति का खून भी कर सकती है या पिफर पति से तलाक भी ले सकती है क्योंकि वह यौन-अतृप्ति के साथ-साथ पति की यातनाओं को भी भुगत रही होती है।
अरविंद के पापा ने समय रहते उसे हकीकत का दर्शन नहीं कराया होता तो शायद ही वह कभी पत्नी के प्रति सीरियस हो पाता। सुखद सेक्स-जीवन के लिए पत्नी को खुश रखना जरूरी होता है, क्योंकि यह एक के वश की चीज नहीं है। इसके लिए पत्नी का राजी होना या तहेदिल से तैयार होना आवश्यक है। झुकने, नरम पड़ने, सहने, त्याग करने, धैर्य धरण करने और सुनने-समझने से सेक्स उभर कर वैचाहिक-जीवन में आता है और पति-पत्नी दोनों को ही सहज और सपफल बनाता है।

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