शीघ्रपतन की समस्या व समाधान

यूँ तो शीघ्रपतन की समस्या लगभग 80 प्रतिशत पुरुषों में मानसिक रूप से ही होती है तथा बाकी 20 प्रतिशत शारीरिक होती है। इस बात का निष्कर्ष चिकित्सक जांच के बाद ही निकला जा सकता है। यदि किसी पुरुष को कभी ऐसा अहसास होने लगे कि वह शीघ्रस्खलन की समस्या से ग्रस्त हो गया तो इस बारे में उसे सकारात्मक रूख अपनाते हुए इस समस्या के समाधान की तरफ ध्यान देना चाहिए क्योंकि स्खलन के साथ पुरुष की उत्तेजना तो शांत हो जाती है लेकिन पत्नी अतृप्त रहकर छटपटाती रह जाती है जबकि पुरुष के साथ उसकी पत्नी भी शरीर सुख की पूर्ण अधिकारी होती है। शारीरिक मिलन के लिए पुरुष की शारीरिक क्षमता पर ही स्त्री का सुख निर्भर करता है। कई पुरुषों की आदत होती है कि वे सेक्स से संबंधित किसी भी समस्या को देर तक अपनी मैन-ईगो के कारण टालते रहते हैं जिससे उनके वैवाहिक जीवन में कई तरह की परेशानियां उत्पन्न हो जाती है अतः पुरुषों को शीघ्र स्खलन या जल्दी डिस्चार्ज के उपचार के लिए अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए जल्दी ही ध्यान देना चाहिए।

shighrapatan aur ilaj

जब व्यक्ति को ऐसा लगने लगे कि उसका अपने स्खलन (डिस्चार्ज) पर नियंत्रण नहीं हो पाता तो उसे चाहिए कि वह सेक्स से पहले की जाने वाली क्रीड़ा में समय कम लगाएं, पार्टनर से फालतू की छेड़छाड़ से दूर रहने का प्रयास करे। शीघ्रस्खलन से ग्रस्त पुरुषों को चाहिए कि वे सेक्स संबंधों के समय शिश्न प्रवेश के तुरंत बाद घर्षण न करें बल्कि अपनी कुहनियों पर शरीर का बोझ सँभालते हुए एकदम शिथिल हो जाएँ तथा उसके बाद गहरी सांस लेते जितनी साँस ले सकते हैं, उतनी लें। उसके बाद घर्षण आरम्भ करें घर्षणों की तीव्रता कम ही रखें, उसके बाद थोड़ा रुकें, शरीर को विराम लेने दें फिर घर्षण करें क्योंकि सेक्स संबंधों में सांसों की गति का बहुत अधिक महत्व होता है। शीघ्रपतन की स्तिथि में या अत्यधिक उत्तेजना महसूस करने की स्थिति में अपना शरीर निश्चेष्ट करते हुए गुदाद्वार की मांसपेशियों को जितना संभव हो सके सिकोड़ने का प्रयास करना चाहिए। जिस तरह व्यक्ति अपने मल-मूत्र का वेग रोकने के लिए बार-बार गुदा की पेशियों को सिकोड़ने का प्रयास करता है उसी तरह यदि शीघ्र स्खलन से ग्रस्त व्यक्ति इस प्रक्रिया को बार-बार दोहराए तो काफी हद तक उसकी शीघ्रस्खलन की समस्या दूर हो सकती है।

शीघ्रपतन के रोगियों के लिए विपरीत रति का आसन बहुत अच्छा माना गया है। इस आसन में स्त्री ऊपर तथा पुरुष नीचे वाली पोजीशन में होता है। इस आसान में स्त्री पुरुष के बीच सेक्स क्रिया का तालमेल होना बहुत जरुरी होता है जब पुरुष की उत्तेजना बढ़ती दिखाई दे तो उसे स्त्री को शारीरिक क्रियाएं रोकने को तुरंत कह देना चाहिए। आमतौर पर यह देखा जाता है कि पुरुष का स्खलन जल्दी होने पर पति-पत्नी दोनों अनमने से होकर एक-दूसरे से मुंह फेर का सोने का प्रयास करते हैं , ऐसी स्थिति काम विज्ञानं की दृष्टि से गलत है। यदि किसी व्यक्ति का स्खलन जल्दी हो जाए तो उसे कुछ समय रूक कर दोबारा से शारीरिक संबंध बनाने चाहिए। दूसरी बार के संबंधों में समय कुछ ज्यादा लगता है।

सेक्स से सम्बंधित चाहे कैसी भी समस्या हो उसके उपचार या समाधान के लिए जितनी महत्वपूर्ण भूमिका चिकित्सक की होती है उतनी ही महत्वपूर्ण पत्नी की भी होती है लेकिन देखने में अक्सर ऐसा आता है कि जब कोई पुरुष शीघ्रपतन की समस्या से ग्रस्त हो जाता है तो पत्नी का व्यवहार पति के प्रति बदल सा जाता है। वह अपने व्यवहार से बार-बार पति को उसकी कमजोरी का अहसास कराने लगती है तथा तरह-तरह के ताने देकर पति को डिप्रेशन में डाल देती है जबकि ऐसे व्यवहार से स्थिति सुधरने के स्थान पर और बिगड़ जाती है.

अतः पत्नी को अपने व्यवहार में सहयोगात्मक रूख के साथ पूरी तरह से पति का साथ देना चाहिए तथा उन्हें किसी भरोसेमंद चिकित्सक से सलाह लेने के लिए प्रेरित करना चाहिए।

धन्यवाद्,
डॉ.अशोक गुप्ता

Leave a comment

Type in
Details available only for Indian languages
Settings
Help
Indian language typing help
View Detailed Help